हरियाणा में वरिष्ठता के बावजूद महिला शिक्षक को देर से मिला प्रमोशन, पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब
सुचेता दून ने कनिष्ठ शिक्षकों को 17 मार्च 2022 से पीजीटी पद पर पदोन्नति देने और खुद को 7 अगस्त 2026 से लाभ देने के फैसले को चुनौती दी। हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को 5 नवंबर तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।
चंडीगढ़: हरियाणा में वरिष्ठता के बावजूद समय पर पदोन्नति का लाभ नहीं मिलने का मामला पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट पहुंच गया है। महिला शिक्षक सुचेता दून ने आरोप लगाया है कि उनसे कनिष्ठ टीजीटी विज्ञान शिक्षकों को पहले ही पोस्ट ग्रेजुएट टीचर (पीजीटी) पद पर पदोन्नत कर दिया गया, जबकि उन्हें समान तारीख से पदोन्नति का लाभ नहीं मिला। मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार से जवाब मांगा है।
कनिष्ठ शिक्षकों को पहले मिल गई थी पदोन्नति
याचिका के अनुसार, 17 मार्च 2022 को सुचेता दून से कनिष्ठ कई टीजीटी विज्ञान शिक्षकों को पीजीटी पद पर पदोन्नत किया गया था। सुचेता का कहना है कि वरिष्ठता का लाभ मिलने के बावजूद उन्हें उस तारीख से पदोन्नति नहीं दी गई।
सुचेता ने 14 सितंबर 2021 को जारी वरिष्ठता सूची पर भी आपत्ति जताई थी। उनका आरोप था कि सूची में उन्हें कम मेरिट वाले कुछ शिक्षकों से नीचे रखा गया। इस संबंध में उन्होंने शिक्षा विभाग के समक्ष अभ्यावेदन भी दिया, लेकिन उनकी मांग पर समय रहते फैसला नहीं हुआ।
2015 की भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा है मामला
सुचेता दून ने 28 जून 2015 को जारी विज्ञापन संख्या 3/2015 के तहत उत्कृष्ट खिलाड़ी सामान्य श्रेणी में चयन प्रक्रिया में हिस्सा लिया था। विशेष पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित पदों को लेकर विवाद के बाद संबंधित पद सामान्य श्रेणी में परिवर्तित कर दिए गए थे।
भर्ती प्रक्रिया के तहत 13 अक्टूबर 2018 को अंतरिम परिणाम और 14 जनवरी 2020 को अंतिम परिणाम घोषित किया गया। सुचेता सफल घोषित हुईं और उन्हें 28 मई 2020 को नियुक्ति पत्र जारी किया गया।
हाईकोर्ट के निर्देश के बाद तय हुई वरिष्ठता
याचिका के मुताबिक, सुचेता ने पहले भी हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। 22 सितंबर 2022 को अदालत ने उनकी याचिका का निपटारा करते हुए सरकार को उनके अभ्यावेदन पर निर्धारित समय में निर्णय लेने का निर्देश दिया था।
इसके बाद 20 फरवरी 2023 को विभाग ने अंतर-वरिष्ठता निर्धारित की और सुचेता को उन कुछ शिक्षकों से ऊपर रखा, जिन्हें पहले ही पदोन्नति मिल चुकी थी। इसके बावजूद उन्हें 17 मार्च 2022 से पदोन्नति देने के मुद्दे पर फैसला नहीं हुआ।
हाईकोर्ट ने 7 अगस्त 2025 को भी संबंधित अधिकारियों को मामले में निर्णय लेने का निर्देश दिया था।
2026 में मिला प्रमोशन, लेकिन पुराने लाभ की मांग
सुचेता दून के अनुसार, सरकार ने 7 अगस्त 2026 को उन्हें पीजीटी पद पर पदोन्नत किया, लेकिन पदोन्नति का प्रभाव 17 मार्च 2022 से देने के बजाय 7 अगस्त 2026 से माना गया।
याचिकाकर्ता इसी निर्णय को चुनौती दे रही हैं। उनकी मांग है कि उन्हें भी उन कनिष्ठ शिक्षकों की तरह 17 मार्च 2022 से पदोन्नति का लाभ दिया जाए, जिन्हें उस तारीख से पीजीटी पद पर पदोन्नत किया गया था।
5 नवंबर तक जवाब दाखिल करने का निर्देश
सुनवाई के दौरान हरियाणा सरकार की ओर से जवाब दाखिल करने और आवश्यक निर्देश प्राप्त करने के लिए समय मांगा गया। हाईकोर्ट ने सरकार को अगली सुनवाई से कम से कम एक सप्ताह पहले अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने सरकार से 5 नवंबर तक जवाब देने को कहा है।
अब मामले में सरकार के जवाब और अदालत की आगे की सुनवाई पर नजर रहेगी। फिलहाल, पदोन्नति के लाभ की प्रभावी तारीख को लेकर याचिकाकर्ता की मांग पर अंतिम निर्णय होना बाकी है।




