दूसरी शादी ( second marriage)के बाद भी एक्ट्रेस को नहीं मिला सुख
नई दिल्ली. कहां जाता है हर मुस्कुराते चेहरे के पीछे कहीं ना कहीं दर्द छुपा होता है. बात आम आदमी की हो या बॉलीवुड के सितारों की. स्टार्स की जिंदगी भी बहुत ज्यादा अलग नहीं होती, आज हम बात करेंगे एक ऐसी खूबसूरत एक्ट्रेस की जिनका जन्म से लेकर जवानी तक का सफर बेहद दर्द भरा रहा. पैदा होते ही उनकी मां गुजर गई और दो-दो शादी ( second marriage) होने के बाद भी जीवन में सुख नहीं मिल सका. बॉलीवुड की ‘द गर्ल नेक्स्ट डोर’ कहीं जाने वाली यह अदाकारा हैं विद्या सिन्हा.
भोला सा चेहरा, बड़ी-बड़ी आंखें और संजीदा व्यक्तित्व. एक सरल, सहज और मासूम भारतीय लड़की. इस जहीन अदाकारा ने जब फिल्मों की दुनिया में कदम रखा तो इस कदर चर्चित हुई कि लोगों ने ही ‘रजनीगंधा’ कहकर बुलाना शुरू कर दिया. उन्होंने मुंबई ब्यूटी कॉन्टेस्ट जीतकर मॉडलिंग की दुनिया में कदम रखा था और फिर बॉलीवुड में धमाकेदार एंट्री की. लेकिन, सब कुछ होने के बाद भी वह सिर्फ एक चीज में मात खा गईं वो था प्यार.
नहीं करना चाहती थीं एक्टिंग
विद्या सिन्हा का जन्म साल 1947 में मुंबई में हुआ था. उनके पिता राणा प्रताप और नाना मोहन सिन्हा जाने-माने फिल्ममेकर थे. उसके बावजूद विद्या की रुचि फिल्मों में नहीं थी. विद्या के जन्म के दौरान ही उनकी मां का देहांत हो गया. उसके बाद उनका लालन-पालन ननिहाल में ही हुआ. ननिहाल में चारों ओर फिल्मों का माहौल था, लेकिन उसके बावजूद विद्या एक्टिंग नहीं करना चाहती थीं. हालांकि, उनका मन पढ़ाई में भी नहीं लगता था.
आंटी की सलाह पर लिया था बॉम्बे ब्यूटी कॉन्टेस्ट में हिस्सा
एक में 1 दिन उनकी एक आंटी ने उन्हें बॉम्बे ब्यूटी कॉन्टेस्ट में हिस्सा लेने की सलाह दी. आंटी के कहने पर ही उन्होंने ब्यूटी कॉन्टेस्ट का फॉर्म भर दिया . आंटी ने उनको समझाया कि तुम बेहद खूबसूरत हो, ऐसे में तुम्हें इस कॉन्टेस्ट में हिस्सा लेना चाहिए. विद्या ने कॉन्टेस्ट में हिस्सा ही नहीं लिया, बल्कि उसे जीतकर वह मिस मुंबई बन गईं. बस फिर क्या था इसके बाद विद्या के पास मॉडलिंग के तमाम असाइनमेंट की लाइन लग गई. उन्होंने एक के बाद एक कई मशहूर ब्रांच के लिए मॉडलिंग की. इतना ही नहीं वह मुंबई की तमाम मैगजीन के फ्रंट पेज पर छा गईं.
जब होने लगी जया भादुरी और मौसमी चटर्जी से तुलना
इसी मैगजीन के फ्रंट पेज पर मशहूर निर्माता निर्देशक बासु चटर्जी की नजर पड़ी तो उन्होंने विद्या को अपनी फिल्म ‘रजनीगंधा’ में लेने के लिए उनसे संपर्क किया. तब तक विद्या फिल्मों में कुछ रुचि लेने लग गई थी. उन्होंने रजनीगंधा फिल्म के लिए हां कर दी. बस फिर क्या था कि अपनी अदाकारी से इन्होंने फिल्म को ऐसा महकाया कि चारों और इन्हें ‘रजनीगंधा’ के नाम से जाना जाने लगा. फिल्म का टाइटल सॉन्ग रोज दिन में कई-कई बार रेडियो पर सुनाई देने लगा. इसके बाद विद्या सिन्हा की तुलना उस समय की चर्चित अभिनेत्री जया भादुरी और मौसमी चटर्जी से की जाने लगी.
