व्यापार

रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर, 95.34 प्रति डॉलर तक गिरा

कच्चे तेल की कीमतों और पश्चिम एशिया तनाव का असर, मामूली सुधार के साथ 94.84 पर बंद

Business:पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजार (रुपया रिकॉर्ड) में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के कारण भारतीय रुपया दबाव में आ गया है। गुरुवार को अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में कारोबार के दौरान रुपया 95.34 प्रति डॉलर के अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया।

हालांकि, दिन के अंत में कच्चे तेल की कीमतों में हल्की नरमी के चलते रुपये में कुछ सुधार देखने को मिला और यह 94.84 प्रति डॉलर पर बंद हुआ, जो पिछले सत्र के मुकाबले 4 पैसे की बढ़त दर्शाता है।

तेल की कीमतों और वैश्विक तनाव का असर
Middle East में जारी तनाव और कच्चे तेल की कीमतों के 122 डॉलर प्रति बैरल के पार जाने से रुपये पर दबाव बढ़ा है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितता और अमेरिका-ईरान के बीच चल रही बातचीत में स्पष्टता की कमी के कारण रुपये की मजबूती सीमित हो गई है।

साल 2026 में अब तक 5% गिरावट
रुपया इस साल अब तक करीब 5 प्रतिशत तक कमजोर हो चुका है। गुरुवार को यह 95.01 के स्तर पर खुला था, लेकिन दिन के दौरान गिरावट दर्ज करते हुए रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया।

आपूर्ति संकट और आयात निर्भरता
Strait of Hormuz से जुड़ी आपूर्ति बाधाओं ने भी स्थिति को और जटिल बना दिया है। यह मार्ग भारत के लिए कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति का प्रमुख रास्ता है। भारत अपनी तेल जरूरतों का लगभग 88 प्रतिशत और गैस का करीब 50 प्रतिशत आयात करता है, जिससे वैश्विक बाजार में बदलाव का सीधा असर घरेलू मुद्रा पर पड़ता है।

FII की बिकवाली से दबाव
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली ने भी रुपये को कमजोर किया है। शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, हाल के सत्र में एफआईआई ने करीब 2,460 करोड़ रुपये के शेयर बेचे।

विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक वैश्विक स्तर पर स्थिति सामान्य नहीं होती, खासकर पश्चिम एशिया में तनाव कम नहीं होता, तब तक रुपये पर दबाव बना रह सकता है।

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