पंजाब में शिक्षण व्यवस्था पर बढ़ा दबाव, 17 हजार से अधिक शिक्षकों की सर्वे ड्यूटी से स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका
शिक्षक संगठनों ने गैर-शैक्षणिक कार्यों में तैनाती पर जताई चिंता, खाली पदों और तबादलों को लेकर भी उठाए सवाल
पंजाब : पंजाब में सरकारी स्कूलों की शिक्षण व्यवस्था को लेकर एक बार फिर चिंता जताई जा रही है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि बड़ी संख्या में शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाया जाने से स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।
डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट, पंजाब के प्रतिनिधियों के अनुसार राज्य में 17 हजार से अधिक शिक्षकों को बीएलओ (BLO) ड्यूटी के तहत विशेष सर्वे कार्यों में लगाया गया है। इसके तहत शिक्षकों को घर-घर जाकर मतदाताओं से संबंधित प्रपत्र भरने और उन्हें ऑनलाइन अपलोड करने जैसे कार्य करने होंगे। संगठन का दावा है कि यह प्रक्रिया कई महीनों तक चल सकती है।
शिक्षक नेताओं का कहना है कि ड्रग सेंसस और ‘मुख्यमंत्री मावां-धीयां सत्कार स्कीम’ जैसे कार्यक्रमों के कारण भी बड़ी संख्या में शिक्षक स्कूलों से बाहर हैं। उनका दावा है कि करीब 20 हजार शिक्षक विभिन्न सर्वे और प्रशासनिक कार्यों में व्यस्त हैं, जिससे नियमित शिक्षण कार्य प्रभावित हो रहा है।
संगठन के पदाधिकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ स्थानों पर शिक्षकों पर दबाव बनाकर इन कार्यों को करवाया जा रहा है। साथ ही, बीएलओ और जनगणना संबंधी ड्यूटी में लगे शिक्षकों के तबादलों पर रोक लगाए जाने का भी विरोध किया गया है। उनका कहना है कि कई शिक्षक लंबे समय से अपने स्थानांतरण का इंतजार कर रहे हैं।
शिक्षक संगठनों ने राज्य में प्रिंसिपल, हेडमास्टर, लेक्चरर, मास्टर और ईटीटी शिक्षकों के खाली पदों का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना है कि पहले से ही कई स्कूलों में शिक्षकों की कमी है और ऐसे में अतिरिक्त गैर-शैक्षणिक जिम्मेदारियां विद्यार्थियों की पढ़ाई पर असर डाल सकती हैं।
हालांकि, इस संबंध में सरकार या शिक्षा विभाग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। शिक्षक संगठनों ने मांग की है कि शिक्षकों को मुख्य रूप से शैक्षणिक कार्यों के लिए ही उपलब्ध रखा जाए, ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो।
SEO Keywords:





