लखनऊ

गांव स्वावलम्बन के आधार, यदि गांव स्वावलम्बी होंगे, तो  हम आत्मनिर्भरता की इकाई गठित कर पाएंगे : मुख्यमंत्री

लखनऊ :- ( 29 मई, 2026 ) -: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने कहा कि गांव स्वावलम्बन के आधार हैं। यदि गांव स्वावलम्बी होंगे, तो हम आत्मनिर्भरता की इकाई गठित कर पाएंगे। ताजोपुर गांव में बने हॉस्पिटल, सैनिक पब्लिक स्कूल, फार्मेसी कॉलेज, नर्सिंग कॉलेज तथा आई0टी0आई0 केवल एक संस्थान नहीं, बल्कि प्रदेश के लिए निवेश है। यह इस क्षेत्र के आर्थिक स्वावलम्बन की आधारशिला है। इनसे कई लोगों को रोजगार प्राप्त हो रहा है। इन संस्थानों में विद्यार्थियों को उत्तम शिक्षा मिल रही है। उन्हें जीवन में आगे बढ़ने के लिए नई प्रेरणा मिल रही है। इन संस्थानों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राएं तथा कार्य करने वाले कार्यकर्ता मऊ जनपद को नई पहचान दिला सकते हैं।
मुख्यमंत्री जी आज ताजोपुर, जनपद मऊ में ग्रामीण सैनिक हॉस्पिटल का उद्घाटन करने के उपरान्त आयोजित कार्यक्रम में अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। मुख्यमंत्री जी ने चिकित्सालय के विभिन्न वॉर्डां और तकनीकी इकाईयों का स्थलीय निरीक्षण किया तथा वहां उपलब्ध जीवनरक्षक उपकरणों की कार्यप्रणाली के बारे में जानकारी प्राप्त की। कार्यक्रम के उपरान्त मुख्यमंत्री जी ने ब्रिगेडियर (सेवानिवृत्त) डॉ0 पी0एन0 सिंह की दिवंगत पत्नी श्रीमती सुषमा सिंह की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।
                मुख्यमंत्री जी ने कहा कि डबल इंजन सरकार के नेतृत्व में प्रदेश में ग्रामीण आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सामूहिक प्रयास किये जा रहे हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने देशवासियों से कहा था कि भारत तभी विकसित होगा, जब प्रदेश विकसित होगा। प्रदेश तभी विकसित होगा, जब जनपद विकसित हांगे और जनपद तभी विकसित होगा, जब गांव विकसित होंगे। गांव तभी विकसित होगा, जब इस प्रकार के संस्थान और आत्मनिर्भरता के केन्द्र खुलेंगे। यह विकसित भारत की संकल्पना की वह महत्वपूर्ण कड़ी है, जिसे विगत डेढ़ दशक से डॉ0 पी0एन0 सिंह अपने गांव में स्थापित कर रहे हैं। उनका प्रयास अभिनंदनीय, सराहनीय और अन्य लोगों के लिए प्रेरणादायक है।
             मुख्यमंत्री जी ने कहा कि आज से 09 वर्ष पूर्व मऊ से लखनऊ जाने में 07 से 08 घण्टे लगते थे, जबकि आज मात्र 03 घण्टे लगते हैं। अब मऊ से डेढ़ घण्टे में वाराणसी तथा 01 घण्टे में गोरखपुर पहुंचा जा सकता है। जनपद की कनेक्टिविटी बेहतर हुई है। रोड कनेक्टिविटी तथा रेल कनेक्टिविटी बढ़ी है। पहले गरीबों को मिलने वाली सुविधाएं उन तक नहीं पहुंच पाती थीं। आज शासन की योजनाओं का लाभ प्रत्येक गरीब को मिल रहा है। 16 करोड़ लोगों को निःशुल्क राशन की सुविधा का लाभ प्राप्त हो रहा है। प्रदेश में 65 लाख गरीबों को एक-एक आवास की सुविधा का लाभ मिला है। 01 करोड़ 06 लाख परिवारों को 12,000 रुपये प्रतिवर्ष वृद्धावस्था, निराश्रित महिला और दिव्यांगजन पेंशन सुविधा का लाभ प्रदान किया जा रहा है। प्रत्येक गरीब के घर में प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के अन्तर्गत निःशुल्क गैस कनेक्शन का लाभ पहुंचा है।
