Chandigarh Master Plan 2031: बढ़ेगा घनत्व तो कैसे संभलेगा ट्रैफिक और पार्किंग? मास्टर प्लान संशोधनों पर उठे सवाल
आवासीय इलाकों में ज्यादा ऊंचाई और घनत्व के प्रस्तावों पर लोगों की चिंता, पानी-सीवरेज से लेकर पर्यावरण और ट्रैफिक क्षमता तक उठे मुद्दे
चंडीगढ़: चंडीगढ़ मास्टर प्लान-2031 में प्रस्तावित बदलावों को लेकर शहरवासियों(Chandigarh Master Plan ) की राय में बुनियादी ढांचे पर बड़ा सवाल सामने आया है। स्क्रीनिंग कमेटी के समक्ष मिले प्रतिनिधित्वों में लोगों ने कहा है कि शहर में आवासीय घनत्व और इमारतों की ऊंचाई बढ़ाने से पहले ट्रैफिक, पार्किंग, पानी, सीवरेज और पर्यावरणीय क्षमता का आकलन जरूरी है।
हालांकि, सभी लोग प्रस्तावित बदलावों के विरोध में नहीं हैं। कुछ प्रतिनिधित्वों में भूमि के बेहतर इस्तेमाल और बढ़ती आवासीय जरूरतों को देखते हुए अधिक घनत्व का समर्थन भी किया गया है। इसके बावजूद ज्यादातर आपत्तियों में चंडीगढ़ की मौजूदा प्लानिंग और कम ऊंचाई वाले शहरी स्वरूप को बनाए रखने पर जोर दिया गया।
फेज-2 में ग्रुप हाउसिंग घनत्व पर ज्यादा विरोध
फेज-2 में सरकारी आवास समेत ग्रुप हाउसिंग में अधिक घनत्व की अनुमति से जुड़े प्रस्ताव पर तीन प्रतिनिधित्व समर्थन में और 16 विरोध में मिले।
आपत्तिकर्ताओं का तर्क है कि यदि स्टिल्ट पार्किंग को इमारत की ऊंचाई की गणना से बाहर रखा जाता है तो इससे अतिरिक्त मंजिलों और आवासीय इकाइयों की संभावना बढ़ सकती है। इसका सीधा असर आबादी और वाहनों की संख्या पर पड़ सकता है।
कुछ लोगों ने स्टिल्ट प्लस चार मंजिल के प्रस्ताव को चंडीगढ़ के मूल वास्तु और नियोजन स्वरूप के अनुरूप नहीं माना है।
फेज-3 में एफएआर बढ़ाने पर 24 आपत्तियां
फेज-3 के लिए प्रस्तावित संशोधन में एफएआर 1.2 से बढ़ाकर 3.0 करने और भवन की अधिकतम ऊंचाई 98 फीट 5 इंच तक करने का प्रावधान है। इस प्रस्ताव पर तीन लोगों ने समर्थन किया, जबकि 24 प्रतिनिधित्वों में आपत्ति दर्ज कराई गई।
आपत्तियों में सबसे प्रमुख मुद्दे ट्रैफिक दबाव, पार्किंग की उपलब्धता, पानी और सीवरेज नेटवर्क की क्षमता तथा पर्यावरण पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव से जुड़े रहे।
कुछ प्रतिनिधित्वों में यह सुझाव भी दिया गया कि बड़े आवासीय प्रोजेक्ट के लिए न्यूनतम साइट क्षेत्र तीन एकड़ के बजाय एक एकड़ रखा जाए, ताकि छोटे भूखंडों पर भी नियोजित विकास संभव हो सके।
मलोया के आवासीय विकास पर भी चिंता
मलोया में लगभग 178 एकड़ क्षेत्र में प्रस्तावित आवासीय विकास को लेकर भी शहरवासियों ने पर्यावरणीय प्रभाव की आशंका जताई है। इस प्रस्ताव पर एक प्रतिनिधित्व समर्थन में आया, जबकि 13 में आपत्ति दर्ज की गई।
आपत्तियों में हरित क्षेत्र और संभावित पारिस्थितिक बफर पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंता व्यक्त की गई।
आईटी हैबिटेट और मनीमाजरा के प्रस्तावों पर भी विरोध
आईटी हैबिटेट में प्लॉटेड डेवलपमेंट के प्रस्ताव को लेकर एक समर्थन और चार आपत्तियां सामने आईं।
मनीमाजरा में स्टिल्ट प्लस पांच मंजिल वाले ग्रुप हाउसिंग प्रस्ताव पर एक प्रतिनिधित्व समर्थन में रहा, जबकि नौ ने विरोध किया।
स्थानीय लोगों ने तर्क दिया कि मनीमाजरा पहले से ही घनी आबादी वाला क्षेत्र है। ऐसे में भवनों की ऊंचाई और आवासीय घनत्व बढ़ाने से पहले पानी, सीवरेज, ड्रेनेज, बिजली और पार्किंग जैसी सुविधाओं की मौजूदा क्षमता का स्वतंत्र तकनीकी आकलन किया जाना चाहिए।
हेरिटेज कमेटी से मंजूरी, आगे की स्वीकृति बाकी
प्रस्तावित संशोधनों को हेरिटेज कंजर्वेशन कमेटी की मंजूरी मिल चुकी है। हालांकि, इन बदलावों को अंतिम रूप देने के लिए संबंधित सक्षम प्राधिकारियों की स्वीकृति अभी बाकी है।
सामाजिक कार्यकर्ता आरके गर्ग ने प्रस्तावित बदलावों और लोगों की आपत्तियों पर व्यापक एवं पारदर्शी चर्चा की जरूरत बताई है। उनका कहना है कि शहर के भविष्य से जुड़े किसी भी बड़े बदलाव पर निर्णय लेने से पहले नागरिकों की चिंताओं और बुनियादी ढांचे की क्षमता को ध्यान में रखा जाना चाहिए।





