नेशनल स्पोर्ट्स फेडरेशन कॉन्क्लेव २०२६ में खेलों के भविष्य पर मंथन
बहादुरगढ़ में जुटे देशभर के खेल अधिकारी, ग्रामीण प्रतिभाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने पर बनी रणनीति
Haryana:नेशनल स्पोर्ट्स फेडरेशन कॉन्क्लेव 2026 के दौरान मनसुख मांडविया, अनिल खत्री और देशभर के खेल अधिकारियों ने भारतीय खेल व्यवस्था को मजबूत बनाने और खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तैयार करने की रणनीति पर विस्तृत चर्चा की। कार्यक्रम में आगामी कॉमनवेल्थ गेम्स, एशियन गेम्स और लॉस एंजिल्स ओलंपिक 2028 को ध्यान में रखते हुए दीर्घकालिक कार्ययोजना पर विशेष मंथन किया गया।
अनिल खत्री ने कॉन्क्लेव में विशिष्ट अतिथि के रूप में हिस्सा लेते हुए कहा कि भारत में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में आधुनिक सुविधाओं और वैज्ञानिक प्रशिक्षण के अभाव में कई खिलाड़ी आगे नहीं बढ़ पाते। उन्होंने सुझाव दिया कि गांव स्तर पर प्रतिभाओं की पहचान कर उन्हें आधुनिक प्रशिक्षण, पोषण और प्रतियोगी माहौल उपलब्ध कराया जाए, ताकि भारतीय खिलाड़ी वैश्विक मंच पर बेहतर प्रदर्शन कर सकें।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘खेलो इंडिया’, ‘फिट इंडिया’ और ‘खेलो भारत’ अभियानों की सराहना करते हुए कहा कि इन योजनाओं ने देश में खेल संस्कृति को नई दिशा दी है। साथ ही उन्होंने हरियाणा सरकार द्वारा संचालित खेल नर्सरियों को युवाओं के लिए बेहद लाभकारी बताया।
कॉन्क्लेव में रक्षा निखिल खडसे, पी. टी. उषा, भारतीय खेल प्राधिकरण और नाडा के वरिष्ठ अधिकारियों सहित ३७ राष्ट्रीय खेल संघों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस दौरान खेल नीतियों, प्रशिक्षण ढांचे, एंटी डोपिंग जागरूकता और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत के प्रदर्शन को मजबूत करने पर व्यापक चर्चा हुई।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के राष्ट्रीय स्तर के कॉन्क्लेव भविष्य में भारत को खेल महाशक्ति बनाने की दिशा में अहम भूमिका निभाएंगे। बहादुरगढ़ में आयोजित यह आयोजन भारतीय खेल तंत्र के लिए एक महत्वपूर्ण मंच बनकर उभरा, जहां खिलाड़ियों के उज्ज्वल भविष्य और वैश्विक प्रतिस्पर्धा की तैयारी पर ठोस रणनीति तैयार की गई।
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