पंजाब

MOH से Enforcement Wing (सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट)तक भ्रष्टाचार के आरोप, 5 लाख की रिश्वत मामले ने खोली निगरानी व्यवस्था की पोल

चंडीगढ़ नगर निगम के विभिन्न विभागों में रिश्वतखोरी और कथित अवैध वसूली के कई मामले सामने आए। 2019 में कर्मचारी को चार साल की सजा

चंडीगढ़: चंडीगढ़ नगर निगम के मेडिकल ऑफिसर ऑफ हेल्थ (MOH), सेनिटरी, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट और एंफोर्समेंट विंग से जुड़े भ्रष्टाचार के मामलों ने निगम की निगरानी व्यवस्था को सवालों के घेरे में ला दिया है। पिछले कई वर्षों के दौरान इन विभागों के कर्मचारियों और अधिकारियों के खिलाफ रिश्वतखोरी, कथित अवैध वसूली और सरकारी कामकाज में अनियमितताओं से जुड़े मामले सामने आए हैं। कुछ मामलों में अदालत सजा सुना चुकी है, जबकि अन्य मामलों में जांच और न्यायिक प्रक्रिया जारी है।

हाल ही में सेनिटरी इंस्पेक्टर शक्ति शर्मा को पांच लाख रुपये की कथित रिश्वत लेते हुए केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद नगर निगम की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं।

सीबीआई के अनुसार, शक्ति शर्मा पर एक ठेकेदार की फर्म के लंबित और भविष्य के बिलों को मंजूरी दिलाने के बदले 14 लाख रुपये मांगने का आरोप है। जांच एजेंसी ने कथित रिश्वत की पहली किस्त के रूप में पांच लाख रुपये लेते समय उसे गिरफ्तार किया। इस कार्रवाई के बाद निगम के दूसरे अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि, अन्य अधिकारियों की संलिप्तता जांच से ही स्थापित होगी।

2019 में रिश्वत लेते पकड़ा गया सेनिटरी इंस्पेक्टर, अदालत ने सुनाई सजा

नगर निगम के MOH विंग में भ्रष्टाचार से जुड़ा मामला नया नहीं है। 17 अगस्त 2019 को सेनिटरी इंस्पेक्टर नरेश कुमार को 2,500 रुपये की रिश्वत लेते हुए विजिलेंस ने गिरफ्तार किया था।

इस मामले में शिकायतकर्ता नगर निगम का ही कर्मचारी था। आरोप था कि सेक्टर-29 में दोबारा तैनाती के लिए उससे रिश्वत मांगी गई थी। शिकायत के आधार पर कार्रवाई करते हुए विजिलेंस ने कर्मचारी को पकड़ लिया था।

मामले की सुनवाई के बाद मार्च 2025 में अदालत ने नरेश कुमार को चार साल की कठोर कैद और 20,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। यह मामला उन उदाहरणों में शामिल है, जिनमें निगम के कर्मचारी के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों पर न्यायिक प्रक्रिया के बाद सजा हुई।

2023 में चीफ सेनिटरी इंस्पेक्टर और हेल्थ सुपरवाइजर गिरफ्तार

8 अगस्त 2023 को सीबीआई ने नगर निगम के MOH विंग में तैनात चीफ सेनिटरी इंस्पेक्टर चंद्रमोहन और हेल्थ सुपरवाइजर संदीप धनखड़ को एक लाख रुपये की कथित रिश्वत के मामले में गिरफ्तार किया था।

आरोप था कि विभाग से हटाए गए एक सेनिटरी इंस्पेक्टर को दोबारा नौकरी पर लगवाने के बदले दो लाख रुपये मांगे गए थे। कथित तौर पर एक लाख रुपये पहली किस्त के रूप में दिए जा रहे थे।

सीबीआई ने जांच के बाद दोनों अधिकारियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया। सितंबर 2024 में विशेष अदालत ने मामले में दोनों के खिलाफ आरोप तय किए। चंद्रमोहन के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति से संबंधित एक अलग मामला भी सामने आया था।

यह मामला विभागीय स्तर पर नियुक्तियों और कर्मचारियों की बहाली से जुड़ी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता तथा जवाबदेही सुनिश्चित करने की आवश्यकता को रेखांकित करता है। हालांकि, आरोप तय होना दोष सिद्ध होने के समान नहीं है और मामले की अंतिम स्थिति के लिए अदालती रिकॉर्ड देखना जरूरी है।

