पंजाब में पेड़ काटने पर अब सख्ती, एक पेड़ के बदले लगाने होंगे 10 पौधे
पंजाब विधानसभा ने वृक्ष संरक्षण विधेयक 2026 को दी मंजूरी, शहरी इलाकों में पेड़ काटने या नुकसान पहुंचाने से पहले लेनी होगी अनुमति
चंडीगढ़: पंजाब में पेड़ों की कटाई को लेकर अब नियम सख्त होने जा रहे हैं। पंजाब विधानसभा ने सोमवार को पंजाब वृक्ष संरक्षण विधेयक, 2026 पारित कर दिया। प्रस्तावित कानून के तहत शहरी क्षेत्रों में पेड़ काटने, हटाने या उन्हें नुकसान पहुंचाने के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत अनुमति लेना अनिवार्य होगा।
नए प्रावधानों का उद्देश्य प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में हरित क्षेत्र को सुरक्षित रखना, पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना और पेड़ों के संरक्षण को बढ़ावा देना है।
पेड़ काटने से पहले लेनी होगी अनुमति
विधेयक के अनुसार शहरी क्षेत्र में किसी पेड़ को काटने या हटाने के लिए संबंधित ट्री प्रोटेक्शन अधिकारी के पास निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन करना होगा। सामान्य मामलों में अधिकारी को आवेदन पर 30 दिन के भीतर निर्णय लेना होगा।
वहीं, सूखे, गिरे हुए या किसी व्यक्ति अथवा संपत्ति के लिए खतरा बने पेड़ों के मामलों में अधिकतम सात दिन के भीतर फैसला करना होगा। यदि इस अवधि में कोई निर्णय नहीं लिया जाता है तो अनुमति स्वत: प्रदान मानी जाएगी।
अधिकारी के फैसले के खिलाफ संबंधित व्यक्ति को 30 दिन के भीतर अपील करने का अधिकार भी दिया गया है।
एक पेड़ काटने पर लगाने होंगे 10 पौधे
विधेयक में पेड़ काटने की अनुमति मिलने की स्थिति में प्रतिपूरक पौधारोपण का प्रावधान किया गया है। इसके तहत एक पेड़ काटने वाले व्यक्ति या संस्था को उसके बदले 10 पौधे लगाने और उनकी देखभाल करने की जिम्मेदारी होगी।
यदि पेड़ 100 वर्ष से अधिक पुराना है और उसका ऐतिहासिक, सांस्कृतिक या धार्मिक महत्व है, तो उसे विरासत वृक्ष की श्रेणी में रखा जाएगा। ऐसे एक वृक्ष को हटाने की अनुमति मिलने पर 25 पौधे लगाने का प्रावधान है।
जमीन की उपलब्धता नहीं होने पर सक्षम अधिकारी वैकल्पिक स्थान पर पौधारोपण या निर्धारित राशि विशेष खाते में जमा कराने की अनुमति दे सकता है।
पेड़ को नुकसान पहुंचाने पर भी कार्रवाई
नए कानून में केवल पेड़ काटने पर ही नहीं, बल्कि उसे नुकसान पहुंचाने पर भी रोक लगाई गई है। पेड़ पर सीमेंट-कंक्रीट चढ़ाना, कील लगाना, तार या प्लास्टिक केबल बांधना, सजावटी लाइट या फ्लेक्स लगाना तथा जहरीले पदार्थों के जरिए पेड़ को नुकसान पहुंचाना प्रतिबंधित होगा।
पेड़ को नुकसान पहुंचाने पर प्रति पेड़ 2,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
बिना अनुमति पेड़ काटने पर जुर्माना
बिना अनुमति पेड़ काटने या हटाने पर पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति के साथ प्रति पेड़ 10,000 रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है।
वहीं, पौधारोपण की निर्धारित शर्त पूरी नहीं करने पर जुर्माने की राशि उल्लंघन की पुनरावृत्ति के साथ बढ़ेगी। पहली बार प्रति पेड़ 10,000 रुपये, दूसरी बार 35,000 रुपये और लगातार उल्लंघन की स्थिति में 50,000 रुपये प्रति पेड़ तक जुर्माना लगाया जा सकता है।
विरासत वृक्षों के लिए विशेष सुरक्षा
विरासत वृक्षों को लेकर कानून में विशेष प्रावधान किए गए हैं। सामान्य परिस्थितियों में ऐसे पेड़ों को काटने या हटाने की अनुमति नहीं होगी। गंभीर परिस्थितियों में ही राज्य सरकार की पूर्व अनुमति के बाद इन्हें हटाया जा सकेगा।
हालांकि बाढ़, तूफान या अन्य आपात परिस्थितियों में यदि किसी पेड़ को हटाना लोगों की जान या संपत्ति की सुरक्षा के लिए जरूरी हो, तो पहले से अनुमति लेना आवश्यक नहीं होगा। ऐसी स्थिति में संबंधित अधिकारी को 24 घंटे के भीतर सूचना देनी होगी।
कुछ प्रजातियों और क्षेत्रों को मिलेगी छूट
विधेयक के प्रावधान कुछ विशेष क्षेत्रों और पेड़ों पर लागू नहीं होंगे। वन क्षेत्र, वन्यजीव संरक्षित क्षेत्र, छावनी, रक्षा और अर्धसैनिक क्षेत्रों सहित कुछ स्थानों को इसके दायरे से बाहर रखा गया है।
इसी तरह बांस, यूकेलिप्टस, पॉपलर, सुबबूल और बर्मा नीम जैसी कुछ प्रजातियों को भी निर्धारित प्रावधानों के तहत छूट दी गई है।
नए कानून के जरिए पंजाब सरकार ने शहरी क्षेत्रों में पेड़ों की सुरक्षा और हरित क्षेत्र को बढ़ाने के लिए कटाई पर नियंत्रण तथा अनिवार्य पौधारोपण की व्यवस्था को मजबूत करने का प्रयास किया है।





