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Dera Sacha Sauda News: विज्ञापन विवाद में हाई कोर्ट से राहत, राजकुमार ने वापस ली अवमानना याचिका

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता को कानून के तहत वैकल्पिक उपाय अपनाने की छूट दी। डेरा सच्चा सौदा के विज्ञापनों से जुड़े मामले में अदालत पहले ही स्वतः संज्ञान लेकर अलग कार्यवाही शुरू कर चुकी है।

चंडीगढ़। डेरा सच्चा सौदा से जुड़े समाचार पत्रों में प्रकाशित विज्ञापनों के मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने अवमानना याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी है। फतेहाबाद निवासी राजकुमार की ओर से दायर इस याचिका को न्यायमूर्ति दीपक मनचंदा की पीठ ने याचिकाकर्ता के अनुरोध पर वापस लिया हुआ मानकर खारिज कर दिया। अदालत ने कानून के तहत उपलब्ध होने पर उचित वैकल्पिक उपाय अपनाने की छूट भी दी।

सुनवाई के दौरान प्रतिवादी पक्ष ने अदालत को बताया कि याचिका में उठाए गए मुद्दे पर हाई कोर्ट की खंडपीठ पहले ही स्वतः संज्ञान लेकर अलग कार्यवाही शुरू कर चुकी है। यह मामला अभी विचाराधीन है। इसके बाद अदालत ने याचिकाकर्ता के वकील से वर्तमान याचिका की सुनवाई योग्य होने के संबंध में पक्ष रखने को कहा।

इस पर राजकुमार की ओर से याचिका वापस लेने और कानून के अनुसार अन्य उचित उपाय अपनाने की स्वतंत्रता देने का अनुरोध किया गया। अदालत ने इस मांग को स्वीकार कर लिया।

विज्ञापनों को लेकर क्या है पूरा मामला?

यह अवमानना याचिका डेरा सच्चा सौदा, उसके प्रबंधक और संबंधित समाचार पत्रों के खिलाफ दायर की गई थी। मामला समाचार पत्रों में प्रकाशित विज्ञापनों की सामग्री से जुड़ा है, जिस पर न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की आशंका के संबंध में सवाल उठाए गए थे।

हाई कोर्ट ने 16 सितंबर को पारित आदेश में विज्ञापनों की सामग्री पर प्रारंभिक चिंता जताई थी। अदालत के अनुसार, लंबित अपीलों और मुकदमों के दौरान न्यायपालिका के खिलाफ साजिश के आरोप लगाने वाली सामग्री और सार्वजनिक अपीलें न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास हो सकती हैं। हालांकि, ये टिप्पणियां मामले के प्रारंभिक मूल्यांकन से संबंधित थीं।

हाई कोर्ट ने पहले ही लिया था स्वतः संज्ञान

इस प्रकरण में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट पहले ही स्वतः संज्ञान लेकर संबंधित पक्षों और मीडिया संस्थानों को नोटिस जारी कर चुका है। अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 215 और न्यायालय की अवमानना अधिनियम, 1971 के संबंधित प्रावधानों के तहत आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने का निर्देश दिया था।

यह अलग कार्यवाही अभी विचाराधीन है। ऐसे में राजकुमार की व्यक्तिगत अवमानना याचिका वापस होने का अर्थ यह नहीं है कि विज्ञापन विवाद से जुड़ी पूरी न्यायिक कार्यवाही समाप्त हो गई है।

याचिका वापस लेने की मिली अनुमति

हाई कोर्ट ने राजकुमार को याचिका वापस लेने की अनुमति देते हुए कानून के तहत उपलब्ध उचित उपाय अपनाने की छूट प्रदान की। अदालत का आदेश वर्तमान याचिका के निस्तारण से संबंधित है, जबकि विज्ञापनों की सामग्री को लेकर स्वतः संज्ञान वाला मामला अलग से जारी है।

इसलिए इस आदेश को डेरा सच्चा सौदा के खिलाफ चल रही सभी कार्यवाहियों में अंतिम राहत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

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