थर्माकोल के पेड़ से गणित और कागज से भाषा सिखाते हैं शिक्षक पवन कुमार, नवाचार के लिए मिला राज्य शिक्षक पुरस्कार
यमुनानगर के राजकीय प्राथमिक पाठशाला मिल्क खास के जेबीटी पवन कुमार की अनोखी पहल, कबाड़ से तैयार करते हैं बच्चों के लिए शिक्षण सामग्री
यमुनानगर। आमतौर पर प्राथमिक(पवन कुमार राज्य शिक्षक पुरस्कार) कक्षाओं में गणित और भाषा के पाठ किताबों और ब्लैकबोर्ड तक सीमित रहते हैं, लेकिन राजकीय प्राथमिक पाठशाला मिल्क खास में बच्चों के लिए सीखने का तरीका कुछ अलग है। यहां थर्माकोल का एक पेड़ गणित की कक्षा को रोचक बना देता है और कागज से तैयार सामग्री के जरिए बच्चे भाषा के कठिन शब्दों को आसानी से समझ लेते हैं।
इस अनोखी शिक्षण पद्धति के पीछे विद्यालय के जेबीटी पवन कुमार की मेहनत है। करीब 26 वर्षों की सेवा में उन्होंने बच्चों को रटाने के बजाय उन्हें गतिविधियों और प्रयोगों के माध्यम से पढ़ाने पर जोर दिया। इसी नवाचार और विद्यार्थियों की उपलब्धियों को देखते हुए उन्हें इस वर्ष राज्य शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
बेकार सामान को बनाया पढ़ाई का साधन
पवन कुमार पढ़ाई के लिए महंगी सामग्री पर निर्भर नहीं रहते। थर्माकोल, कागज और घरों में अनुपयोगी पड़ी चीजों से वह ऐसी शिक्षण सामग्री तैयार करते हैं, जिसे बच्चे देखकर और हाथों से इस्तेमाल करके सीख सकें।
गणित पढ़ाने के लिए उन्होंने थर्माकोल का पेड़ तैयार किया है। इसकी पत्तियों और फलों के रूप में कागज से बनी सामग्री लगाई जाती है। बच्चे पहले इन्हें गिनते हैं और फिर इन्हीं के आधार पर जोड़ और घटाव के सवाल हल करते हैं।
इस तरीके से बच्चों के लिए गणित सिर्फ किताब में लिखे अंकों का विषय नहीं रह जाता, बल्कि उन्हें सवाल आसपास दिखाई देने वाली चीजों से जोड़कर समझ आने लगता है।
एक शब्द हटाते ही सामने आ जाता है विपरीतार्थक
भाषा शिक्षण में भी पवन कुमार ने गतिविधि आधारित तरीका अपनाया है। विपरीतार्थक शब्दों को समझाने के लिए उन्होंने ऐसी सामग्री बनाई है जिसमें एक शब्द को हटाने पर उससे संबंधित विपरीत शब्द सामने आ जाता है।
इससे बच्चे केवल शब्द याद करने के बजाय उनके अर्थ और आपसी संबंध को समझते हैं। शिक्षक द्वारा तैयार की गई कुछ सामग्री अभिभावकों को भी दी जाती है, ताकि बच्चे घर पर भी उसी तरीके से अभ्यास कर सकें।
विद्यालय में 61 विद्यार्थी, प्रतियोगिताओं में भी प्रदर्शन
राजकीय प्राथमिक पाठशाला मिल्क खास में वर्तमान में 61 विद्यार्थी पढ़ रहे हैं। स्कूल के बच्चों ने विभिन्न स्तरों पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया है।
विद्यार्थियों ने स्कूल, खंड और जिला स्तर की सांस्कृतिक गतिविधियों, खो-खो, प्रश्नोत्तरी और चित्र देखकर विवरण लिखने जैसी प्रतियोगिताओं में उपलब्धियां हासिल की हैं। शिक्षक के अनुसार, बच्चों की सक्रिय भागीदारी उनके आत्मविश्वास को बढ़ाने में भी मदद करती है।
शिक्षक के साथ समाजसेवा में भी सक्रिय
पवन कुमार का काम केवल कक्षा तक सीमित नहीं है। व्यासपुर में जन्मे पवन करीब एक दशक से मिल्क खास में सेवाएं दे रहे हैं और शिक्षा के साथ सामाजिक गतिविधियों में भी सक्रिय रहते हैं।
उन्होंने वर्ष 2015 में फेरूवाला स्कूल से रक्तदान शिविरों से जुड़ी पहल शुरू की थी। अब तक वह 16 रक्तदान शिविरों में योगदान दे चुके हैं और स्वयं 15 बार रक्तदान कर चुके हैं।
इसके अलावा स्काउट एवं गाइड गतिविधियों के माध्यम से वह बच्चों में सेवा, अनुशासन और राष्ट्रप्रेम जैसे मूल्यों को विकसित करने का प्रयास करते हैं।
किताब से आगे ले जाती है सीखने की यह शैली
पवन कुमार की शिक्षण पद्धति का सबसे खास पहलू यह है कि वह बच्चों को केवल पाठ याद कराने के बजाय उन्हें चीजों के साथ जोड़कर सीखने का अवसर देते हैं।
उनकी कक्षा में गणित पेड़ पर लगे कागज के सेबों के जरिए समझ आता है, जबकि भाषा के शब्द गतिविधि के माध्यम से याद किए जाते हैं। इसी प्रयोगात्मक और रचनात्मक शिक्षण शैली के लिए उन्हें राज्य शिक्षक पुरस्कार मिलना उनकी वर्षों की मेहनत और नवाचार को मिली पहचान के रूप में देखा जा रहा है।





