एलओसी पर बिछड़े रिश्तों का दर्द, नदी के पार से दी अंतिम विदाई
कुपवाड़ा के केरन गांव में भावुक दृश्य, परिजन दूर से ही कर पाए आखिरी दर्शन
Emotional story:कुपवाड़ा जिले के केरन गांव में नियंत्रण रेखा (एलओसी) के पास एक ऐसी घटना सामने आई, जिसने हर किसी को भावुक कर दिया। भारत और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के बीच बहने वाली नदी के एक किनारे पार्थिव शरीर रखा गया था, जबकि दूसरी ओर खड़े रिश्तेदार दूर से ही अपने प्रियजन को अंतिम विदाई दे रहे थे।
एलओसी पर स्थित केरन गांव किशनगंगा नदी से दो हिस्सों में बंटा हुआ है, जिसे पाकिस्तान की ओर नीलम नदी कहा जाता है। इसी गांव में मध्य कश्मीर के गांदरबल निवासी और नायब तहसीलदार रहे लियाकत अली खान का पार्थिव शरीर लाया गया था।
जानकारी के अनुसार, लियाकत अली खान का दिल का दौरा पड़ने के बाद श्रीनगर के एक अस्पताल में इलाज चल रहा था, जहां कुछ दिनों बाद उनका निधन हो गया। जब उनका पार्थिव शरीर केरन पहुंचा, तो इसकी खबर फैलते ही नदी के उस पार मौजूद रिश्तेदार अंतिम दर्शन के लिए इकट्ठा हो गए।
गांव के नंबरदार मजाज अहमद ने बताया कि उन्होंने अपने जीवन में ऐसा दर्दनाक दृश्य पहले कभी नहीं देखा। बताया गया कि मृतक के कई रिश्तेदार वर्ष उन्नीस सौ नब्बे के दशक में पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर चले गए थे और आज भी वहीं रहते हैं। सीमाओं के कारण वे अपने परिजन के पास नहीं आ सके।
ग्रामीणों के अनुसार, अंतिम संस्कार से पहले पार्थिव शरीर को कुछ समय के लिए नदी किनारे रखा गया, ताकि दूसरी ओर खड़े रिश्तेदार दूर से ही अंतिम दर्शन कर सकें। उस दौरान दोनों ओर मौजूद लोग भावुक होकर रोते रहे और यह दृश्य हर किसी को झकझोर गया।
स्थानीय लोगों ने कहा कि यह घटना बिछड़े परिवारों के दर्द को बयां करती है, जहां सीमाओं की मजबूरी के कारण लोग अपने ही अपनों को पास से अलविदा नहीं कह पाते। यह मानवीय संवेदनाओं से जुड़ा एक ऐसा दृश्य था, जिसने हर किसी की आंखें नम कर दीं।