‘रजनीगंधा’ के बाद साइन की कई फिल्में
इसके बाद 1974 में फिल्म आई ‘राजा काका’, लेकिन यह बॉक्स ऑफिस पर ज्यादा चल नहीं सकी. ‘रजनीगंधा’ की स्टार कास्ट विद्या और अमोल पालेकर को लेकर निर्माता बासु चटर्जी ने एक और फिल्म बनाई ‘छोटी सी बात’. इस फिल्म में विद्या ने बेहतरीन अभिनय किया और बॉक्स ऑफिस पर छा गईं. इसके बाद विद्या एक के बाद एक लगातार फिल्में साइन कर दी गई और उनकी फैन फॉलोइंग बढ़ती चली गईं. संजीव कुमार और शशि कपूर के साथ 1970 में आई उनकी फिल्म ‘शक्ति’ को भी दर्शकों ने खूब प्यार दिया.
कैसे हुई थी पहली शादी
विद्या को कम उम्र में ही अपने पड़ोस में रहने वाले एक साउथ इंडियन ब्राह्मण लड़के वेंकटेश्वरन अय्यर से प्यार हो गया था. बालिग होते ही उन्होंने इन 1968 में वेंकटेश्वरन से शादी कर ली. पति के कहने पर ही उन्होंने फिल्मों में एंट्री की और ‘रजनीगंधा’ फिल्म साइन की थी. साल 1989 में उन्होंने एक बच्ची को गोद लिया जिसका नाम रखा ‘जानवी’. सब कुछ ठीक चल रहा था कि अचानक विद्या की जिंदगी में तूफान आ गया. 1996 में विद्या के पति की बीमारी के चलते मौत हो गई. उसके बाद इन पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा, हालांकि समय के साथ इनके जख्म भर गए और यह अपने बेटी की परवरिश पर ध्यान देने लगी.
54 साल की उम्र में की दूसरा शादी
पति की मौत के 4 साल बाद इनकी मुलाकात ऑस्ट्रेलिया के भारतीय मूल के बिजनेसमैन नेताजी भीमराव सालोखे से हुई. भीमराव पर उनका भरोसा बड़ा तो 54 साल की उम्र में उन्होंने साल 2001 में उनसे दूसरी शादी कर ली और बेटी के साथ वह ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में शिफ्ट हो गई, लेकिन ये उनकी जिंदगी की सबसे बड़ी गलती साबित हुई. दरअसल, पता चला कि भीमराव ने विद्या के साथ उनके पैसों के लालच में शादी की थी.
बेटी के कहने पर दोबारा शुरू किया काम
बताया जाता है कि भीमराव लगातार विद्या से पैसों की डिमांड करने लगा और उनके साथ बदसलूकी करने लगा, जिसकी शिकायत साल 2009 में विद्या ने पुलिस से की. इसके बाद विद्या इंडिया शिफ्ट हो गईं. पति से अलग होने के बाद वह बेहद अकेलापन महसूस करती थीं और उनकी तबीयत भी खराब रहने लगी. हालांकि, इस दौरान बेटी जानवी ने उन्हें समझाया कि उन्हें दोबारा फिल्मों में काम करना चाहिए. इसके बाद विद्या ने खुद को संभाला और टीवी सीरियल्स में काम करना शुरू किया. ‘काव्यांजलि’, ‘नीम नीम शहद शहद’, ‘इश्क का रंग सफेद’, ‘बहुरानी’, ‘कुबूल है’ और ‘कुल्फी कुमार बाजेवाला’ इनके कुछ खास टीवी शोज थे, जिसमें उन्होंने बेहतरीन अभिनय किया.
कैसे हुई विद्या सिन्हा की मौत?
हालांकि, इस बीच उनका स्वास्थ्य लगातार गिरता गया. एक दिन उन्हें जुहू के एक अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा. यहां डॉक्टरों ने बताया कि वह फेफड़ों की बीमारी से जूझ रही हैं. उन्हें 6 दिन तक वेंटिलेटर पर रखा गया और अंत में 15 अगस्त साल 2019 को वह दुनिया को अलविदा कह गईं.

