एस डी एम जितेंद्र कुमार का ऐतिहासिक फैसला,कर्तव्य विहीन पुत्र संपत्ति से बेदखल ! स संपादक शिवाकांत पाठक,!

उपजिलाधिकारी जितेंद्र कुमार के सख्त लेकिन संवेदनशील फैसले ने उन ‘राजा बाबुओं’ को भी झुका दिया है जो अब तक अपने ही मां-बाप के सम्मान को ठुकरा चुके थे। माता-पिता के भरण-पोषण संबंधी मामलों में लगातार मिल रही शिकायतों पर निर्णायक रुख अपनाते हुए एस डी एम कोर्ट ने कई मामलों में बेटों को घर और संपत्ति से बेदखल करने के आदेश दिए। नतीजा जिन बच्चों ने अपने बुजुर्ग मां-बाप से मुंह मोड़ लिया था, वही अब वापस उनकी सेवा में लौट आए हैं।
मां-बाप का अपमान करने वाले ‘राजा बाबू’ हुए घर और संपत्ति से बेदखल
उपजिलाधिकारी जितेंद्र कुमार ने बताया कि बीते महीनों से ऐसे कई प्रकरण कोर्ट में लंबित थे जिनमें वृद्ध माता-पिता ने अपने बेटों पर अपमान, उपेक्षा और भरण-पोषण न करने का आरोप लगाया था। प्रशासनिक सख्ती और कानूनी आदेशों के बाद अब हालात बदलने लगे हैं। कोर्ट में हुए निर्णयों के अनुसार जो संतान अपने माता-पिता का सम्मान नहीं करेगी, उसे घर और संपत्ति दोनों से हाथ धोना पड़ेगा। फैसले के बाद हरिद्वार में कई परिवारों में फिर से अपनापन लौट आया है। बुजुर्गों ने एस डी एम के इस कदम की खुलकर सराहना की है। उनका कहना है कि इस कार्यवाही ने उन बच्चों को भी सचेत किया है जो अपने माता-पिता को बोझ समझने लगे थे। अब कई बेटे अपनी गलती मानते हुए माता-पिता की सेवा में जुट गए हैं।





