जालंधर नगर निगम की तहबाजारी शाखा में बड़ा खुलासा, जांच में सामने आया व्यापक भ्रष्टाचार
रेहड़ी-फड़ी संचालकों से नकद वसूली, रसीद नहीं देने का आरोप; अब निजी कंपनी को सौंपे जाने की तैयारी तेज
Punjab:जालंधर शहर में नगर निगम( जालंधर नगर निगम) की तहबाजारी शाखा एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गई है। हाल ही में निगम प्रशासन द्वारा चलाए गए विशेष जांच अभियान में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप सामने आए हैं, जिससे पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं।
सूत्रों के अनुसार, सुपरिटेंडेंट संजीव कालिया ने अपनी टीम के साथ शहर के प्रमुख इलाकों—नामदेव चौक, सर्किट हाउस के आसपास और बस स्टैंड क्षेत्र—में विशेष चेकिंग अभियान चलाया। इस दौरान करीब सत्तावन रेहड़ी-खोखा संचालकों से बातचीत कर तहबाजारी शुल्क और रसीद से संबंधित जानकारी जुटाई गई।
जांच में जो तथ्य सामने आए, वे चौंकाने वाले हैं। कुल सत्तावन में से केवल सात से आठ संचालकों ने बताया कि उन्हें शुल्क की विधिवत रसीद मिलती है, जबकि लगभग पचास लोगों ने स्पष्ट रूप से कहा कि उनसे नकद पैसे लिए जाते हैं और बदले में कोई रसीद नहीं दी जाती। यह रिपोर्ट तैयार कर मेयर और निगम कमिश्नर को सौंप दी गई है।
यह मामला इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि तहबाजारी शाखा पर पिछले कई वर्षों से भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हैं। हालांकि, अब तक कोई भी प्रशासन इस समस्या को पूरी तरह खत्म नहीं कर पाया था। लेकिन वर्तमान में मेयर वनीत धीर और निगम कमिश्नर संदीप ऋषि ने इस पर सख्त रुख अपनाते हुए बड़ा कदम उठाया है।
हाल ही में तहबाजारी शाखा में व्यापक स्तर पर स्टाफ बदलाव भी किया गया है। लगभग पूरे कर्मचारियों को बदल दिया गया, जबकि सुपरिटेंडेंट संजीव कालिया को उनके पद पर बरकरार रखते हुए पूरी जिम्मेदारी सौंपी गई है।
सूत्रों के मुताबिक, अब नगर निगम तहबाजारी का पूरा कार्य निजी कंपनी को सौंपने की योजना बना रहा है। इस योजना के तहत निजी कंपनी शहर में संचालित सभी रेहड़ी-फड़ी का सर्वे करेगी, उनकी गिनती करेगी और शुल्क वसूली का जिम्मा संभालेगी।
आंकड़ों के अनुसार, शहर में लगभग बीस से पच्चीस हजार रेहड़ी-फड़ी संचालित हो रही हैं। इनसे निगम को हर वर्ष करीब बीस से पच्चीस करोड़ रुपए की आय होनी चाहिए, लेकिन वर्तमान में निगम को दो करोड़ रुपए भी नहीं मिल पा रहे हैं। इससे साफ संकेत मिलता है कि राजस्व का बड़ा हिस्सा बीच में ही गायब हो रहा है।
निगम प्रशासन का मानना है कि यदि निजी कंपनी के माध्यम से ऑनलाइन शुल्क वसूली प्रणाली लागू की जाती है, तो पारदर्शिता बढ़ेगी और भ्रष्टाचार पर प्रभावी नियंत्रण संभव होगा। साथ ही, शुल्क न देने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, जैसे रेहड़ियां जब्त करना, भी सुनिश्चित किया जाएगा।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन द्वारा उठाए गए ये कदम कितने प्रभावी साबित होते हैं और क्या वास्तव में शहर की तहबाजारी व्यवस्था में सुधार आ पाता है या नहीं।





