दिल्ली
ईरान-अमेरिका तनाव का असर, महंगे पाम तेल ने रसोई बजट बिगाड़ा
खाने के तेल से लेकर बिस्किट और साबुन तक महंगाई की मार, आम परिवारों पर बढ़ा आर्थिक दबाव
Delhi:भारत में बढ़ती महंगाई के बीच अब अंतरराष्ट्रीय हालात का असर सीधे आम आदमी की रसोई तक पहुंच गया है। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने पाम ऑयल की कीमतों में तेज उछाल ला दिया है, जिससे रोजमर्रा की कई जरूरी वस्तुएं महंगी हो गई हैं।
बाजार में खाने के तेल की कीमतें बढ़कर लगभग एक सौ बयासी रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई हैं। पाम ऑयल की कमी के चलते प्रमुख ब्रांड्स जैसे फॉर्च्यून, जेमिनी और रुचि गोल्ड के दामों में भी लगातार वृद्धि देखी जा रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस बढ़ोतरी के पीछे कई अंतरराष्ट्रीय कारण हैं। समुद्री माल ढुलाई की लागत बढ़ने से आयात महंगा हो गया है, वहीं इंडोनेशिया द्वारा पाम ऑयल की आपूर्ति पर नियंत्रण लगाने से स्थिति और गंभीर हो गई है।
महंगाई का असर केवल तेल तक सीमित नहीं है। खाद्य उत्पाद बनाने वाली बड़ी कंपनियां जैसे पारले और ब्रिटानिया या तो उत्पादों के दाम बढ़ा रही हैं या फिर समान कीमत पर मात्रा कम कर रही हैं, जिसे आम तौर पर ‘श्रिंकफ्लेशन’ कहा जाता है।
इसके साथ ही रसोई गैस के दामों में भी बढ़ोतरी हुई है। घरेलू सिलेंडर लगभग साठ रुपये महंगा हो गया है, जबकि कमर्शियल सिलेंडर में करीब एक सौ पचानवे रुपये से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है।
आंकड़ों के अनुसार, मार्च दो हजार छब्बीस में खुदरा महंगाई दर बढ़कर लगभग तीन दशमलव चार प्रतिशत तक पहुंच गई है। इसका सीधा असर मध्यमवर्गीय परिवारों पर पड़ रहा है, जिनके मासिक खर्च में औसतन एक सौ पचास से एक सौ पैंसठ रुपये तक का अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है।
सरकार द्वारा नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल्स के माध्यम से घरेलू उत्पादन बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन फिलहाल आम लोगों को त्वरित राहत मिलती नजर नहीं आ रही है।