Haryana Baby Trafficking Case: 8 लाख रुपये में नवजात खरीदने के आरोपी को हाईकोर्ट से राहत नहीं, कस्टडी देने से इनकार
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा—बच्चे की खरीद-फरोख्त के गंभीर आरोपों के बीच आरोपी को कस्टडी देना उचित नहीं
चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने कथित तौर पर नवजात बच्चे को आठ लाख रुपये में खरीदने के आरोपी व्यक्ति को राहत देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने बच्चे की कस्टडी की मांग वाली याचिका खारिज करते हुए कहा कि गंभीर आपराधिक आरोपों के बीच नवजात को याचिकाकर्ता के सुपुर्द करना उचित नहीं होगा।
मामला हरियाणा के बहादुरगढ़ निवासी एक व्यक्ति से जुड़ा है, जिसने हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल कर नवजात बच्चे की कस्टडी मांगी थी। याचिकाकर्ता का दावा था कि बच्चा उसे कानूनी रूप से गोद दिया गया था और वह तथा उसकी पत्नी लंबे समय से उसकी देखभाल कर रहे थे।
दिसंबर 2025 में दंपती के पास आया था बच्चा
याचिका में बताया गया कि नवजात दिसंबर 2025 में याचिकाकर्ता और उसकी पत्नी के पास आया था। दंपती ने दावा किया कि बच्चे के जैविक माता-पिता ने आवश्यक दस्तावेज तैयार कर उसे उनके सुपुर्द किया था।
याचिकाकर्ता की ओर से यह भी कहा गया कि जनवरी 2026 में जारी जन्म प्रमाणपत्र में दंपती का नाम बच्चे के माता-पिता के रूप में दर्ज किया गया था। दंपती ने अदालत के समक्ष बच्चे के साथ भावनात्मक जुड़ाव का भी हवाला दिया।
पुलिस जांच में सामने आया आठ लाख रुपये का आरोप
मामले ने उस समय गंभीर रूप ले लिया, जब अप्रैल 2026 में पुलिस ने नवजात बच्चों की कथित अवैध खरीद-फरोख्त और तस्करी से जुड़े एक मामले में प्राथमिकी दर्ज की।
जांच के दौरान याचिकाकर्ता पर आरोप सामने आया कि उसने एक सह-आरोपित के माध्यम से नवजात को कथित तौर पर आठ लाख रुपये में खरीदा था। इसके बाद संबंधित अधिकारियों ने बच्चे को दंपती की कस्टडी से हटा लिया।
विशेष दत्तक ग्रहण एजेंसी में रखा गया नवजात
बाल कल्याण समिति के निर्देश के बाद नवजात को विशेषीकृत दत्तक ग्रहण एजेंसी की देखरेख में भेज दिया गया। फिलहाल बच्चे की देखभाल वहीं की जा रही है।
हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान यह स्पष्ट किया कि इस चरण में अदालत गोद लेने से जुड़े दस्तावेजों की अंतिम वैधता पर फैसला नहीं कर रही है।
कस्टडी मामले में गंभीर आरोपों को माना महत्वपूर्ण
अदालत ने माना कि बच्चे की कस्टडी से जुड़े मामलों में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई की जा सकती है। हालांकि, वर्तमान मामले में याचिकाकर्ता के खिलाफ दर्ज गंभीर आरोपों को अदालत ने महत्वपूर्ण माना।
हाईकोर्ट ने कहा कि जिस व्यक्ति पर बच्चे की कथित खरीद-फरोख्त में शामिल होने का आरोप हो, उसे उसी बच्चे की कस्टडी देना उचित नहीं ठहराया जा सकता।
कस्टडी की मांग वाली याचिका खारिज
सभी परिस्थितियों और पुलिस जांच में सामने आए आरोपों को ध्यान में रखते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने नवजात की कस्टडी याचिकाकर्ता को देने से इनकार कर दिया।
अदालत के इस फैसले के बाद बच्चे की कस्टडी फिलहाल संबंधित विशेष दत्तक ग्रहण एजेंसी के पास ही रहेगी। मामले में आपराधिक आरोपों और अन्य कानूनी पहलुओं की जांच व कार्रवाई अलग प्रक्रिया के तहत जारी रहेगी।




