हरियाणा में व्यापारियों को राहत, पुराने टैक्स विवाद निपटाने की समयसीमा 30 नवंबर तक बढ़ी
एकमुश्त निपटान योजना का लाभ लेने से वंचित रह गए व्यापारियों को दो महीने का अतिरिक्त समय; पुराने कर, ब्याज और जुर्माने में प्रावधान के अनुसार मिलेगी छूट
चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने पुराने कर विवादों और बकाया टैक्स से जुड़े मामलों में व्यापारियों व छोटे कारोबारियों को बड़ी राहत दी है। आबकारी एवं कराधान विभाग ने एकमुश्त निपटान योजना की अवधि बढ़ाकर 30 नवंबर कर दी है। इससे वे करदाता अगले दो महीनों में योजना के तहत अपना बकाया निपटाकर राहत का लाभ ले सकेंगे, जो पहले निर्धारित समयसीमा में आवेदन या भुगतान नहीं कर पाए थे।
राज्य सरकार ने जीएसटी लागू होने से पहले के लंबित कर विवादों और वसूली के मामलों को समाप्त करने के उद्देश्य से 1 जून को यह योजना शुरू की थी। इसकी मूल समयसीमा 28 सितंबर थी। बड़ी संख्या में करदाताओं के योजना से बाहर रह जाने के बाद सरकार ने इसकी अवधि दो महीने और बढ़ाने का फैसला लिया।
सात पुराने कर कानूनों से जुड़े मामलों में राहत
एकमुश्त निपटान योजना जीएसटी से पहले लागू रहे सात पुराने कर कानूनों के मामलों पर लागू है। इनमें हरियाणा वैट, केंद्रीय बिक्री कर, हरियाणा सामान्य बिक्री कर, मनोरंजन शुल्क, विलासिता कर, स्थानीय क्षेत्र विकास कर और एंट्री टैक्स से जुड़े बकाये शामिल हैं।
योजना के तहत निर्धारित शर्तों के अनुसार टैक्स के साथ ब्याज और जुर्माने में भी राहत दी जाएगी।
एक लाख रुपये तक का बकाया पूरी तरह माफ
किसी एक असेसमेंट वर्ष में जिन करदाताओं का कुल बकाया एक लाख रुपये तक है, उन्हें टैक्स, ब्याज और जुर्माने पर 100 प्रतिशत राहत मिलेगी। ऐसे मामलों में अलग से आवेदन करने की आवश्यकता नहीं होगी।
एक लाख रुपये से अधिक के बकाये वाले करदाता आबकारी एवं कराधान विभाग के ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से योजना का लाभ लेने के लिए आवेदन कर सकते हैं।
बड़े बकाये पर अलग-अलग स्लैब में टैक्स छूट
हरियाणा सामान्य बिक्री कर अधिनियम, 1973 के मामलों में एक लाख रुपये तक के टैक्स बकाये पर पूरी छूट का प्रावधान है। एक लाख रुपये से अधिक के टैक्स बकाये पर भी 70 प्रतिशत तक की राहत मिल सकती है। संबंधित ब्याज और जुर्माने को पूरी तरह माफ करने का प्रावधान है।
अन्य छह पुराने कर कानूनों के मामलों में बकाये की राशि के आधार पर राहत तय की गई है।
| बकाया राशि | टैक्स में राहत |
|---|---|
| ₹1 लाख से अधिक से ₹10 लाख तक | 60 प्रतिशत |
| ₹10 लाख से अधिक से ₹1 करोड़ तक | 50 प्रतिशत |
| ₹1 करोड़ से अधिक से ₹10 करोड़ तक | 40 प्रतिशत |
| ₹10 करोड़ से अधिक से ₹30 करोड़ तक | 35 प्रतिशत |
| ₹30 करोड़ से अधिक से ₹60 करोड़ तक | 30 प्रतिशत |
| ₹60 करोड़ से अधिक | टैक्स में छूट नहीं |
₹60 करोड़ से अधिक के मामलों में टैक्स पर छूट नहीं मिलेगी, लेकिन ब्याज और जुर्माने की 100 प्रतिशत माफी का प्रावधान लागू रहेगा।
बकाया राशि चुकाने के लिए किस्तों की सुविधा
सरकार ने निपटान राशि के भुगतान के लिए भी अलग-अलग विकल्प दिए हैं।
- ₹5 लाख तक: पूरी राशि एकमुश्त जमा करनी होगी।
- ₹5 लाख से ₹25 लाख तक: दो किस्तों में भुगतान की सुविधा।
- ₹25 लाख से अधिक: तीन किस्तों में भुगतान किया जा सकेगा।
इससे बड़े बकाये वाले व्यापारियों को एक साथ पूरी निपटान राशि जमा करने के बजाय निर्धारित किस्तों में भुगतान करने का विकल्प मिलेगा।
चुनिंदा पुराने वर्षों के मामलों पर भी ले सकेंगे लाभ
योजना का लाभ लेने के लिए व्यापारी अपने सभी पुराने मामलों को एक साथ शामिल करने के लिए बाध्य नहीं हैं। वे अपनी जरूरत के अनुसार चुनिंदा असेसमेंट वर्षों से जुड़े मामलों का निपटान भी कर सकते हैं।
सरकार ने योजना में ‘डॉक्यूमेंट लिंक्ड वेवर’ का प्रावधान भी जोड़ा है। इसके तहत व्यापारी पुराने वैधानिक फार्म और जरूरी दस्तावेज प्रस्तुत कर सकेंगे। दस्तावेजों के सत्यापन के बाद संबंधित टैक्स मांग में अतिरिक्त कमी या उसे समाप्त करने का प्रावधान लागू हो सकता है।
इस व्यवस्था से उन पुराने मामलों को भी निपटाने में मदद मिल सकती है, जिनमें दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने या दस्तावेजी कमियों के कारण कर विवाद लंबे समय से लंबित हैं।





