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Haryana Old Pension Scheme: हरियाणा के अंशकालिक कर्मचारियों को पुरानी पेंशन का लाभ, हाईकोर्ट ने दिया 3 महीने का समय

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने नियमित होने से पहले की निरंतर सेवा को पेंशन योग्य सेवा की गणना में शामिल करने के निर्देश दिए।

चंडीगढ़। हरियाणा के सरकारी स्कूलों में अंशकालिक कर्मचारी (Haryana Old Pension Scheme)के रूप में लंबे समय तक काम करने के बाद नियमित हुए कर्मचारियों के लिए राहत की खबर है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने निर्देश दिया है कि पात्र कर्मचारियों की नियमित नियुक्ति से पहले की निरंतर सेवा को भी पेंशन योग्य सेवा की गणना में शामिल करने पर विचार किया जाए। अदालत ने संबंधित विभाग को नियुक्ति और नियमितीकरण की तारीखों का सत्यापन कर पेंशन व सेवानिवृत्ति लाभों का दोबारा निर्धारण करने का आदेश दिया है।

भिवानी निवासी सुनीता और अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि अंशकालिक, दैनिक वेतन, तदर्थ या अस्थायी आधार पर की गई निरंतर सेवा को केवल नियमितीकरण से पहले की होने के कारण पेंशन गणना से बाहर नहीं रखा जा सकता। अदालत ने आदेश की प्रमाणित प्रति मिलने के तीन महीने के भीतर सत्यापन के बाद देय लाभ जारी करने के निर्देश दिए हैं।

1980 से 2002 के बीच हुई थी नियुक्ति

याचिकाकर्ताओं के अनुसार, उनकी नियुक्तियां हरियाणा के विभिन्न सरकारी स्कूलों में चतुर्थ श्रेणी के अंशकालिक कर्मचारियों के रूप में वर्ष 1980 से 2002 के बीच हुई थीं। लंबे समय तक सेवा देने के बाद उन्हें 11 नवंबर 2003 की नियमितीकरण नीति के तहत नियमित किया गया।

कर्मचारियों ने अदालत में दलील दी कि उनकी सरकारी सेवा नई पेंशन योजना लागू होने से पहले शुरू हो गई थी। इसलिए नियमित होने से पहले की निरंतर सेवा को भी पेंशन के लिए अर्हकारी सेवा में शामिल किया जाना चाहिए।

नई पेंशन योजना लागू होने का दिया हवाला

याचिका में नई पेंशन योजना की अधिसूचना और लागू होने की तारीखों का भी उल्लेख किया गया। उपलब्ध विवरण के अनुसार, योजना 28 अक्टूबर 2005 को अधिसूचित हुई और 1 जनवरी 2006 से लागू की गई।

कर्मचारियों का तर्क था कि उनकी सेवा इससे कई वर्ष पहले शुरू हुई थी। ऐसे में केवल बाद में नियमित किए जाने के आधार पर उनकी शुरुआती सेवा को पेंशन लाभ की गणना से बाहर रखना उचित नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी उल्लेख

सुनवाई के दौरान हरियाणा सरकार ने माना कि याचिकाकर्ताओं को पहले अंशकालिक आधार पर नियुक्त किया गया था और बाद में नियमित किया गया। हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड बनाम सतनाम सिंह मामले में दिए गए फैसले का उल्लेख करते हुए निरंतर सेवा और पेंशन लाभ से जुड़े पहलुओं पर विचार किया।

अदालत ने संबंधित विभाग को याचिकाकर्ताओं की शुरुआती नियुक्ति और नियमितीकरण की तारीखों का सत्यापन करने तथा नियमानुसार पेंशन और सेवानिवृत्ति लाभों की दोबारा गणना करने का निर्देश दिया।

तीन महीने में जारी करने होंगे देय लाभ

हाईकोर्ट के आदेश के मुताबिक, सत्यापन के बाद जो पेंशन और सेवानिवृत्ति लाभ देय पाए जाएंगे, उन्हें आदेश की प्रमाणित प्रति प्राप्त होने के तीन महीने के भीतर जारी करना होगा। नई पेंशन योजना के तहत पहले से जमा या भुगतान की गई राशि का समायोजन लागू कानून के अनुसार किया जाएगा।

यह फैसला याचिकाकर्ताओं के मामले में राहत प्रदान करता है। अन्य कर्मचारियों पर इसका स्वतः लागू होना उनकी नियुक्ति, सेवा की निरंतरता, नियमितीकरण और लागू पेंशन नियमों पर निर्भर करेगा।

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