पंजाब विधानसभा में विश्वास मत पेश, भगवंत मान सरकार ने दिखाया शक्ति प्रदर्शन (Bhagwant Mann)
मजदूर दिवस पर विशेष सत्र में हंगामा, भाजपा का बहिष्कार; न्यूनतम मजदूरी बढ़ाने का प्रस्ताव भी पेश
Punjab:पंजाब की राजनीति में उस समय हलचल तेज हो गई जब मुख्यमंत्री (पंजाब विधानसभा )ने विधानसभा के विशेष सत्र में विश्वास मत पेश किया। अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस के मौके पर बुलाए गए इस सत्र का मुख्य उद्देश्य सरकार के बहुमत को साबित करना बताया गया।
सत्र की शुरुआत दिवंगत हस्तियों को श्रद्धांजलि के साथ हुई, जिसमें मजदूर संगठनों के प्रतिनिधियों को भी विशेष रूप से आमंत्रित किया गया।
व्हिप के बावजूद उपस्थिति पर नजर
Aam Aadmi Party की मुख्य सचेतक बलजिंदर कौर ने सभी 94 विधायकों के लिए अनिवार्य उपस्थिति का व्हिप जारी किया था। इसके बावजूद सदन में विधायकों की वास्तविक उपस्थिति चर्चा का विषय बनी रही। हाल ही में पार्टी के कुछ राज्यसभा सदस्यों के दल बदल के बाद इस विश्वास मत को सरकार के लिए अहम शक्ति परीक्षण माना जा रहा है।
सदन में नोकझोंक, बाहर भाजपा का प्रदर्शन
सत्र के दौरान मुख्यमंत्री भगवंत मान और कांग्रेस नेता Sukhpal Singh Khaira के बीच तीखी बहस देखने को मिली। वहीं Bharatiya Janata Party ने सत्र का बहिष्कार करते हुए विधानसभा परिसर के बाहर ‘जनता की विधानसभा’ लगाकर विरोध प्रदर्शन किया। भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए इस तरह के विशेष सत्र बुला रही है।
न्यूनतम मजदूरी बढ़ाने का प्रस्ताव
सत्र के दौरान सरकार ने राज्य के श्रमिकों की न्यूनतम दैनिक मजदूरी बढ़ाने का महत्वपूर्ण प्रस्ताव भी पेश किया। चर्चा में मजदूरों के योगदान को रेखांकित करते हुए उनके जीवन स्तर में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
प्रस्ताव में 1886 के ऐतिहासिक Haymarket Affair का उल्लेख किया गया, जहां मजदूरों ने काम के घंटे तय करने की मांग को लेकर संघर्ष किया था। साथ ही Guru Nanak Dev के ‘किरत करो’ सिद्धांत का हवाला देते हुए श्रम की गरिमा पर बल दिया गया।
विधानसभा में प्रस्तुत दस्तावेज के अनुसार, पंजाब में न्यूनतम मजदूरी की दरों में आखिरी बार वर्ष 2012 में संशोधन किया गया था। पिछले वर्षों में महंगाई भत्ते में वृद्धि हुई, लेकिन मूल वेतन में बदलाव नहीं हुआ। ऐसे में मजदूरी बढ़ाने का यह प्रस्ताव राज्य के लाखों श्रमिकों के लिए राहत भरा कदम माना जा रहा है।
सरकार के इस कदम को आगामी समय में श्रमिकों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने की दिशा में अहम पहल के रूप में देखा जा रहा है।





