अंकित बालियान हत्याकांड पर सुनील सिंह ने उठाए यूपी पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल !
लखनऊ -: हत्या के बाद दो आरोपियों को मुठभेड़ में ढेर करना सराहनीय बताया जा रहा है, लेकिन घटना से पहले पुलिस कहां थी?शामली में अंकित बालियान की हत्या के बाद पुलिस द्वारा दो कथित आरोपियों को मुठभेड़ में ढेर किए जाने पर लोकदल अध्यक्ष सुनील सिंह ने यूपी पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। सुनील सिंह ने कहा कि अपराधियों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई पर सवाल नहीं है। यदि दोनों व्यक्ति अंकित बालियान हत्याकांड में शामिल थे और पुलिस कार्रवाई कानून के अनुसार हुई है तो अपराधियों पर कार्रवाई निश्चित रूप से स्वागत योग्य है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि जब अंकित बालियान की हत्या हुई, तब पुलिस कहां थी ?
उन्होंने कहा, “घटना होने के बाद पुलिस ने तेजी दिखाई और दो कथित शूटरों को ढेर कर दिया। पुलिस ने अपनी कार्रवाई से वाहवाही जरूर हासिल कर ली, लेकिन जनता यह जानना चाहती है कि घटना से पहले पुलिस की खुफिया व्यवस्था और कानून-व्यवस्था की निगरानी कहां थी ? ” लोकदल अध्यक्ष ने कहा कि किसी भी हत्या के बाद पुलिस की कार्रवाई को केवल मुठभेड़ तक सीमित नहीं किया जा सकता। असली जिम्मेदारी यह सुनिश्चित करना है कि अपराध होने ही न पाए। यदि पुलिस को अपराधियों की जानकारी थी तो उन्हें पहले क्यों नहीं पकड़ा गया? और यदि जानकारी नहीं थी तो प्रदेश की खुफिया एवं कानून-व्यवस्था व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
सुनील सिंह ने कहा कि अंकित बालियान के परिवार को न्याय मिलना चाहिए और पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। पुलिस कार्रवाई की भी जांच हो, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि मुठभेड़ किन परिस्थितियों में हुई और इसमें कानून की सभी प्रक्रियाओं का पालन किया गया या नहीं। उन्होंने कहा, “पुलिस को अपराध होने के बाद शाबाशी लेने वाली व्यवस्था नहीं, बल्कि अपराध होने से पहले उसे रोकने वाली व्यवस्था बनना होगा। प्रदेश की जनता को एनकाउंटर नहीं, सुरक्षित माहौल और कानून का राज चाहिए।