                   मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रदेश में इन्वेस्टमेन्ट आने के साथ एम्प्लॉयमेन्ट का भी सृजन हुआ है। अब उत्तर प्रदेश के युवाओं को नौकरी के लिए बाहर नहीं जाना पड़ता। विगत 09 वर्षां में 09 लाख से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी दी गयी हैं। उत्तर प्रदेश में प्रत्येक स्तर पर स्पोर्ट्स के लिए सुविधाएं उपलब्ध करायी गयी हैं। यहां अच्छे-अच्छे संस्थान तैयार हो रहे हैं। मऊ के ताजोपुर गांव में इण्टीग्रेटेड कैम्पस वाले संस्थान की स्थापना शानदार व अभिनन्दनीय प्रयास है, जहां पब्लिक स्कूल, हॉस्पिटल, आई0टी0आई0, नर्सिंग कॉलेज और फार्मेसी कॉलेज एक ही कैम्पस में है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि आज देश व प्रदेश बदल रहा है। वर्ष, 2017 के पूर्व युवाओं के समक्ष पहचान का संकट था। यहां का युवा जब बाहर जाता था, तो अपनी पहचान छुपाता था। आज उत्तर प्रदेश का नाम सुनकर लोगों के चेहरे पर चमक आ जाती है। विगत 09 वर्षों में डबल इंजन सरकार ने निरन्तर प्रदेश के हित में कार्य किया है। अपराध और भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेन्स की नीति अपनायी है। सरकार बिना भेदभाव शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम पायदान पर बैठे हुए व्यक्ति तक पहुंचा रही है।
                   मुख्यमंत्री जी ने कहा कि देश की आजादी से लेकर वर्ष 2017 तक प्रदेश में सरकारी तथा निजी क्षेत्र के मात्र 41 मेडिकल कॉलेज बन पाए थे। डबल इंजन सरकार ने विगत 09 वर्षां में इस संख्या को बढ़ाकर 83 तक पहुंचाया है। आज प्रत्येक मेडिकल कॉलेज के साथ नर्सिंग कॉलेज और पैरामेडिकल कॉलेज भी है। आज प्रत्येक संस्थान के साथ कुछ ऐसी संस्थाएं भी हैं, जो रोजगार देने के साथ-साथ स्वावलम्बन का आधार बनकर स्वास्थ्य सेवाओं में क्रांतिकारी परिवर्तन लाने का कार्य कर रही हैं।
                          मुख्यमंत्री जी ने कहा कि जब देश आजादी के 75 वर्ष पूर्ण कर अमृत महोत्सव वर्ष मना रहा था, तब प्रधानमंत्री जी ने देशवासियों से कहा था कि हमें यहीं पर चैन से नहीं सोना है। हमें 75 वर्ष के कालखण्ड का आत्मवलोकन करना है। हमें सोचना होगा कि जब देश आजादी के 100 वर्ष पूरा कर रहा होगा, तो आजादी के शताब्दी महोत्सव के समय हम कैसा भारत चाहते हैं, उस संकल्प के साथ आज से ही जुड़ जाएं। इसके लिए प्रत्येक भारतीय को पंचप्रण लेने पड़ेंगे। यह पंचप्रण प्रत्येक भारतीय के लिए आवश्यक है।
