अकाली दल ने राज्य चुनाव आयुक्त को हटाने की उठाई मांग, नगर निगम चुनावों में धांधली के आरोपों पर बढ़ा विवाद
डॉ. दलजीत सिंह चीमा ने राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया से की कार्रवाई की मांग। पराली प्रबंधन के लिए किसानों को मुआवजा देने और पंजाब में धान भंडारण संकट दूर करने का मुद्दा भी उठाया।
चंडीगढ़: पंजाब में नगर निगम चुनावों की निष्पक्षता को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। शिरोमणि अकाली दल ने दिसंबर 2024 में हुए नगर निगम चुनावों में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाते हुए राज्य चुनाव आयुक्त राज कमल चौधरी को पद से हटाने की मांग की है। पार्टी के वरिष्ठ नेता डॉ. दलजीत सिंह चीमा ने इस संबंध में राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया से हस्तक्षेप करने की अपील की है।
अकाली दल का आरोप है कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान विपक्षी उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करने से रोकने, धमकाने और नामांकन वापस लेने के लिए दबाव बनाने जैसी घटनाएं हुई थीं। पार्टी ने इन मामलों में जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की भी मांग की है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देकर सरकार पर निशाना
डॉ. दलजीत सिंह चीमा ने कहा कि नगर निगम चुनावों से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट के निष्कर्षों और न्यायालय द्वारा नियुक्त तथ्य-जांच आयोग की रिपोर्ट ने चुनाव प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उनके अनुसार, पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति निर्मलजीत कौर की अध्यक्षता में गठित आयोग ने विपक्षी उम्मीदवारों के साथ कथित दुर्व्यवहार, नामांकन में बाधा और जबरन नामांकन वापस करवाने जैसी शिकायतों की जांच की थी।
चीमा ने आरोप लगाया कि राज्य चुनाव आयुक्त इन घटनाओं को रोकने में प्रभावी भूमिका निभाने में विफल रहे। उन्होंने कहा कि चुनाव प्रक्रिया में कथित तौर पर सरकारी और पुलिस तंत्र के दुरुपयोग के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
अकाली दल ने राज्यपाल से मांग की है कि चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर उठे सवालों को देखते हुए राज्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।
पटियाला, बाघापुराना और धर्मकोट में चुनाव प्रक्रिया पर चर्चा
अकाली दल ने सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश का भी स्वागत किया, जिसका संबंध पटियाला के 28 वार्डों, बाघापुराना के सभी 15 वार्डों और धर्मकोट के सात वार्डों में चुनाव प्रक्रिया की निगरानी से है। पार्टी के अनुसार, इन क्षेत्रों में सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में समितियों के गठन का निर्देश चुनाव प्रक्रिया से जुड़े विवादों की गंभीरता को दर्शाता है।
चीमा ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुनाव निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से होने चाहिए। उन्होंने राज्य सरकार से चुनावों में कथित अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कार्रवाई करने की मांग की।
पराली जलाने पर किसानों के खिलाफ कार्रवाई का मुद्दा उठाया
नगर निगम चुनावों के अलावा डॉ. चीमा ने पंजाब में पराली प्रबंधन को लेकर भी मुख्यमंत्री भगवंत मान से जवाब मांगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने किसानों को पराली प्रबंधन के लिए प्रति एकड़ 1,500 रुपये देने की बात कही थी, लेकिन इसके बावजूद पराली जलाने के मामलों में किसानों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा रही हैं।
अकाली नेता ने सवाल उठाया कि किसानों को आर्थिक सहायता देने के संबंध में सरकार ने कोई आधिकारिक अधिसूचना जारी की है या नहीं। उन्होंने यह भी पूछा कि प्रस्तावित राशि किसानों को कब तक उपलब्ध कराई जाएगी।
चीमा ने दावा किया कि किसानों को पराली प्रबंधन के लिए पर्याप्त मशीनें और वित्तीय सहायता नहीं मिली हैं। उन्होंने सरकार से किसानों के लिए घोषित सहायता की स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।
पंजाब में धान भंडारण संकट पर भी चिंता
डॉ. चीमा ने धान की खरीद के मौसम में भंडारण व्यवस्था को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने राज्य सरकार से केंद्र के साथ समन्वय करके गोदामों में उपलब्ध जगह बढ़ाने और पहले से रखे धान व चावल को जल्द दूसरे राज्यों में भेजने की मांग की।
उनके अनुसार, पंजाब के गोदामों में करीब 17 लाख मीट्रिक टन धान और सात लाख मीट्रिक टन चावल रखा हुआ है, जिसे राज्य से बाहर भेजा जाना है। उन्होंने अनुमान जताया कि अगले एक महीने में मंडियों में लगभग 180 लाख मीट्रिक टन धान पहुंच सकता है।
चीमा ने कहा कि यदि मौजूदा अनाज का समय पर उठान नहीं हुआ, तो नई फसल के भंडारण में परेशानी हो सकती है। उन्होंने सरकार से खरीद और भंडारण व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए तत्काल कदम उठाने की अपील की।
निष्कर्ष: पंजाब में नगर निगम चुनावों को लेकर अकाली दल की मांगों के साथ पराली प्रबंधन और धान भंडारण के मुद्दे भी राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गए हैं। हालांकि, राज्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग और सरकार पर लगाए गए आरोप अकाली दल का पक्ष हैं; इन पर संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया और आधिकारिक दस्तावेजों से पुष्टि जरूरी है।





