पंजाब

World No Tobacco Day 2026:मीठे फ्लेवर के पीछे छिपा निकोटीन का जाल, युवाओं को निशाना बना रहा तंबाकू उद्योग

स्ट्रॉबेरी, मैंगो और कैंडी फ्लेवर से बढ़ रहा आकर्षण, विशेषज्ञों ने दी गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों की चेतावनी

चंडीगढ़: विश्व तंबाकू निषेध दिवस(World No Tobacco Day) के अवसर पर स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने युवाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहे फ्लेवर्ड निकोटीन उत्पादों को लेकर गंभीर चिंता जताई है। विशेषज्ञों का कहना है कि तंबाकू और निकोटीन उद्योग अब पारंपरिक उत्पादों के बजाय आकर्षक फ्लेवर, आधुनिक डिजाइन और डिजिटल मार्केटिंग के जरिए नई पीढ़ी को अपनी ओर आकर्षित करने की कोशिश कर रहा है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इस वर्ष विश्व तंबाकू निषेध दिवस की थीम “आकर्षण का पर्दाफाश: निकोटीन और तंबाकू उत्पादों की लत के खिलाफ संघर्ष” रखी है। इसका उद्देश्य उन रणनीतियों को उजागर करना है जिनके माध्यम से युवाओं को तंबाकू और निकोटीन उत्पादों की ओर आकर्षित किया जाता है।

फ्लेवर बना रहे हैं लत का रास्ता आसान

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार बाजार में हजारों प्रकार के फ्लेवर उपलब्ध हैं, जिनमें फल, मिठाई और पेय पदार्थों से प्रेरित स्वाद शामिल हैं। ये फ्लेवर निकोटीन के कड़वे स्वाद को छिपाकर उत्पादों को अधिक आकर्षक बनाते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि किशोर और युवा वर्ग इन उत्पादों को कम हानिकारक समझकर प्रयोग करना शुरू कर देते हैं, जबकि वास्तविकता में निकोटीन तेजी से लत पैदा करने वाला पदार्थ है।

वेपिंग और ई-सिगरेट को लेकर भ्रम

कई युवाओं में यह धारणा बनी हुई है कि ई-सिगरेट या वेपिंग पारंपरिक धूम्रपान की तुलना में सुरक्षित विकल्प हैं। हालांकि सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इन उत्पादों में मौजूद रसायन फेफड़ों और श्वसन तंत्र को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं।

फ्लेवरिंग एजेंट और अन्य रासायनिक तत्व लंबे समय तक उपयोग करने पर फेफड़ों की कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकते हैं और विभिन्न श्वसन रोगों का खतरा बढ़ा सकते हैं।

मुंह के कैंसर और अन्य बीमारियों का खतरा

भारत में तंबाकू से जुड़े रोग अभी भी एक बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बने हुए हैं। गुटखा, खैनी, पान मसाला और अन्य तंबाकू उत्पादों के सेवन से मुंह, गले और फेफड़ों के कैंसर का जोखिम बढ़ जाता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि स्वाद और सुगंध के कारण इन उत्पादों की हानिकारक प्रकृति छिप जाती है, जिससे कई लोग इनके खतरे को कम आंकते हैं।

युवाओं में बढ़ती चुनौती

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार अधिकांश तंबाकू उपभोक्ता किशोरावस्था या युवावस्था में इसकी शुरुआत करते हैं। इसी कारण बच्चों और युवाओं को लक्षित करने वाली मार्केटिंग रणनीतियां चिंता का विषय बनी हुई हैं।

स्कूलों, कॉलेजों और सार्वजनिक स्थानों पर जागरूकता कार्यक्रमों की आवश्यकता पहले से अधिक महसूस की जा रही है।

भारत की सख्त नीति

भारत सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट के उत्पादन, बिक्री और विज्ञापन पर प्रतिबंध लगाकर निकोटीन उत्पादों के प्रसार को रोकने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि जागरूकता, कानूनों के सख्त पालन और परामर्श सेवाओं के विस्तार से तंबाकू नियंत्रण अभियान को और मजबूत किया जा सकता है।

तंबाकू छोड़ने वालों के लिए सहायता

विशेषज्ञों का कहना है कि तंबाकू की लत से बाहर निकलना चुनौतीपूर्ण हो सकता है, लेकिन सही परामर्श, परिवार के सहयोग और चिकित्सा सहायता से इसे छोड़ा जा सकता है। देशभर में कई परामर्श केंद्र और हेल्पलाइन सेवाएं उपलब्ध हैं, जहां लोग मुफ्त मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते हैं।

विश्व तंबाकू निषेध दिवस का संदेश स्पष्ट है—मीठे स्वाद और आकर्षक पैकेजिंग के पीछे छिपे स्वास्थ्य खतरों को पहचानना और युवाओं को निकोटीन की लत से बचाना समय की सबसे बड़ी जरूरत है।

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