                    पंचप्रण के अन्तर्गत हमें विरासत का सम्मान करना है। पूर्वजों की थाती हमारी विरासत है। हम श्रीराम, श्रीकृष्ण, महाराणा प्रताप, छत्रपति शिवाजी महाराज, गुरु गोबिन्द सिंह जी महाराज, झांसी की रानी लक्ष्मीबाई, स्वामी सहजानन्द और पंडित श्याम नारायण पाण्डेय के वंशज हैं। उनके प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करने के लिए हमें कार्य करना है। दूसरा प्रण है ‘गुलामी की हर सोच से मुक्ति’। हमें गुलामी के उन अंशों को सर्वथा समाप्त करना है, जिनसे विदेशीपन या गुलामी का आभास होता हो।
                प्रधानमंत्री जी ने पंचप्रण के अन्तर्गत देशवासियों से ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ के लिए कार्य करने का आह्वान भी किया है। ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ तब बनेगा, जब बिना भेदभाव, जाति, क्षेत्र और भाषा के आधार पर विभाजित करने वाली ताकतों के खिलाफ प्रत्येक भारतवासी खड़ा होगा। जातिवाद और छुआछूत भारतीय समाज कोढ़ है, अतः इसे समाप्त करें। इसने देश को बर्बाद तथा गुलाम किया है। इसे समाप्त किए बगैर देश की प्रगति नहीं हो सकती। चौथा प्रण है कि प्रत्येक भारतवासी अपने सैनिकों का सम्मान करें। जब माइनस डिग्री टेम्परेचर में सियाचीन की पहाड़ियों पर सैनिक जागते हैं, तभी हम चैन की नींद सोते हैं। जब 50 डिग्री टेम्परेचर की झुलसती हुई गर्मी में राजस्थान के रेगिस्तान में भारत की सीमा की रक्षा करते हुए सैनिक दिन-रात पहरेदारी करते हैं और दुश्मन से बचाते हैं, तभी हम चैन की नींद सोते हैं।
जब पुलिस कर्मी दिन-रात गश्त लगाते हैं और गुण्डों, माफियाओं तथा अपराधियों से सुरक्षा करते हैं, तभी हम चैन की नींद सोते हैं। सैनिकों के प्रति यही सम्मान का भाव विकास का आधार बनता है। प्रधानमंत्री जी ने पांचवें प्रण के अन्तर्गत नागरिक कर्तव्य के बारे में कहा है। प्रत्येक व्यक्ति अपने-अपने कर्तव्यों को समझें।
                   मुख्यमंत्री जी ने कहा कि जनपद मऊ भारत की समर गाथा को हल्दीघाटी महाकाव्य के रूप में व्यक्त करने वाले महान साहित्यकार पं0 श्याम नारायण पाण्डेय, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाई प्रदान करने वाले संत व समाजसेवी स्वामी सहजानन्द सरस्वती, देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले वीर शहीदों तथा पूर्व केन्द्रीय मंत्री स्व0 श्री कल्पनाथ राय की पावन धरा है। यहां देवाधिदेव महादेव की कृपा बरसती है।  मुख्यमंत्री जी ने कहा कि जब हम अपने ईष्ट की पूजा करते हैं, तो उसके पीछे का उद्देश्य ’शिवो भूत्वा शिवं यजेत’ होता है। अर्थात हम जिसकी पूजा करते हैं, उसके अनुरूप बन जाएं।
                   हम सभी मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम को अपना ईष्ट मानते हैं। प्रभु श्रीराम हमारे लिए जीवन की मर्यादा, प्रेरणा तथा आदर्श हैं। प्रत्येक सच्चा भारतीय अपने जीवन में सबसे आनन्ददायक वह क्षण मानता है, जब अयोध्या में भगवान श्रीराम मन्दिर का निर्माण और प्राण-प्रतिष्ठा का कार्यक्रम प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के कर-कमलों से सम्पन्न हुआ था। प्रत्येक व्यक्ति मानता है कि जो कार्य 500 वर्षां में कोई नहीं कर पाया, वह प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में सम्भव हो पाया। अयोध्याधाम में प्रभु श्रीराम पुनः विराजमान हो गये हैं।
