वित्तीय मांगों को लेकर सड़कों पर उतरे कर्मचारी, सरकार के खिलाफ जताया रोष
मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ रहे कर्मचारियों को पुलिस ने रोका, पानी की बौछारें और बल प्रयोग के बीच कई प्रदर्शनकारी घायल।
मोहाली: पंजाब में विभिन्न कर्मचारी संगठनों ने अपनी लंबित वित्तीय मांगों को लेकर बड़े स्तर पर प्रदर्शन किया। पुराने स्केल, पुरानी पेंशन और विभिन्न भत्तों की बहाली की मांग को लेकर कर्मचारियों ने मोहाली में विशाल रैली आयोजित की और चंडीगढ़ स्थित मुख्यमंत्री आवास की ओर मार्च करने का प्रयास किया।
प्रदर्शनकारी गुरुद्वारा अंब साहिब के निकट एकत्र हुए, जहां से उन्होंने अपनी मांगों (पंजाब)के समर्थन में रैली निकाली। जैसे ही कर्मचारी चंडीगढ़-पंजाब सीमा की ओर बढ़े, पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। स्थिति तनावपूर्ण होने पर पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया और बल प्रयोग किया।
प्रदर्शन के दौरान कई कर्मचारियों के घायल होने की सूचना मिली। कुछ घायलों को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि शांतिपूर्ण मार्च को रोकने के लिए प्रशासन ने कठोर कदम उठाए।
कर्मचारी नेताओं ने कहा कि राज्य सरकार लंबे समय से उनकी प्रमुख मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं ले रही है। उन्होंने नए वेतनमानों में संशोधन, लंबित महंगाई भत्ते के भुगतान, बंद किए गए विभिन्न भत्तों की बहाली और पुरानी पेंशन योजना को पूरी तरह लागू करने की मांग दोहराई।
नेताओं का दावा है कि नई भर्ती वाले कर्मचारियों को पुराने कर्मचारियों की तुलना में कम वेतन मिल रहा है, जिससे आर्थिक असमानता बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों के हितों से जुड़े मुद्दों का समाधान नहीं होने के कारण आंदोलन को मजबूरन तेज करना पड़ रहा है।
रैली के दौरान कुछ शिक्षक संगठनों ने भी भर्ती प्रक्रिया से जुड़े मामलों में जारी नोटिस वापस लेने की मांग उठाई। उनका कहना है कि संबंधित शिक्षकों के भविष्य और सेवा सुरक्षा को लेकर सरकार को सकारात्मक कदम उठाने चाहिए।
कर्मचारी संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द विचार नहीं किया गया तो राज्यभर में आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। दूसरी ओर, प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाने की बात कही है।
इस घटनाक्रम ने एक बार फिर पंजाब में कर्मचारियों से जुड़े वित्तीय और सेवा संबंधी मुद्दों को राजनीतिक और प्रशासनिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है।





