दिनकर जयंती की पूर्व संध्या पर लालगंज में गूंजा कविता का शंखनाद ओज, हास्य-व्यंग्य और संवेदनाओं से सजी कविताओं पर देर रात तक बजती रहीं तालियां !
लालगंज -: ( रायबरेली ) – : राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की जयंती की पूर्व संध्या पर मंगलवार को लालगंज का रामलीला मैदान साहित्य, संस्कृति और राष्ट्रचेतना से सराबोर हो उठा। श्री फाउंडेशन के बैनर तले आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में देश के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे कवियों ने ओजपूर्ण, हास्य-व्यंग्य, संवेदनशील एवं सामाजिक सरोकारों से जुड़ी रचनाओं से ऐसा समां बांधा कि देर रात तक श्रोता अपनी जगहों पर जमे रहे और हर प्रभावशाली पंक्ति पर तालियों की गड़गड़ाहट से कवियों का उत्साह बढ़ाते रहे।
कार्यक्रम में राष्ट्रकवि दिनकर की साहित्यिक विरासत को श्रद्धापूर्वक याद किया गया। वक्ताओं ने कहा कि दिनकर की लेखनी ने साहित्य को केवल शब्द नहीं दिए, बल्कि राष्ट्रचेतना, स्वाभिमान, संघर्ष और सामाजिक जागरण की आवाज भी दी। उनकी रचनाएं आज भी नई पीढ़ी को साहस, संघर्ष और राष्ट्रप्रेम की प्रेरणा देती हैं। कवि सम्मेलन में स्वयं श्रीवास्तव, प्रियांशु गजेन्द्र, अखिलेश द्विवेदी, जगजीवन मिश्रा ‘दिनेश प्रियजन’, हसन रायबरेली, डॉ. चेतना पांडेय, अंजनी कुमार सिंह, शशि श्रेया, अतुल बाजपेयी और नीरज पांडेय सहित अनेक कवियों ने काव्य पाठ किया। मंच पर कभी हास्य के फव्वारे छूटे, कभी व्यंग्य ने सामाजिक विसंगतियों पर चोट की तो कभी संवेदनाओं से भरी रचनाओं ने श्रोताओं को भावुक कर दिया।
साहित्य के साथ समाजसेवा का संदेश
कार्यक्रम के आयोजक एवं समाजसेवी मनोज द्विवेदी ‘दादा श्री’ तथा सरेनी विधानसभा क्षेत्र की पूर्व कांग्रेस प्रत्याशी एवं समाजसेविका श्रीमती सुधा द्विवेदी ने कहा कि साहित्य समाज का आईना है और कवि समाज की चेतना को शब्द देने का कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि दिनकर जयंती की पूर्व संध्या पर आयोजित यह कवि सम्मेलन केवल मनोरंजन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि साहित्य, संस्कृति और सामाजिक चेतना को मजबूत करने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता है कि गांव-गांव और युवा पीढ़ी तक साहित्य की पहुंच बने, ताकि नई पीढ़ी अपनी भाषा, संस्कृति और गौरवशाली साहित्यिक परंपरा से जुड़ सके।
कार्यक्रम में प्रेमा देवी स्मारक जन सेवा समिति, लालगंज सनातन संस्कार फाउंडेशन, श्री बाल्हेस्वर सेवा समिति, मां पार्वती सेवा समिति, राना बेनी माधव बक्स सिंह स्मारक समिति, आदिशक्ति मां मुक्ता सुरेठा सेवा संस्थान, श्री सरस्वती नाम साहित्य परिषद, बैसवारा साधना समिति, काल्यालोक साहित्यिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्थान, पंचवटी विकास समिति, किसलय साहित्यिक संस्था, बालेश्वर सेवा समिति, श्री जनकल्याण समिति, ओम शिवशक्ति मानव सेवा समिति और स्वर्णकार सेवा समिति सहित अनेक संस्थाओं के प्रतिनिधियों की सहभागिता रही।
विभिन्न उद्योग एवं व्यापार प्रतिनिधि मंडलों के साथ श्री दशहरा रामलीला कमेटी, बैसवारा चेतना संघ, बैसवारा साहित्यिक एवं सामाजिक संस्था, शहीद स्मारक समिति और युवा शांति एकता संगठन के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे। इस दौरान साहित्य, संस्कृति और समाजसेवा के क्षेत्र में सक्रिय संस्थाओं एवं प्रतिनिधियों को सम्मानित किया गया। दिनकर जयंती की पूर्व संध्या पर सजा यह साहित्यिक मंच देर रात तक कविता, तालियों और साहित्यिक चेतना से गूंजता रहा। आयोजन ने यह संदेश दिया कि साहित्य आज भी समाज को जोड़ने, जगाने और नई दिशा देने की ताकत रखता है।


