पंजाब के मोगा के गांवों की अनोखी पहल: नशामुक्ति के लिए मुफ्त इलाज और स्वस्थ होने पर आर्थिक सहायता
मोगा के गांवों ने नशे के खिलाफ छेड़ी मुहिम, मुफ्त इलाज के साथ स्वस्थ होने पर 1100 रुपये की आर्थिक सहायता भी देंगे
मोगा: पंजाब में नशे के खिलाफ लड़ाई को मजबूत बनाने के लिए मोगा जिले के कुछ गांवों ने सामुदायिक स्तर पर नई पहल शुरू की है। एक ओर गांव तोता सिंह वाला की ग्राम पंचायत ने नशे के सेवन और बिक्री के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए प्रस्ताव पारित किया है, वहीं रण सिंह कलां गांव नशा छोड़ने वाले युवाओं को मुफ्त उपचार और आर्थिक सहायता देकर एक अलग उदाहरण पेश कर रहा है।
तोता सिंह वाला में एंटी-ड्रग कमेटी का गठन
मोगा जिले के तोता सिंह वाला गांव की ग्राम पंचायत और ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से नशे के खिलाफ कार्रवाई करने का फैसला लिया है। पंचायत का कहना है कि नशे की समस्या गांव के सामाजिक माहौल को प्रभावित कर रही है, इसलिए इसे रोकने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं।
गांव में एंटी-ड्रग कमेटी का गठन किया गया है। यह कमेटी नशे के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने और गांव में सुरक्षित वातावरण बनाए रखने की दिशा में काम करेगी। पंचायत ने सरकारी संस्थानों और सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा पर भी जोर दिया है।
रण सिंह कलां का नशामुक्ति मॉडल बना चर्चा का विषय
मोगा जिले का रण सिंह कलां गांव नशे के खिलाफ अपने सामाजिक अभियान को लेकर चर्चा में है। गांव में नशे की लत से बाहर आने के इच्छुक लोगों को उपचार के लिए आर्थिक बाधा का सामना न करना पड़े, इसके लिए निश्शुल्क इलाज की व्यवस्था की गई है।
इसके अलावा, उपचार के दौरान स्वस्थ होने और पोषण संबंधी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए पात्र व्यक्तियों को 1,100 रुपये की सहायता देने की पहल भी की गई है। इस प्रयास का उद्देश्य केवल आर्थिक मदद देना नहीं, बल्कि नशा छोड़ने वाले व्यक्ति को सामान्य और स्वस्थ जीवन की ओर वापस बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करना है।
पंचायत और ग्रामीणों की भागीदारी पर जोर
नशे की समस्या से निपटने के लिए केवल प्रशासनिक कार्रवाई ही नहीं, बल्कि परिवार, पंचायत और पूरे समाज की भागीदारी भी महत्वपूर्ण मानी जाती है। मोगा के इन गांवों की पहल इसी सामुदायिक मॉडल पर आधारित है, जहां ग्रामीण स्तर पर जागरूकता, उपचार और सहयोग को एक साथ जोड़ा जा रहा है।
पूरे पंजाब के लिए बन सकती है प्रेरणा
रण सिंह कलां और तोता सिंह वाला जैसे गांवों की पहल यह संदेश देती है कि नशे के खिलाफ लड़ाई में स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। पंचायतों द्वारा जागरूकता अभियान, उपचार में सहयोग और सामाजिक समर्थन जैसे प्रयास अन्य गांवों के लिए भी एक उपयोगी मॉडल बन सकते हैं।





