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हरियाणा सरकार के विकास के दावों पर हुड्डा का हमला, बोले- बेरोजगारी और निवेश के आंकड़े खोल रहे हकीकत

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने भाजपा सरकार के दो साल के रिपोर्ट कार्ड पर उठाए सवाल; बेरोजगारी, निवेश, किसानों की एमएसपी और बिजली वितरण व्यवस्था को लेकर सरकार को घेरा।

चंडीगढ़/नई दिल्ली: हरियाणा में भाजपा सरकार के विकास संबंधी दावों को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने राज्य सरकार के दो साल के कामकाज पर सवाल उठाते हुए उसके रिपोर्ट कार्ड को भ्रामक बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार रोजगार, औद्योगिक निवेश और किसानों की आय से जुड़े मुद्दों पर अपनी उपलब्धियां गिना रही है, जबकि जमीनी स्थिति इन दावों से अलग है।

नई दिल्ली में हरियाणा कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष जितेंद्र भारद्वाज के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए हुड्डा ने बेरोजगारी, निवेश और आर्थिक विकास के आंकड़ों का हवाला देकर सरकार की नीतियों की आलोचना की।

बेरोजगारी और आर्थिक विकास पर उठाए सवाल

भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने दावा किया कि हरियाणा में बेरोजगारी दर 37 प्रतिशत है और विकास दर के मामले में राज्य 18 बड़े राज्यों में 14वें स्थान पर है। उन्होंने कहा कि सरकार हरियाणा को देश का ग्रोथ इंजन बनाने की बात करती है, लेकिन रोजगार और आर्थिक विकास के मोर्चे पर अपेक्षित परिणाम दिखाई नहीं दे रहे हैं।

हुड्डा ने इन आंकड़ों के आधार पर राज्य सरकार की विकास नीतियों पर सवाल उठाए। हालांकि, बेरोजगारी दर और राज्यों की विकास रैंकिंग की पुष्टि के लिए संबंधित रिपोर्ट और आंकड़ों के स्रोत देखना जरूरी है।

निवेश के दावों पर भी कांग्रेस ने घेरा

पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि वर्ष 2014 से अब तक हरियाणा में लगभग 20 हजार करोड़ रुपये का निवेश हुआ है, जबकि सरकार इससे कहीं अधिक निवेश होने के दावे कर रही है।

उन्होंने गुरुग्राम में नई औद्योगिक नीति की शुरुआत के दौरान किए गए निवेश संबंधी दावों पर भी सवाल उठाए। हुड्डा के मुताबिक, घोषित निवेश और वास्तव में जमीन पर उतरी परियोजनाओं के बीच अंतर है। उन्होंने राज्य में 10 नए औद्योगिक मॉडल टाउनशिप (आईएमटी) विकसित करने के दावों की भी आलोचना की।

इसके साथ ही उन्होंने हरियाणा पर पांच लाख करोड़ रुपये से अधिक के कर्ज का मुद्दा उठाते हुए राज्य की आर्थिक स्थिति पर चिंता जताई।

किसानों की एमएसपी खरीद पर सरकार को घेरा

भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने किसानों से जुड़े मुद्दों पर भी भाजपा सरकार को निशाने पर लिया। उन्होंने 24 फसलों की न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीद के दावे पर सवाल उठाते हुए कहा कि मूंग, बाजरा और धान जैसी फसलों की खरीद तथा किसानों को मिलने वाले वास्तविक मूल्य की स्थिति की समीक्षा की जानी चाहिए।

उन्होंने भावांतर भरपाई योजना को लेकर भी सरकार की आलोचना की। हुड्डा का आरोप है कि खरीद और मुआवजे से जुड़ी व्यवस्थाओं के कारण किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिलने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

बिजली वितरण में निजीकरण का मुद्दा उठाया

कांग्रेस नेता ने हरियाणा की बिजली व्यवस्था में निजी कंपनियों की भूमिका बढ़ाने को लेकर भी आपत्ति जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि गुरुग्राम और नूंह में बिजली वितरण का काम निजी कंपनी को सौंपने की प्रक्रिया उपभोक्ताओं और किसानों के हितों को प्रभावित कर सकती है।

हुड्डा ने आशंका जताई कि इस व्यवस्था से किसानों को मिलने वाली बिजली सब्सिडी पर असर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को विधानसभा में भी उठाया गया था।

हालांकि, बिजली वितरण व्यवस्था में प्रस्तावित बदलावों और सब्सिडी पर उनके संभावित प्रभाव की पुष्टि के लिए सरकार के आदेशों तथा संबंधित बिजली वितरण कंपनियों की जानकारी देखना आवश्यक है।

सरकार के रिपोर्ट कार्ड पर बढ़ा राजनीतिक टकराव

भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने भाजपा सरकार के दो साल के कामकाज पर सवाल उठाते हुए कहा कि विकास का आकलन केवल घोषणाओं से नहीं, बल्कि रोजगार, निवेश, किसानों की स्थिति और आम लोगों को मिलने वाली सुविधाओं से होना चाहिए।

उनके बयान से स्पष्ट है कि हरियाणा में रोजगार, औद्योगिक विकास, कृषि और बिजली व्यवस्था आगामी राजनीतिक बहस के प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं। दूसरी ओर, इन आरोपों का निष्पक्ष आकलन करने के लिए सरकार के आधिकारिक आंकड़ों और संबंधित योजनाओं की वास्तविक प्रगति की तुलना करना जरूरी है।

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