Haryana News: हाईवे के साइन बोर्ड पर कैथल बना ‘कैथ’ और करनाल ‘कर’, NHAI की व्यवस्था पर उठे सवाल
चंडीगढ़-हिसार राष्ट्रीय राजमार्ग पर लगे दिशा-सूचक बोर्डों पर शहरों के नाम अधूरे दिखाई देने की शिकायत सामने आई है।
कैथल/कलायत। हरियाणा के चंडीगढ़-हिसार राष्ट्रीय राजमार्ग पर लगे कुछ साइन बोर्डों (कैथल बना ‘कैथ’ )पर शहरों के नाम अधूरे दिखाई देने का मामला सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक, दिशा-सूचक बोर्डों पर कैथल का नाम ‘कैथ’ और करनाल का नाम ‘कर’ नजर आ रहा है। ऐसे में राष्ट्रीय राजमार्ग से गुजरने वाले वाहन चालकों के लिए शहरों की सही पहचान करना मुश्किल हो सकता है।
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की ओर से लगाए गए ये बोर्ड यात्रियों को रास्ते और गंतव्य की जानकारी देने के लिए महत्वपूर्ण हैं। लेकिन यदि इन पर शहरों के नाम स्पष्ट रूप से दिखाई न दें, तो यातायात व्यवस्था और बोर्डों के रखरखाव को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
हाईवे पर अधूरे नाम, यात्रियों को हो सकती है परेशानी
राष्ट्रीय राजमार्ग पर सफर करने वाले वाहन चालकों के लिए दिशा-सूचक बोर्ड अहम भूमिका निभाते हैं। खासकर दूसरे शहरों या राज्यों से आने वाले यात्रियों को सही रास्ता चुनने और अपने गंतव्य तक पहुंचने में इनसे मदद मिलती है।
ऐसे में बोर्डों पर नाम अधूरे दिखाई देना भ्रम की स्थिति पैदा कर सकता है। चंडीगढ़-हिसार फोरलेन मार्ग पर सामने आई इस समस्या ने संबंधित अधिकारियों की निगरानी और रखरखाव व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं।
हालांकि, उपलब्ध रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि नामों के अधूरे दिखाई देने की वजह क्या है। यह भी जानकारी नहीं दी गई है कि संबंधित अधिकारियों ने इस समस्या को ठीक करने के लिए कोई कदम उठाया है या नहीं।
ऐतिहासिक पहचान वाला शहर है करनाल
हरियाणा का करनाल ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व के लिए जाना जाता है। इसे दानवीर कर्ण की नगरी के रूप में भी पहचान मिलती है। महाभारत की परंपराओं और स्थानीय मान्यताओं में कर्ण को दानशीलता, त्याग और वीरता का प्रतीक माना जाता है।
ऐसे में राष्ट्रीय राजमार्ग पर करनाल का नाम स्पष्ट रूप से प्रदर्शित होना यात्रियों को सही दिशा देने के साथ-साथ शहर की पहचान बनाए रखने के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है।
धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व रखता है कैथल
कैथल भी हरियाणा का एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक और धार्मिक शहर है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसे भगवान हनुमान की जन्मस्थली से जोड़कर देखा जाता है। शहर में स्थित प्राचीन अंजनी टीले को भी इस मान्यता से जोड़ा जाता है।
इसलिए हाईवे के दिशा-सूचक बोर्डों पर कैथल का पूरा नाम स्पष्ट दिखाई देना जरूरी है, ताकि बाहर से आने वाले यात्रियों को गंतव्य पहचानने में परेशानी न हो।
NHAI की निगरानी पर उठे सवाल
साइन बोर्डों पर शहरों के नाम अधूरे दिखाई देने की शिकायत के बाद यह सवाल उठ रहा है कि नियमित निरीक्षण के दौरान ऐसी खामियों पर ध्यान क्यों नहीं दिया गया। हालांकि, संबंधित विभाग की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया, सुधार की समयसीमा या कार्रवाई की पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है।
अब देखना होगा कि संबंधित अधिकारी इन बोर्डों की स्थिति की जांच कर उन्हें दुरुस्त करवाते हैं या नहीं।




