उत्तर प्रदेश

महाभारत से लगाकर फिरंगियों के जमाने तो मुगलों के नाज नखरे भी झेले हैं इन मंदिरों ने श्रावण मास के पवित्र महीने में लगता है यहां आस्था का सैलाब !

सीतापुर -: लहरपुर संवाद तहसील क्षेत्र लहरपुर के चारों तरफ महाभारत काल से लगाकर मुगल काल तथा ब्रिटिश शासन के समय से पहले के बने शिव मंदिर आपको दिखाई पड़ने लगेगें। नगर के पश्चिम लगभग 20 किलोमीटर दूरी पर हरगांव में एक प्रसिद्ध पौराणिक स्थल बताया जाता है कि इसकी स्थापना अयोध्या के राजा हरिश्चंद्र द्वारा की गई थी। यहां का सूर्यकुंड गौरी शंकर मंदिर और प्राचीन टीले इसकी धार्मिक और ऐतिहासिक पहचान है। महाभारत काल में इसे राजा विराट की नगरी भी कहा जाता है। पांडवों के अज्ञातवास से जुड़े प्रसंग इस मंदिर की आस्था से जुड़े हुए हैं।

वैसे तो कार्तिक मास में पूरा मास यहां पर कतकी का विशाल मेला लगता है किंतु शिवजी का मंदिर होने के कारण यहां पर श्रावण मास में भी भक्तों का आस्था का सैलाब देखते ही बनता है इसी तरह लहरपुर के उत्तर लगभग 3 किलोमीटर बाबा जंगली नाथ का प्रसिद्ध शिव मंदिर है ।जिसका निर्माण आज से लगभग 110 वर्ष पूर्व एक अंग्रेज अधिकारी डब्लू सी जी डन द्वारा रानी पृथ्वी पाल कुवंरि नबी नगर स्टेट की सहायता से कराया गया था। बताते हैं की अंग्रेज़ अधिकारी की मनोकामना पूर्ण होने के बाद इस मंदिर का निर्माण कराया गया था कहां जाता है इससे पूर्व यहां पर घने जंगल हुआ करते थे जंगल में चरवाहों को शिवलिंग मिलने के उपरांत चरवाहों द्वारा उसकी पूजा अर्चना की जाने लगी और फिर अंग्रेज अधिकारी द्वारा मंदिर का निर्माण कराया गया।

ग्रामीणों द्वारा यह भी बताया गया की मंदिर जाने का कोई सही मार्ग न होने के कारण पहले लोगों यहां तक पहुंचने में काफी कठिनाई होती थी बताते हैं इन्हीं रास्तों से गुजरते हुए एक जिलाधिकारी की गाड़ी फंस गई तमाम प्रयासों के बावजूद जब गाड़ी नहीं निकल सकी तो लोगों ने बाबा जंगली नाथ के मंदिर में प्रार्थना करने की बात कही और जैसे ही जिलाधिकारी ने मंदिर में जाकर भगवान शिव का पूजन अर्चन किया उसके तुरंत बाद गाड़ी बाहर निकल गई बाद में केसरीगंज से लगाकर मंदिर तक डामर रोड का निर्माण उक्त जिलाधिकारी द्वारा कराया गया श्रावण मास के पवित्र महीने में पूरा मास भक्तों का सैलाब यहां देखते ही बनता है वैसे तो हर सोमवार को यहां पर भक्तों की भीड़ दिखाई पड़ती है किंतु सावन के अंतिम दिन यानी रक्षाबंधन के दिन यहां पर बहुत विशाल मेला लगता है दूर दूर से लोग यहां पर मन्नतें मांगने आते हैं नगर के पूरब लगभग 10 किलोमीटर दूर सूर्यकुंड कामेश्वर नाथ बाबा का प्रसिद्ध मंदिर है बताया जाता है |

इस मंदिर में श्री रामचरितमानस के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास जी आए थे मान्यता इस तरह की भी है की जो प्रसिद्ध सूर्य कुंड तीर्थ में स्नान करता है उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होकर चर्म रोग समाप्त हो जाते हैं कहा जाता है की मुगल शासक औरंगजेब ने मंदिर पर आक्रमण किया था और जैसे ही सूर्यकुंड मंदिर को लूटने का प्रयास किया गया शिवलिंग से बर्र ततैया के झुंड के झुंड निकलने लगे और औरंगजेब की सेना पर टूट पड़े जिससे औरंगजेब और उसकी सेना बिह्वल होकर भाग खड़ी हुई पवित्र श्रावण मास मैं इन मंदिरों में भक्तों का सैलाब देखते ही बनता है जो लोग आते हैं बताते हैं भगवान शिव की कृपा से उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है

Show More

यह भी जरुर पढ़ें !

Back to top button