एंफोर्समेंट विंग पर वेंडरों से कथित वसूली के आरोप

नगर निगम का एंफोर्समेंट विंग भी वर्ष 2025 में कथित अवैध वसूली के आरोपों को लेकर चर्चा में आया था। विभाग में बेलदार के पद पर तैनात विकास ने एक वीडियो जारी कर कुछ इंस्पेक्टरों पर वेंडरों से कथित तौर पर पैसे वसूलने के आरोप लगाए थे।

बाद में वीडियो वापस लेने के बाद भी उसने आरोप दोहराए। उसने यह दावा भी किया कि उस पर दबाव डालकर दूसरा वीडियो बनवाया गया था। इस घटनाक्रम के बाद नगर निगम ने संबंधित कर्मचारियों की ड्यूटी में बदलाव किया और मामले की विजिलेंस जांच कराने की सिफारिश की।

रिपोर्ट के मुताबिक, अगस्त 2026 में विजिलेंस ने एंफोर्समेंट विंग के कुछ कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की।

एफआईआर दर्ज होने के बाद मामले की जांच आगे बढ़ी, लेकिन संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ आरोपों की पुष्टि और उनकी व्यक्तिगत जिम्मेदारी जांच के निष्कर्षों तथा कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही तय की जा सकती है।

सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट और ठेकों की प्रक्रिया भी सवालों के घेरे में

नगर निगम में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट से जुड़े कार्यों और ठेके देने की प्रक्रिया को लेकर भी समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। आरोप लगाए जाते रहे हैं कि कुछ मामलों में एजेंसियों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया।

हालिया रिश्वत मामले में भी ठेकेदार के लंबित भुगतान और भविष्य के बिलों की प्रक्रिया महत्वपूर्ण है। सीबीआई के मुताबिक, शक्ति शर्मा ने कथित तौर पर बिलों की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के बदले 14 लाख रुपये मांगे थे और पांच लाख रुपये की पहली किस्त लेते हुए उसे गिरफ्तार किया गया।

जांच एजेंसी इस तरह के मामलों में संबंधित दस्तावेजों, भुगतान रिकॉर्ड, ठेका प्रक्रिया और गवाहों के बयानों की जांच करती है। यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि कथित रिश्वत की मांग किसी एक कर्मचारी तक सीमित थी या इसमें अन्य लोगों की भूमिका भी थी। फिलहाल किसी अन्य अधिकारी की संलिप्तता को प्रमाणित तथ्य के रूप में पेश नहीं किया जा सकता।

गिरफ्तारी के बाद निगम कार्यालय में अधिकारियों की गैरमौजूदगी पर चर्चा

सेनिटरी इंस्पेक्टर की गिरफ्तारी के बाद एक दिन नगर निगम भवन में कई वरिष्ठ अधिकारियों की गैरमौजूदगी भी चर्चा का विषय बनी। रिपोर्ट के अनुसार, निगम कमिश्नर अमित कुमार उस समय दिल्ली में थे, जबकि ज्वाइंट कमिश्नर सहित कुछ अन्य अधिकारी अपने कार्यालयों में नहीं मिले।

इस दौरान निगम परिसर में यह चर्चा होती रही कि क्या अधिकारियों की गैरमौजूदगी का संबंध सीबीआई की कार्रवाई से था। हालांकि, इस तरह की अटकलों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं दी गई थी। केवल कार्यालय में अनुपस्थित होने के आधार पर किसी अधिकारी के खिलाफ संदेह या आरोप को सही नहीं माना जा सकता।

इस मामले ने एक बार फिर यह सवाल उठाया है कि भ्रष्टाचार से जुड़ी शिकायतों पर नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारी किस तरह निगरानी रखते हैं और विभागीय स्तर पर जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

बार-बार सामने आ रहे मामलों से निगरानी व्यवस्था पर सवाल

चंडीगढ़ नगर निगम से जुड़े अलग-अलग वर्षों के मामलों में गिरफ्तारियों, अदालत में आरोप तय होने और सजा सुनाए जाने जैसी कार्रवाई सामने आई है। इन सभी मामलों की कानूनी स्थिति अलग-अलग है, लेकिन इनसे निगम के विभागों में पारदर्शिता और प्रभावी निगरानी की जरूरत स्पष्ट होती है।

भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए शिकायतों की समयबद्ध जांच, ठेकेदारों के भुगतान की पारदर्शी प्रक्रिया, वेंडरों की शिकायतों के लिए स्वतंत्र व्यवस्था और दोषी पाए जाने वाले कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई जरूरी है।

अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि मौजूदा सीबीआई और विजिलेंस जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है तथा नगर निगम अपनी आंतरिक निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने के लिए क्या कदम उठाता है।

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