एशियन पैरा गेम्स 2026 में भारत का दमदार प्रदर्शन, पदक तालिका में बढ़ी मजबूती
भारतीय खिलाड़ियों ने एथलेटिक्स, तैराकी, तीरंदाजी और अन्य स्पर्धाओं में पदक हासिल किए। सचिन खिलारी और प्रवीण कुमार के प्रदर्शन ने विशेष ध्यान आकर्षित किया।
नई दिल्ली -: ( 21 अक्टूबर ) – : एशियन पैरा गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों का प्रदर्शन लगातार चर्चा में है। 21 अक्टूबर की रिपोर्टों के अनुसार, भारत ने प्रतियोगिता के शुरुआती दिनों में कुल पदकों की संख्या में मजबूत बढ़त बनाई। 20 अक्टूबर तक भारतीय दल ने 35 पदक हासिल किए थे, जिनमें नौ स्वर्ण, 11 रजत और 15 कांस्य पदक शामिल थे। इसके बाद 21 अक्टूबर को भी भारतीय खिलाड़ियों ने विभिन्न स्पर्धाओं में पदक जीतकर अपना अभियान आगे बढ़ाया। एशियन पैरा गेम्स में शारीरिक दिव्यांगता वाले खिलाड़ी विभिन्न वर्गों में प्रतिस्पर्धा करते हैं। प्रतियोगिता का उद्देश्य खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी क्षमता दिखाने का अवसर देना है। भारतीय दल के प्रदर्शन से देश में पैरा खेलों की बढ़ती प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता और खिलाड़ियों की मेहनत सामने आती है।
भारतीय खिलाड़ियों ने दिखाया शानदार खेल , सचिन खिलारी ने शॉटपुट में जीता स्वर्ण
पुरुषों की F46 शॉटपुट स्पर्धा में सचिन खिलारी ने 15.87 मीटर के प्रयास के साथ स्वर्ण पदक जीता। रिपोर्ट के अनुसार, इस प्रदर्शन ने खेल रिकॉर्ड भी स्थापित किया। इसी स्पर्धा में मोहम्मद यासर ने 15.06 मीटर के प्रयास के साथ रजत और प्रवीण ने 14.94 मीटर के साथ कांस्य पदक हासिल किया। इस तरह भारत ने इस स्पर्धा में तीनों पदक अपने नाम किए। एक ही स्पर्धा में स्वर्ण, रजत और कांस्य जीतना किसी भी दल के लिए उल्लेखनीय उपलब्धि है। इससे यह भी पता चलता है कि भारत के पास संबंधित खेल वर्ग में कई प्रतिस्पर्धी खिलाड़ी मौजूद हैं। हालांकि, ऐसे प्रदर्शन को आगे बनाए रखने के लिए नियमित प्रशिक्षण, खेल विज्ञान, पोषण और बेहतर सुविधाओं की आवश्यकता होती है।
प्रवीण कुमार का हाई जंप में प्रदर्शन
पुरुषों की T64 हाई जंप स्पर्धा में प्रवीण कुमार ने स्वर्ण पदक जीता, जबकि बंटी ने रजत पदक हासिल किया। इस परिणाम ने भारतीय दल के पदकों में महत्वपूर्ण योगदान दिया। पैरा एथलेटिक्स में खिलाड़ियों को उनकी कार्यात्मक क्षमताओं के अनुसार विभिन्न वर्गों में प्रतिस्पर्धा करने का अवसर मिलता है। इससे मुकाबले को अधिक निष्पक्ष बनाने में मदद मिलती है। भारत की तीरंदाजी टीम ने भी महिला कंपाउंड डबल्स में पदक हासिल किया। शीतल देवी और पायल नाग की जोड़ी ने रजत पदक जीता। इन उपलब्धियों से पता चलता है कि भारतीय खिलाड़ी केवल एक खेल तक सीमित नहीं हैं, बल्कि विभिन्न स्पर्धाओं में देश का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
पैरा खेलों के विकास के लिए क्या जरूरी?
अंतरराष्ट्रीय पदक खिलाड़ियों की मेहनत का परिणाम होते हैं, लेकिन इसके पीछे कोचिंग, प्रशिक्षण केंद्रों, खेल उपकरणों, चिकित्सा सहायता और वित्तीय सहयोग की भी भूमिका होती है। छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिभाओं की पहचान करने के लिए खेल संस्थानों तथा स्कूलों की भागीदारी महत्वपूर्ण है। खिलाड़ियों को प्रतियोगिता के बाद भी लगातार प्रशिक्षण और पुनर्वास सुविधाएं उपलब्ध होनी चाहिए। मीडिया में उनकी उपलब्धियों को जगह मिलने से नए खिलाड़ियों को प्रेरणा मिल सकती है और पैरा खेलों के प्रति समाज की समझ बेहतर हो सकती है।
प्रमुख बिंदु
- 20 अक्टूबर तक भारत के खाते में 35 पदक दर्ज थे।
- सचिन खिलारी ने F46 शॉटपुट में स्वर्ण जीता।
- प्रवीण कुमार ने T64 हाई जंप में स्वर्ण हासिल किया।
- शीतल देवी और पायल नाग ने महिला कंपाउंड डबल्स में रजत पदक जीता।
एशियन पैरा गेम्स में भारत का प्रदर्शन खिलाड़ियों की मेहनत और खेल क्षमता को दर्शाता है। अब प्रतियोगिता के शेष मुकाबलों और अंतिम पदक तालिका पर नजर रहेगी।
