नगर निगम प्रवर्तन विंग में करोड़ों की अवैध वसूली का आरोप, विजिलेंस ने इंस्पेक्टरों और कर्मचारियों पर दर्ज की FIR
बेलदार की शिकायत के बाद विजिलेंस जांच में भ्रष्टाचार के आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए, रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं से हर साल 50-60 करोड़ रुपये की अवैध वसूली
जानकारी के अनुसार, मामले की शुरुआत 18 अगस्त 2025 को हुई थी, जब नगर निगम के प्रवर्तन विंग में कार्यरत बेलदार विकास कुमार ने ओएसडी विजिलेंस को शिकायत दी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि प्रवर्तन निरीक्षक, तत्कालीन सुपरिंटेंडेंट और अन्य कर्मचारी शहर के रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं एवं दुकानदारों से संगठित तरीके से अवैध वसूली करते थे।
शिकायतकर्ता ने दावा किया कि इस कथित अवैध वसूली के जरिए हर वर्ष लगभग 50 से 60 करोड़ रुपये तक की रकम एकत्र की जाती थी। शिकायत में यह भी कहा गया कि भ्रष्टाचार का खुलासा करने के लिए 12 अगस्त 2025 को सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया गया था, जिसके बाद कथित रूप से शिकायतकर्ता पर वीडियो से मुकरने का दबाव बनाया गया और उससे सादे कागजों पर हस्ताक्षर भी कराए गए।
शिकायत मिलने के बाद विजिलेंस ने नियमित जांच शुरू की। 16 जून 2026 को प्रस्तुत जांच रिपोर्ट में प्रवर्तन विंग के कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार और अवैध वसूली के आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए। इसके बाद मुख्य सतर्कता अधिकारी (Chief Vigilance Officer) की मंजूरी मिलने पर विजिलेंस थाना में एफआईआर दर्ज कर ली गई।
विजिलेंस अब यह पता लगाने में जुटी है कि कथित अवैध वसूली का नेटवर्क किन अधिकारियों और कर्मचारियों तक फैला था, वसूली की राशि किस तरह एकत्र की जाती थी और उसका लाभ किन लोगों तक पहुंचता था। जांच के दौरान वित्तीय लेनदेन, विभागीय रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों की भी विस्तार से पड़ताल की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।





