पंजाब में आवारा कुत्तों का बढ़ता आतंक, हर दिन सैकड़ों लोग बन रहे शिकार
कुत्तों के काटने के मामलों में लगातार बढ़ोतरी, सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद राज्य सरकार ने 21 दिन की कार्ययोजना लागू की
चंडीगढ़: पंजाब में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या अब केवल पशु प्रबंधन का मुद्दा नहीं रह गई है, बल्कि यह सार्वजनिक सुरक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ी गंभीर चुनौती बन चुकी है। राज्य के कई शहरों और कस्बों में कुत्तों के हमलों की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं, जिससे नागरिकों में चिंता का माहौल है। इसी स्थिति को देखते हुए पंजाब सरकार ने संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष कार्रवाई शुरू करने का निर्णय लिया है।
बढ़ते हमलों ने बढ़ाई चिंता
पिछले कुछ वर्षों में राज्यभर में कुत्तों के काटने की घटनाओं में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में लोगों पर हमलों की संख्या लगातार बढ़ रही है। बच्चों और बुजुर्गों को सबसे अधिक खतरा माना जा रहा है।
लुधियाना, अमृतसर, जालंधर और पटियाला जैसे बड़े शहर इस समस्या से सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में शामिल हैं। अस्पतालों में एंटी-रेबीज टीकों की मांग भी लगातार बढ़ रही है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद सरकार सक्रिय
हाल ही में शीर्ष अदालत द्वारा सार्वजनिक सुरक्षा को प्राथमिकता देने संबंधी निर्देशों के बाद पंजाब सरकार ने विशेष अभियान शुरू किया है। इस अभियान का उद्देश्य स्कूलों, अस्पतालों, पार्कों और अन्य भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में आवारा कुत्तों की मौजूदगी को नियंत्रित करना है।
सरकार ने स्थानीय निकायों को निर्देश दिए हैं कि वे संवेदनशील स्थानों की पहचान कर वहां आवश्यक कदम उठाएं। साथ ही पशु कल्याण नियमों का पालन सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया है।
समस्या की जड़ क्या है?
विशेषज्ञों का मानना है कि आवारा कुत्तों की बढ़ती आबादी के पीछे कई कारण हैं। इनमें नसबंदी कार्यक्रमों का सीमित प्रभाव, खुले में फैला खाद्य कचरा, अपर्याप्त पशु आश्रय केंद्र और निगरानी तंत्र की कमी प्रमुख हैं।
कई क्षेत्रों में कूड़े के ढेर कुत्तों के लिए भोजन का स्थायी स्रोत बन जाते हैं, जिससे उनकी संख्या तेजी से बढ़ती है। इसके अलावा, पर्याप्त टीकाकरण और नसबंदी न होने से समस्या लंबे समय तक बनी रहती है।
पशु अधिकार संगठनों की चिंता
पशु कल्याण से जुड़े कई संगठनों का कहना है कि केवल कुत्तों को पकड़ना या हटाना स्थायी समाधान नहीं है। उनका मानना है कि वैज्ञानिक और मानवीय दृष्टिकोण अपनाकर नसबंदी, टीकाकरण और पुनर्वास कार्यक्रमों को मजबूत करना आवश्यक है।
पंजाब सरकार का विशेष अभियान फिलहाल सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालांकि इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि प्रशासन दीर्घकालिक समाधान लागू करने में कितना सफल रहता है। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल तात्कालिक कार्रवाई के बजाय वैज्ञानिक योजना, पर्याप्त संसाधन और सामुदायिक सहयोग से ही इस गंभीर समस्या पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।





