लखनऊ

गौशालाओं की व्यवस्थाओं का गहन निरीक्षण कर 10 सितंबर तक भेजें रिपोर्ट

लखनऊ : – (31 अगस्त, 2026 ) -: पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री श्री धर्मपाल सिंह ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि प्रदेश में गोवंश संरक्षण के साथ-साथ नस्ल सुधार, कृत्रिम गर्भाधान, बधियाकरण तथा संचारी रोगों की रोकथाम के कार्यों में तेजी लायें और इन सभी कार्यों की नियमित निगरानी भी  सुनिश्चित करें जिससे पशुपालकों को स्वस्थ पशुधन मिल सके, दुग्ध उत्पादन में वृद्धि हो और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को और अधिक मजबूती मिल सके। उन्होंने निर्देशित किया कि 10 सितंबर तक गौशालाओं में सभी संबंधित व्यवस्थाओं की स्थिति की रिपोर्ट तैयार कर मुख्यालय को भेजी जाए।गौशालाओं में गोवंश के लिए चारा, पानी, साफ-सफाई, छाया, उपचार, सुरक्षा तथा अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं की उपलब्धता का मौके पर जाकर निरीक्षण भी किया जाए।

श्री धर्मपाल सिंह सोमवार को विधान भवन स्थित अपने कार्यालय कक्ष में पशुधन एवं दुग्ध विकास विभाग की समीक्षा की और आवश्यक दिशा निर्देश दिए। उन्होंने गौशालाओं के प्रबंधन और चारे भूसे के संबंध में प्राप्त शिकायतों का संज्ञान लेते हुए निर्देश दिए कि प्रदेश के प्रत्येक मंडल में अपर निदेशक स्तर के अधिकारी द्वारा गौशालाओं की व्यवस्थाओं का गहन निरीक्षण सुनिश्चित किया जाए।  पशुधन मंत्री ने कड़े निर्देश देते हुए कहा कि निरीक्षण केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित न रहे। अधिकारी मौके पर जाकर गौशालाओं की व्यवस्थाओं को स्वयं देखें और वहां की व्यवस्थाओं में जैसे हरा चारा, भूसा, स्वच्छ पेयजल, प्रकाश, गौवंश के बैठने का स्थान, चरही आदि की फोटो भी लें तथा इसकी विस्तृत रिपोर्ट मुख्यालय को उपलब्ध कराएं। जहां कही पर भी कमी मिले, उसे तत्काल दूर कराया जाए और इसकी नियमित निगरानी की जाए।

उन्होंने कहा कि गोवंश संरक्षण सरकार की प्राथमिकता है। इसलिए गौशालाओं की व्यवस्थाओं में किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि गौशालाओं में संरक्षित गोवंश को पर्याप्त चारा-पानी, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं और सुरक्षित वातावरण मिले। साथ ही नस्ल सुधार एवं कृत्रिम गर्भाधान के कार्यों को गांव-गांव तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने के लिए व्यापक प्रचार प्रसार किया जाए। दुग्ध विकास विभाग की समीक्षा करते हुए श्री धर्मपाल सिंह ने दुग्ध उत्पादन बढ़ाने और पशुपालकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि दुग्ध समितियों को और अधिक सक्रिय किया जाए तथा दुग्ध उत्पादकों को समय पर राज्य सरकार द्वारा दिए जा रहे तकनीकी सहयोग और आवश्यक सुविधाएं मिलें। दुग्ध संग्रहण एवं विपणन की व्यवस्थाओं को मजबूत करने के साथ ही विभागीय योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक किसानों और पशुपालकों तक पहुंचाना सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश को वन ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी की दिशा में आगे बढ़ाने में दुग्ध क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने निर्देश दिए कि दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएं।

बैठक में राज्यमंत्री श्रीमती कृष्णा पासवान ने कहा कि गौशालाओं की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए अधिकारी नियमित रूप से स्थलीय निरीक्षण करें और छोटी से छोटी कमी को भी गंभीरता से लेते हुए उसका तत्काल समाधान सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि गौशालाओं में साफ-सफाई, चारा-पानी और गोवंश के स्वास्थ्य की स्थिति पर विशेष नजर रखी जाए। उन्होंने कहा कि दुग्ध उत्पादन कार्यों से ग्रामीण क्षेत्रों की अधिक से अधिक महिलाओं को जोड़ा जाए। बैठक में  विशेष सचिव श्री राम सहाय यादव, प्रबंध निदेशक पीसीडीएफ श्री प्रकाश बिंदु, पशुपालन विभाग के निदेशक (प्रशासन एवं विकास) डॉ राजेंद्र प्रसाद, निदेशक(रोग नियंत्रण एवं प्रक्षेत्र)डॉ. संगीता तिवारी, पशुधन विकास परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. पी.के. सिंह सहित अन्य संबंधित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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