जगतार सिंह हवारा की पैरोल के लिए CM भगवंत मान ने राज्यपाल को लिखा पत्र, बीमार मां से मिलने की मांगी 10 दिन की अनुमति
1995 के बेअंत सिंह हत्याकांड में उम्रकैद की सजा काट रहे हवारा के लिए मान ने मानवीय आधार पर पैरोल की अपील की; हाईकोर्ट में भी लंबित है मामला
चंडीगढ़: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने जेल में बंद जगतार सिंह हवारा को 10 दिन की पैरोल देने की सिफारिश की है। मुख्यमंत्री ने इस संबंध में पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया को पत्र लिखकर हवारा को उसकी बीमार मां से मिलने की अनुमति देने का अनुरोध किया है।
मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में हवारा की मां की बढ़ती उम्र और खराब स्वास्थ्य का हवाला दिया है। उन्होंने कहा कि उनकी तबीयत लगातार बिगड़ रही है, ऐसे में मानवीय आधार पर हवारा को कुछ समय के लिए पैरोल दिए जाने पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाना चाहिए।
हाईकोर्ट में भी लंबित है पैरोल की मांग
जगतार सिंह हवारा ने पैरोल के लिए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का भी रुख किया है। मुख्यमंत्री के पत्र के अनुसार, हवारा ने अदालत में CRWP No. 3868/2026 के माध्यम से पैरोल पर रिहाई की मांग की है। अदालत ने उसकी पैरोल अर्जी पर विचार करने के निर्देश दिए हैं।
अब मुख्यमंत्री की सिफारिश के बाद पैरोल को लेकर अंतिम निर्णय राज्यपाल स्तर पर लिया जाना है। फिलहाल राजभवन की ओर से इस अनुरोध पर किसी अंतिम निर्णय की जानकारी सामने नहीं आई है।
कौन है जगतार सिंह हवारा?
जगतार सिंह हवारा को 1995 में तत्कालीन पंजाब मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या से जुड़े मामले में दोषी ठहराया गया था। वर्ष 2007 में उसे मौत की सजा सुनाई गई थी। बाद में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने 2010 में उसकी सजा को उम्रकैद में बदल दिया था।
31 अगस्त 1995 को चंडीगढ़ स्थित पंजाब सिविल सचिवालय के बाहर हुए विस्फोट में बेअंत सिंह समेत 17 लोगों की मौत हुई थी। हवारा इस मामले में उम्रकैद की सजा काट रहा है।
पहले पैरोल के मुद्दे पर क्या था पंजाब सरकार का रुख?
इस मामले ने इसलिए भी राजनीतिक और प्रशासनिक चर्चा को जन्म दिया है क्योंकि हाल के महीनों में पैरोल को लेकर पंजाब सरकार के रुख में बदलाव की बात सामने आई है। एक रिपोर्ट के अनुसार, फरवरी 2026 में जेल विभाग ने हवारा की पैरोल के पक्ष में सिफारिश नहीं की थी। बाद में मुख्यमंत्री भगवंत मान ने मानवीय आधार पर 10 दिन की पैरोल के लिए राज्यपाल को पत्र लिखा।
फिलहाल सभी की नजरें राज्यपाल के निर्णय पर हैं। पैरोल मंजूर होती है या नहीं, इसका फैसला संबंधित नियमों और मामले की कानूनी स्थिति को ध्यान में रखते हुए किया जाएगा।




