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Haryana Bus Accidents: 9 महीने में 12 बड़े हादसे, 14 की मौत; निजी बसों की सुरक्षा पर उठे सवाल

हरियाणा में फरवरी से अक्टूबर 2026 के बीच निजी बसों से जुड़े 12 गंभीर हादसों में 14 लोगों की जान गई और 50 से अधिक घायल हुए। कहीं बस में आग लगी तो कहीं वाहन पलटने और टक्कर की घटनाएं सामने आईं।

भिवानी। हरियाणा में निजी बसों (Haryana Bus Accidents)से जुड़े लगातार हादसे यात्रियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं। प्रदेश में पिछले नौ महीनों के दौरान सामने आए 12 बड़े हादसों में कम से कम 14 लोगों की मौत हुई, जबकि 50 से अधिक लोग घायल हुए। इन घटनाओं में बसों में आग लगने, वाहन पलटने और दूसरे वाहनों से टक्कर जैसी दुर्घटनाएं शामिल हैं।

21 फरवरी से 16 अक्टूबर 2026 के बीच प्रदेश के विभिन्न जिलों में हुए इन हादसों ने परिवहन व्यवस्था और सड़क सुरक्षा नियमों के प्रभावी पालन की जरूरत को रेखांकित किया है। सोनीपत, भिवानी, फतेहाबाद, हिसार और रेवाड़ी समेत कई क्षेत्रों में दुर्घटनाएं सामने आईं। प्रदेश में 1,600 से अधिक निजी बसों के संचालन के बीच यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।

हरियाणा में निजी बस हादसों का आंकड़ा चिंताजनक

पिछले नौ महीनों में दर्ज किए गए 12 गंभीर हादसों में जान-माल का नुकसान हुआ है। दुर्घटनाओं के अलग-अलग कारण सामने आए, जिनमें ट्रक और डंपर से टक्कर, बाइक सवारों से जुड़े हादसे, बसों का अनियंत्रित होकर पलटना और आग लगने की घटनाएं शामिल हैं।

भिवानी के मिलकपुर में एक बस में आग लगने से दो यात्रियों की मौत हो गई थी, जबकि 11 लोग झुलस गए थे। वहीं, फतेहाबाद में बस पलटने की घटना में तीन लोगों की मौत हुई। भिवानी में भी बस पलटने से तीन लोगों की जान चली गई।

इन घटनाओं ने एक बार फिर सवाल खड़ा किया है कि यात्रियों को सुरक्षित सफर उपलब्ध कराने के लिए बस संचालकों और संबंधित विभागों की निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी है।

बसों की फिटनेस और तकनीकी जांच पर विशेष ध्यान देने की जरूरत

लगातार हो रही दुर्घटनाओं के बीच निजी बसों की तकनीकी स्थिति, नियमित फिटनेस जांच और सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता महत्वपूर्ण मुद्दे बन गए हैं। बसों में आग लगने या सड़क पर नियंत्रण खोने जैसी घटनाओं में वाहन की स्थिति, चालक की भूमिका और सड़क की परिस्थितियों की जांच आवश्यक है।

विशेषज्ञों के अनुसार, सड़क सुरक्षा को मजबूत करने के लिए नियमित वाहन निरीक्षण, ब्रेक और अन्य जरूरी उपकरणों की जांच, अग्निशमन उपकरणों की उपलब्धता तथा चालकों के प्रशिक्षण पर ध्यान देना जरूरी है। निर्धारित गति सीमा और यातायात नियमों का पालन भी दुर्घटनाओं का जोखिम कम करने में अहम भूमिका निभाता है।

आरटीए टीम को जांच के निर्देश

भिवानी के एसडीएम एवं क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी महेश कुमार के अनुसार, निजी बसों से जुड़े हादसों को गंभीरता से लेते हुए आरटीए टीम को जांच के निर्देश दिए गए हैं। उनके मुताबिक, वाहनों की समय-समय पर जांच की जा रही है और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

परिवहन विभाग की निगरानी और नियमों के पालन से जुड़े इन कदमों का उद्देश्य यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और सड़क हादसों पर अंकुश लगाना है।

यात्रियों की सुरक्षा सबसे बड़ा सवाल

हरियाणा में निजी बसों से जुड़े हादसों का सिलसिला परिवहन व्यवस्था के सामने एक बड़ी चुनौती पेश करता है। नौ महीने में 12 गंभीर दुर्घटनाओं और 14 मौतों का आंकड़ा नियमित निरीक्षण, जवाबदेही और सुरक्षा मानकों के प्रभावी क्रियान्वयन की आवश्यकता को सामने लाता है।

अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि वाहन फिटनेस जांच, सड़क सुरक्षा नियमों के पालन और लापरवाही के मामलों में कार्रवाई से दुर्घटनाओं को रोकने में कितनी मदद मिलती है। यात्रियों के लिए सुरक्षित सफर सुनिश्चित करने के लिए संबंधित विभागों, बस संचालकों और चालकों की जिम्मेदारी अहम है

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