                    लंका में विजय प्राप्त करने के उपरान्त प्रभु श्रीराम ने लक्ष्मण से कहा कि ‘निसिचर हीन करउँ महि भुज उठाइ पन कीन्ह’। अर्थात चित्रकूट से निकलने के बाद हमने इस धरती को राक्षस विहीन करने का संकल्प लिया था, वह कार्य सम्पन्न हो गया है। चौदह वर्ष का वनवास भी समाप्त हो गया है। अब हम अयोध्या चलें। लक्ष्मण जी ने कहा कि हमारा राजमहल सोने का है, किन्तु यहां पूरी लंका ही सोने की बनी हुई है। हम कुछ दिन यहां बिताएं, तो भगवान श्रीराम ने कहा ‘अपि स्वर्णमयी लंका न में लक्ष्मण रोचते, जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी’ अर्थात् हे लक्ष्मण! स्वर्ण से बनी लंका भी मुझे नहीं भाती, जननी और जन्मभूमि से बढ़कर कुछ भी श्रेष्ठ नहीं हैं।
लक्ष्मण, हमें लंका के मोह में नहीं पड़ना है। मैं पहले ही यहां का राजा विभीषण को बना चुका हूँ। विभीषण का राज्याभिषेक करने के उपरान्त हम लंका चलें। प्रभु श्रीराम के इन्हीं आदर्शां को मूर्त रूप देते हुए डॉ0 पी0एन0 सिंह ने अपनी जन्मभूमि पर एक ग्रामीण सैनिक हॉस्पिटल, सैनिक पब्लिक स्कूल, सैनिक फार्मेसी कॉलेज तथा सैनिक नर्सिंग कॉलेज एवं आई0टी0आई0 का निर्माण कर जन्मभूमि के ऋण से उऋण होने का अभिनव प्रयास किया है। यदि प्रत्येक पढ़ा-लिखा व्यक्ति यह कार्य कर ले, तो भारत को फिर से वैभवशाली बनने से कोई नहीं रोक सकता। यही हमारे जीवन का कर्तव्य होना चाहिए।
                    मुख्यमंत्री जी ने कहा कि ब्रिगेडियर (सेवानिवृत्त) डॉ0 पी0एन0 सिंह ने देश की रक्षा के लिए सेना के विभिन्न संस्थानों से अनुभव प्राप्त किया। उन्होंने अपने गांव के माध्यम से जनपदवासियों की सेवा करने के लिए ग्रामीण सैन्य हॉस्पिटल, ग्रामीण औद्योगिक संस्थान के रूप में आई0टी0आई0, नर्सिंग व फार्मेसी कॉलेज तथा सैनिक पब्लिक स्कूल स्थापित कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाई प्रदान की। इनके द्वारा अनेक रचनात्मक कार्य किये जा रहे हैं। डॉ0 पी0एन0 सिंह0 ने भारतीय सेना में आर्मी मेडिकल कोर के रूप में कार्य करते हुए तथा अवकाश ग्रहण करने के उपरान्त विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों में सेवा देने के उपरान्त अपने गांव में आकर ग्रामीण स्वावलम्बन का एक अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया है। इन सभी कार्यां के लिए मुख्यमंत्री जी ने डॉ0 पी0एन0 सिंह का आभार व्यक्त किया।
                  कार्यक्रम को नगर विकास मंत्री श्री अरविन्द कुमार शर्मा तथा ब्रिगेडियर (सेवानिवृत्त) डॉ0 पी0एन0 सिंह ने भी सम्बोधित किया।  इस अवसर पर कारागार मंत्री श्री दारा सिंह चौहान, परिवहन मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री दयाशंकर सिंह सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
——-

Show More

यह भी जरुर पढ़ें !

Back to top button