हरियाणा

बढ़ती कमाई के बावजूद कर्ज के दबाव में हरियाणा, कैग रिपोर्ट ने जताई वित्तीय चिंता

कैग की रिपोर्ट में हरियाणा की वित्तीय स्थिति पर चिंता, बढ़ती देनदारियों और घटते पूंजीगत खर्च को बताया बड़ी चुनौती

चंडीगढ़: हरियाणा की अर्थव्यवस्था में लगातार वृद्धि के बावजूद राज्य के बढ़ते कर्ज, देनदारियों और घटते पूंजीगत खर्च ने वित्तीय प्रबंधन को लेकर चिंता बढ़ा दी है। भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (कैग) की वर्ष 2024-25 की रिपोर्ट में राज्य की वित्तीय स्थिति से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर ध्यान दिलाया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, हरियाणा का राज्य सकल घरेलू उत्पाद (एसजीडीपी) 11.83 प्रतिशत बढ़ा, जबकि राजस्व प्राप्तियों में 5.05 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। हालांकि गैर-कर राजस्व में 7 प्रतिशत और केंद्र से मिलने वाले सहायता अनुदान में 17.6 प्रतिशत की कमी आई।

बढ़ती देनदारियां बनीं चुनौती

कैग के अनुसार, राज्य की कुल देनदारियां पिछले पांच वर्षों से लगातार बढ़ रही हैं। एक वर्ष में इनमें 10.52 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। बढ़ते कर्ज के कारण भविष्य में मूलधन और ब्याज भुगतान का बोझ बढ़ने की आशंका है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि इससे सरकार की वित्तीय लचीलापन क्षमता प्रभावित हो सकती है।

पूंजीगत खर्च में कमी

राज्य के कुल व्यय का लगभग 88.94 प्रतिशत राजस्व व्यय पर खर्च हुआ। प्रतिबद्ध खर्च और सब्सिडी का हिस्सा भी काफी अधिक रहा।

वहीं, पूंजीगत व्यय बजटीय प्रावधान से कम रहा और कुल उधारी का केवल 17.67 प्रतिशत ही पूंजीगत खर्च पर लगाया गया। कैग ने इसे बुनियादी ढांचे और दीर्घकालिक विकास के लिए चुनौती बताया है।

2491 करोड़ रुपये की देनदारियां लंबित

रिपोर्ट के मुताबिक राज्य पर 2491.65 करोड़ रुपये की देनदारियां लंबित हैं। इनमें स्थानीय निकायों को वित्त आयोग के अनुदान, लंबित रिफंड, बिजली से संबंधित देनदारियां और बजट से बाहर के उधार शामिल हैं।

कैग ने इन देनदारियों की समय पर पहचान, उचित लेखांकन और रिपोर्टिंग की जरूरत पर जोर दिया है।

2135 उपयोगिता प्रमाणपत्र भी लंबित

वर्ष 2024-25 में 2,135 उपयोगिता प्रमाणपत्र लंबित पाए गए। इनमें 884 प्रमाणपत्र वर्ष 2019-20 से पहले के बताए गए हैं। इसके अलावा कई स्वायत्त निकायों के खाते भी लंबित हैं।

वित्तीय पारदर्शिता पर सवाल

कैग ने वित्तीय रिपोर्टिंग में पारदर्शिता को लेकर भी चिंता जताई है। रिपोर्ट में कुछ मदों के अत्यधिक उपयोग और लंबित लेखांकन मामलों का उल्लेख किया गया है।

हालांकि केंद्र प्रायोजित योजनाओं की राशि की निगरानी के लिए सिंगल नोडल एजेंसी और एसएनए-स्पर्श व्यवस्था को सकारात्मक कदम बताया गया है, लेकिन इसका पूर्ण क्रियान्वयन अभी बाकी है।

मुख्य बातें

  • एसजीडीपी में 11.83 प्रतिशत की वृद्धि
  • राजस्व प्राप्तियों में 5.05 प्रतिशत बढ़ोतरी
  • गैर-कर राजस्व में 7 प्रतिशत की कमी
  • केंद्रीय सहायता अनुदान में 17.6 प्रतिशत गिरावट
  • कुल देनदारियों में एक वर्ष में 10.52 प्रतिशत वृद्धि
  • 2491.65 करोड़ रुपये की देनदारियां लंबित
  • 2,135 उपयोगिता प्रमाणपत्र लंबित

कैग की रिपोर्ट से साफ है कि हरियाणा की अर्थव्यवस्था में वृद्धि के बावजूद बढ़ता कर्ज, अधिक राजस्व खर्च और कम पूंजीगत निवेश राज्य के वित्तीय प्रबंधन के सामने बड़ी चुनौती बने हुए हैं।

Show More

यह भी जरुर पढ़ें !

Back to top button