पंजाब

बिग बैश लीग सट्टेबाजी केस में पुलिस के सबूत कमजोर पड़े, चंडीगढ़ कोर्ट ने तीन युवकों को किया बरी

अदालत में मैच का शेड्यूल और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य पेश नहीं कर सकी पुलिस; 2021 में सेक्टर-18 के मकान से हुई थी तीनों की गिरफ्तारी

चंडीगढ़। बिग बैश लीग के एक क्रिकेट मुकाबले पर ऑनलाइन सट्टेबाजी कराने के आरोप में गिरफ्तार किए गए तीन युवकों को चंडीगढ़ जिला अदालत ने बरी कर दिया है। अदालत ने यह फैसला अभियोजन पक्ष की ओर से आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए जाने के आधार पर सुनाया।

बरी किए गए युवकों की पहचान संजीव उर्फ सोनू, विक्रम सिंह और मनप्रीत सिंह के रूप में हुई है। पुलिस ने करीब पांच वर्ष पहले तीनों के खिलाफ गैंबलिंग एक्ट के तहत मामला दर्ज किया था।

2021 में सेक्टर-18 से हुई थी गिरफ्तारी

मामला 13 दिसंबर 2021 का है। सेक्टर-19 थाना पुलिस ने सेक्टर-18 स्थित एक मकान में कार्रवाई करते हुए तीनों युवकों को गिरफ्तार किया था। पुलिस का आरोप था कि वे ऑस्ट्रेलिया में आयोजित बिग बैश लीग के मेलबर्न और ब्रिस्बेन के बीच खेले जा रहे मुकाबले पर ऑनलाइन सट्टेबाजी करवा रहे थे।

पुलिस ने उस समय कार्रवाई के दौरान 47 हजार रुपये नकद, छह मोबाइल फोन, लैपटाप, प्रिंटर और अन्य सामान बरामद करने का दावा किया था।

कोर्ट में मैच होने का रिकॉर्ड साबित नहीं कर सकी पुलिस

मामले की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने पुलिस की जांच और प्रस्तुत साक्ष्यों पर सवाल उठाए। बचाव पक्ष की ओर से कहा गया कि जिस क्रिकेट मैच पर सट्टेबाजी का आरोप लगाया गया, उसके आयोजन का आधिकारिक शेड्यूल ही अदालत के समक्ष पेश नहीं किया गया।

बचाव पक्ष के अनुसार, जब पूरा मामला एक विशेष क्रिकेट मुकाबले पर सट्टेबाजी के आरोप पर आधारित था, तब उस मुकाबले से संबंधित आधिकारिक रिकॉर्ड को केस का हिस्सा बनाया जाना जरूरी था।

सुनवाई के दौरान जांच अधिकारी से भी इस संबंध में सवाल किए गए। पुलिस की ओर से मैच का शेड्यूल प्रस्तुत नहीं किए जाने की बात सामने आई।

इलेक्ट्रॉनिक सबूतों पर भी उठे सवाल

बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि पुलिस ने आरोपों को साबित करने के लिए आवश्यक इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य अदालत के सामने पर्याप्त रूप से पेश नहीं किए। केवल मोबाइल फोन, लैपटाप या अन्य सामान की बरामदगी से यह साबित नहीं होता कि आरोपी उसी मैच पर ऑनलाइन सट्टेबाजी कर रहे थे।

अदालत ने साक्ष्यों में सामने आई इन कमियों को महत्वपूर्ण माना। अभियोजन पक्ष आरोपियों और कथित सट्टेबाजी के बीच ऐसा पर्याप्त संबंध स्थापित नहीं कर सका, जिससे आरोप संदेह से परे साबित हो सकें।

सबूतों के अभाव में मिली राहत

अदालत के सामने पुलिस की ओर से की गई कार्रवाई और बरामदगी का दावा था, लेकिन आरोपों को साबित करने के लिए आवश्यक दस्तावेजी और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की कमी रही। इसी आधार पर अदालत ने संजीव उर्फ सोनू, विक्रम सिंह और मनप्रीत सिंह को बरी कर दिया।

यह मामला वर्ष 2021 में दर्ज हुआ था और करीब पांच साल बाद अदालत के फैसले के साथ तीनों आरोपितों को राहत मिली है।

Show More

यह भी जरुर पढ़ें !

Back to top button