पंजाब

पंजाब निकाय चुनाव पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, 50 वार्डों में फिर होगा चुनाव; 6 हफ्ते की डेडलाइन

पटियाला के 28 और मोगा के 22 वार्डों के चुनाव रद्द, नामांकन में गंभीर अनियमितताओं के बाद कोर्ट का आदेश

चंडीगढ़। पंजाब के स्थानीय निकाय चुनाव को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने पटियाला और मोगा जिलों के 50 वार्डों में हुए चुनावों को रद्द करते हुए नए सिरे से चुनाव कराने का आदेश दिया है। इन सभी वार्डों में दोबारा चुनाव की पूरी प्रक्रिया छह सप्ताह के भीतर पूरी करनी होगी। अदालत ने यह भी सुनिश्चित किया है कि नए चुनाव स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से कराए जाएं।

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने 28 सितंबर 2026 को यह आदेश पारित किया। लिखित आदेश बाद में सार्वजनिक किया गया। मामला वर्ष 2024 में हुए स्थानीय निकाय चुनावों के दौरान नामांकन प्रक्रिया में कथित हस्तक्षेप और उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने से रोकने के आरोपों से जुड़ा था।

जांच में सामने आईं चुनावी अनियमितताएं

सुप्रीम कोर्ट ने मार्च 2025 में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति निर्मलजीत कौर की अध्यक्षता में एक सदस्यीय फैक्ट-फाइंडिंग कमीशन गठित किया था। आयोग ने 46 दावों से संबंधित दस्तावेजों, शपथपत्रों, आधिकारिक जवाबों, वीडियो और सीसीटीवी फुटेज, तस्वीरों, मतदाता सूचियों तथा अधिकारियों और संबंधित पक्षों के बयानों की जांच की।

जांच में नामांकन प्रक्रिया में व्यापक स्तर पर बाधा डालने के आरोप सही पाए गए। रिपोर्ट के अनुसार कुछ मामलों में नामांकन पत्र छीने, फाड़े या नष्ट किए गए। इसके अलावा उम्मीदवारों के साथ मारपीट, उन्हें रोकने, हिरासत में लेने और धमकाने जैसी घटनाओं के भी साक्ष्य मिले।

पटियाला के 28 वार्डों में चुनाव रद्द

पटियाला जिले में कुल 28 वार्डों के चुनावों को प्रभावित माना गया। जांच में कई वार्डों में विपक्षी उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करने से रोकने या चुनाव मैदान में उतरने से बाहर करने की घटनाएं सामने आईं।

जांच में वार्ड नंबर 15 और 58 में फर्जी या एक से अधिक मतदान तथा मतदाताओं को डराने-धमकाने से जुड़े गंभीर साक्ष्य भी सामने आए। हालांकि आयोग ने यह निष्कर्ष नहीं दिया कि इन अनियमितताओं से उन वार्डों के अंतिम परिणाम निश्चित रूप से बदल गए थे।

मोगा में धर्मकोट और बाघापुराना के 22 वार्ड प्रभावित

मोगा जिले में धर्मकोट नगर परिषद के सात वार्ड और बाघापुराना नगर परिषद के सभी 15 वार्ड इस आदेश के दायरे में आए हैं।

धर्मकोट में कुछ उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करने से रोकने, दबाव में नामांकन वापस करवाने और नामांकन को गलत तरीके से खारिज करने जैसी अनियमितताएं जांच में सामने आईं। वहीं बाघापुराना के सभी 15 वार्डों में विपक्षी उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करने से व्यवस्थित तरीके से रोकने की बात आयोग की रिपोर्ट में सामने आई।

छह सप्ताह में पूरी होगी दोबारा चुनाव की प्रक्रिया

सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को निर्देश दिया है कि वह एक सप्ताह के भीतर एक निगरानी समिति गठित करें। समिति में हाई कोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश को शामिल किया जाएगा।

इसके अलावा वरिष्ठ अधिवक्ताओं को चुनाव पर्यवेक्षक के रूप में नियुक्त करने और चुनाव प्रक्रिया के विभिन्न चरणों की वीडियोग्राफी कराने के निर्देश दिए गए हैं। इसमें नामांकन, जांच-पड़ताल, चुनाव चिह्न आवंटन और मतदान की प्रक्रिया शामिल होगी।

शिकायतों पर निगरानी समिति करेगी कार्रवाई

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी व्यवस्था की है कि चुनाव प्रक्रिया में किसी तरह के हस्तक्षेप की शिकायत मिलने पर निगरानी समिति उसकी जांच करेगी। यदि मामला गंभीर पाया जाता है तो उसे पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष रखा जा सकेगा।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि नए चुनाव के परिणाम तभी घोषित किए जाएंगे, जब हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश निगरानी समिति की रिपोर्ट के आधार पर चुनाव प्रक्रिया के स्वतंत्र और निष्पक्ष होने से संतुष्ट होंगे।

पंजाब सरकार को नहीं था आयोग की सिफारिशों पर ऐतराज

सुप्रीम कोर्ट में पंजाब सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि राज्य सरकार को फैक्ट-फाइंडिंग कमीशन की सिफारिशों को स्वीकार किए जाने पर कोई आपत्ति नहीं है। इसके बाद अदालत ने आयोग की सिफारिशों को स्वीकार करते हुए 50 वार्डों में नए चुनाव कराने का निर्देश दिया।

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