बिहार

उपराष्ट्रपति के दौरे से पहले एसी जोशी लाइब्रेरी बंद करने पर विवाद, छात्रों ने जताई नाराजगी

4 सितंबर को सुबह 6 से शाम 4 बजे तक बंद रहेगा एसी जोशी लाइब्रेरी और आउटर रीडिंग हॉल; छात्र संगठनों ने कहा-वीआईपी प्रोटोकॉल के लिए पढ़ाई प्रभावित करना उचित नहीं

चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) में उपराष्ट्रपति एवं विश्वविद्यालय के चांसलर सीपी राधाकृष्णन के प्रस्तावित दौरे से पहले एसी जोशी लाइब्रेरी को बंद रखने के निर्णय पर छात्र संगठनों ने आपत्ति जताई है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने सुरक्षा और वीआईपी कार्यक्रम को देखते हुए 4 सितंबर को लाइब्रेरी और आउटर रीडिंग हॉल को निर्धारित समय के लिए बंद रखने का फैसला किया है।

जानकारी के अनुसार, 4 सितंबर को सुबह 6 बजे से शाम 4 बजे तक एसी जोशी लाइब्रेरी और आउटर रीडिंग हॉल विद्यार्थियों के लिए बंद रहेंगे। इस निर्णय के बाद कई छात्र संगठनों और विद्यार्थियों ने इसे अकादमिक गतिविधियों के लिए नुकसानदायक बताया है।

छात्रों ने कहा- पढ़ाई के लिए जरूरी है लाइब्रेरी

अंबेडकर स्टूडेंट्स एसोसिएशन (एएसए) समेत अन्य विद्यार्थियों का कहना है कि विश्वविद्यालय की लाइब्रेरी छात्रों के अध्ययन और शोध का महत्वपूर्ण केंद्र है। ऐसे में किसी वीआईपी कार्यक्रम के कारण इसे बंद करने से विद्यार्थियों की नियमित पढ़ाई प्रभावित हो सकती है।

विद्यार्थियों ने सवाल उठाया कि सुरक्षा व्यवस्था जरूरी है, लेकिन इसके लिए छात्रों को उनकी पढ़ाई के प्रमुख स्थान से दूर रखना उचित नहीं है। उनका कहना है कि विश्वविद्यालय परिसर में आने वाले छात्र किसी सुरक्षा खतरे के रूप में नहीं देखे जाने चाहिए।

चांसलर से छात्रों के संवाद की मांग

छात्रों का यह भी कहना है कि चांसलर विश्वविद्यालय समुदाय का ही हिस्सा होते हैं। इसलिए उनके दौरे के दौरान विद्यार्थियों और विश्वविद्यालय समुदाय के साथ संवाद को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि वीआईपी दौरे के अवसर पर अकादमिक स्थलों को बंद करने के बजाय ऐसी व्यवस्था की जानी चाहिए, जिससे सुरक्षा भी बनी रहे और विद्यार्थियों की पढ़ाई भी बाधित न हो।

फैसले पर प्रशासन से मांगा स्पष्टीकरण

छात्र संगठनों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से लाइब्रेरी बंद करने के फैसले पर स्पष्ट जानकारी देने की मांग की है। विद्यार्थियों ने यूनिवर्सिटी लाइब्रेरियन, डीएसडब्ल्यू, कुलपति और चांसलर से इस मामले में स्थिति स्पष्ट करने का आग्रह किया है।

छात्रों का कहना है कि भविष्य में किसी भी वीआईपी कार्यक्रम या प्रोटोकॉल के कारण शिक्षा और अकादमिक गतिविधियों पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए। उनका मानना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन को सुरक्षा व्यवस्था और विद्यार्थियों के हितों के बीच संतुलन बनाकर निर्णय लेना चाहिए।

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