पंजाब

25 साल बाद आया हाईकोर्ट का बलात्कार के मामले में फैसला ,घटना के समय अपराधी नाबालिग होने के कारन घटाई गई सजा

दोषसिद्धि को बरकरार रखते हुए अदालत ने सजा की अवधी पहले भुगती गई सजा तक सीमित किया, उम्र और घटना की परिस्थति को मन गया अहम

चंडीगढ़: पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने हरियाणा के यमुनानगर से जुड़े करीब 25 वर्ष पुराने दुष्कर्म मामले (हाईकोर्ट )में अहम फैसला सुनाते हुए दोषी की सजा को पहले से भुगती गई अवधि तक सीमित कर दिया। हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया कि दोषसिद्धि बरकरार रहेगी और अपराध की गंभीरता को कम नहीं आंका जा सकता।

मामला वर्ष 1999 में दर्ज हुआ था। ट्रायल कोर्ट ने आरोपी शिव कुमार को दुष्कर्म का दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई थी। इसके बाद आरोपी ने फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी।

अपील के दौरान सामने आई उम्र से जुड़ी अहम जानकारी

सुनवाई के दौरान अदालत ने आरोपी की आयु का परीक्षण कराया। जांच में यह तथ्य सामने आया कि घटना के समय आरोपी किशोर था। इस आधार पर हाई कोर्ट ने कहा कि सजा तय करते समय आरोपी की उस समय की उम्र और मामले की विशेष परिस्थितियों को ध्यान में रखना आवश्यक है।

दोषसिद्धि में कोई बदलाव नहीं

हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि यौन अपराध गंभीर प्रकृति के होते हैं और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर दोषसिद्धि में हस्तक्षेप का कोई कारण नहीं बनता। इसलिए आरोपी की दोषसिद्धि बरकरार रखी गई, लेकिन सजा को घटाकर पहले से भुगती गई अवधि तक सीमित कर दिया गया।

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