स्वर्ण भारत परिवार ट्रस्ट द्वारा “राष्ट्रीय खेल रत्न सम्मान 2026” में 70 दिव्यांग पैरालंपिक खिलाड़ियों का भव्य सम्मान !

लखनऊ -: Indira Gandhi Pratishthan के मार्स ऑडिटोरियम में आयोजित भव्य समारोह में स्वर्ण भारत परिवार ट्रस्ट एवं स्वर्ण भारत दिव्यांग बोर्ड द्वारा देशभर के दिव्यांग एवं पैरालंपिक खिलाड़ियों को “राष्ट्रीय खेल रत्न सम्मान 2026” से सम्मानित किया गया। यह आयोजन समाज में दिव्यांग खिलाड़ियों के संघर्ष, साहस, आत्मबल एवं खेल उपलब्धियों को सम्मान देने हेतु आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. सतेन्द्र कुशवाहा (Founder – TV 24 Network) उपस्थित रहे। इस अवसर पर एमएलसी अवनीश सिंह पटेल, Brainfra IAS के संस्थापक डॉ. अतुल शाक्य, विभिन्न शिक्षाविद, समाजसेवी एवं गणमान्य अतिथि मौजूद रहे। कार्यक्रम का आयोजन Brainfra IAS द्वारा किया गया, जबकि इसका सहयोग स्वर्ण भारत परिवार ट्रस्ट एवं Global Education Forum द्वारा प्रदान किया गया।
समारोह में कुल 70 दिव्यांग पैरालंपिक खिलाड़ियों एवं खेल प्रतिभाओं को सम्मानित किया गया। खिलाड़ियों को प्रशस्ति पत्र एवं सम्मान देकर उनके संघर्ष और उपलब्धियों को सराहा गया। समारोह में उपस्थित सभी अतिथियों ने खिलाड़ियों के जज्बे को सलाम करते हुए कहा कि ये खिलाड़ी पूरे देश के लिए प्रेरणा हैं।
इस अवसर पर स्वर्ण भारत परिवार ट्रस्ट के अध्यक्ष एडवोकेट पीयूष पंडित ने खिलाड़ियों को संबोधित करते हुए कहा: “आपने यह सिद्ध किया है कि सीमाएँ शरीर में नहीं, बल्कि सोच में होती हैं। आपके संघर्ष, समर्पण एवं निरंतर प्रयासों ने समाज को नई प्रेरणा दी है। हम आपका सम्मान देश के वीर जवानों की तरह करते हैं।” उन्होंने आगे कहा कि स्वर्ण भारत परिवार ट्रस्ट एवं उसका दिव्यांग कल्याण बोर्ड निरंतर दिव्यांगजनों के उत्थान, खेल प्रतिभाओं के प्रोत्साहन, शिक्षा, सामाजिक सहयोग एवं सम्मान के क्षेत्र में कार्य कर रहा है। संस्था का उद्देश्य दिव्यांग प्रतिभाओं को समाज की मुख्यधारा में सम्मानपूर्वक आगे बढ़ाना है।
कार्यक्रम का विशेष आकर्षण तब बना जब एडवोकेट पीयूष पंडित ने सभी खिलाड़ियों के साथ मंच पर स्वयं सेल्फी लेकर आत्मीय जुड़ाव व्यक्त किया। यह दृश्य पूरे सभागार में उत्साह एवं भावनाओं से भर गया और खिलाड़ियों ने भी इस सम्मान के लिए आयोजकों के प्रति आभार व्यक्त किया। सम्मान समारोह में खिलाड़ियों को दिए गए प्रमाण पत्र में यह संदेश विशेष रूप से अंकित रहा कि: “आपने अपने अदम्य साहस, अटूट आत्मविश्वास एवं अथक दृढ़ इच्छाशक्ति के बल पर खेल जगत में वह मुकाम हासिल किया है, जो केवल उपलब्धि नहीं बल्कि मानव आत्मा की अजेय शक्ति का जीवंत प्रमाण है।”
