हरियाणा में बारिश का खतरा, मंडियों में 35 लाख क्विंटल धान; धीमी खरीद और उठान से किसानों की बढ़ी चिंता
प्रदेश की मंडियों में अब तक सिर्फ करीब 30 प्रतिशत धान की खरीद, उठान पांच प्रतिशत के आसपास
पानीपत। हरियाणा में मौसम बदलने की संभावना के बीच मंडियों में खुले में पड़ी धान की फसल को लेकर किसानों की चिंता बढ़ गई है। प्रदेश की मंडियों में करीब 35 लाख क्विंटल धान मौजूद है, लेकिन खरीद और उठान की गति धीमी होने के कारण किसानों को फसल खराब होने का डर सता रहा है।
मंगलवार रात यमुनानगर में हुई बूंदाबांदी के बाद किसानों की चिंता और बढ़ गई। मौसम विभाग ने सात अक्टूबर की रात से मौसम में बदलाव और बारिश की संभावना जताई है। ऐसे में यदि बारिश होती है तो खुले में रखी धान की फसल को नुकसान पहुंचने की आशंका है।
7.35 लाख मीट्रिक टन धान की आवक
सरकारी आंकड़ों के अनुसार मंगलवार तक प्रदेश की मंडियों में करीब 7.35 लाख मीट्रिक टन धान पहुंच चुका था। इसमें से लगभग 2.57 लाख मीट्रिक टन की खरीद हो चुकी है, जबकि करीब 27,497 मीट्रिक टन धान का उठान किया गया है।
किसानों का आरोप है कि खरीद और उठान की धीमी प्रक्रिया के कारण मंडियों में फसल जमा होती जा रही है। कई जगह किसानों ने व्यवस्था के विरोध में प्रदर्शन भी किया।
कैथल में नमी जांच को लेकर विवाद
कैथल के गुहला-चीका क्षेत्र में धान की खरीद को लेकर विवाद सामने आया। किसानों ने आरोप लगाया कि मशीन में नमी की मात्रा वास्तविकता से अधिक दिखाई गई, जिसके कारण उनकी फसल कम कीमत पर खरीदी गई।
किसानों के अनुसार जिस धान में नमी करीब 17 प्रतिशत थी, मशीन में उसे 22 से 23 प्रतिशत तक दिखाया गया। इसके बाद धान को कथित तौर पर निर्धारित मूल्य से कम दर पर खरीदने का आरोप लगाया गया।
मामले की सूचना मिलने पर एसडीएम मनीष कुमार ने अरनोली स्थित एक राइस मिल का निरीक्षण किया। जांच के दौरान मिल में 652 क्विंटल पीआर धान अतिरिक्त मिलने की जानकारी सामने आई। प्रशासन ने सील से छेड़छाड़ वाली मशीन को जब्त कर लिया और मिल संचालक से 80,300 रुपये का जुर्माना वसूला गया।
किसानों ने डीसी के सामने रखी कम कीमत पर खरीद की शिकायत
करनाल के निसिंग में भी किसानों ने धान की खरीद को लेकर अपनी शिकायत प्रशासन के सामने रखी। किसानों ने डीसी डॉ. आनंद शर्मा को ऐसी पर्चियां दिखाईं, जिनमें पीआर धान की खरीद 2,060 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से दर्ज थी।
किसानों का कहना था कि उनकी फसल में नमी निर्धारित सीमा के भीतर थी, इसके बावजूद उन्हें कम कीमत पर धान बेचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। सरकार की ओर से पीआर धान का निर्धारित भाव 2,461 रुपये प्रति क्विंटल बताया गया है।
कई मंडियों में किसानों का प्रदर्शन
धीमी खरीद और उठान के विरोध में किसानों का प्रदर्शन लगातार तीसरे दिन भी जारी रहा। कैथल की ढांड मंडी में किसानों ने प्रदर्शन किया। एसडीएम संजय कुमार ने मौके पर पहुंचकर किसानों से बातचीत की।
दूसरी ओर, अतिरिक्त अनाज मंडी में आवक बढ़ने के बाद मंडी एसोसिएशन ने गेट बंद कर दिया। इससे धान लेकर पहुंचे किसानों में नाराजगी फैल गई।
सड़क पर धान रखकर रास्ता बाधित करने के मामले में प्रशासन ने 10 आढ़तियों को नोटिस जारी किए हैं। इससे पहले भी 13 आढ़तियों को नोटिस दिए जा चुके हैं। सफीदों और नरवाना में किसानों द्वारा मंडी गेट पर ताला लगाने की भी जानकारी सामने आई है।
राइस मिलर्स के पंजीकरण पर भी नजर
पिछले वर्ष हरियाणा में 1,458 राइस मिलर्स ने सीएमआर का काम किया था। इस वर्ष चार अक्टूबर तक 1,293 राइस मिलर्स के पंजीकरण की जानकारी सामने आई है।
बारिश की संभावित स्थिति के बीच किसानों की मांग है कि मंडियों में पड़ी धान की जल्द खरीद और उठान कराया जाए, ताकि मौसम खराब होने की स्थिति में उन्हें फसल के नुकसान का सामना न करना पड़े।





