उत्तराखंड
जब सभी लोग त्यौहार मनाते हैँ तब अपने परिजनों से दूर आपके साथ रहती है पुलिस
पुलिस के दर्द को और गहराई से समझने के लिए इसे प्रशासनिक दृष्टिकोण और व्यक्तिगत दृष्टिकोण के माध्यम से बेहतर तरीके से समझा जा सकता है। प्रशासनिक और सामाजिक चुनौतियाँ संसाधनों की कमी: थानों में पर्याप्त स्टाफ न होने के कारण एक पुलिसकर्मी को दो या तीन लोगों का काम अकेले संभालना पड़ता है,! कानून-व्यवस्था बनाए रखने या वीआईपी मूवमेंट के कारण उन्हें बिना किसी पूर्व सूचना के घंटों अतिरिक्त खड़े रहना पड़ता है। अच्छे कार्यों के बावजूद, सोशल मीडिया . या फिल्मों में दिखाई जाने वाली छवि के कारण समाज अक्सर उन्हें संशय की नजर से देखता है।
व्यक्तिगत और पारिवारिक प्रभाव के तहत त्योहारों पर अनुपस्थिति काफ़ी कुछ जाहिर करती है,,जब पूरा देश दिवाली या ईद मना रहा होता है, तब पुलिसकर्मी सड़कों पर सुरक्षा व्यवस्था संभाल रहे होते हैं।पारिवारिक उपेक्षा: लगातार व्यस्तता की वजह से वे बच्चों की शिक्षा, माता-पिता की बीमारी या जीवनसाथी की जरूरतों को समय नहीं दे पाते।स्वास्थ्य का नुकसान: अनियमित खान-पान और नींद पूरी न होने के कारण अधिकांश पुलिसकर्मी कम उम्र में ही ब्लड प्रेशर या शुगर जैसी बीमारियों का शिकार हो जाते हैं।यदि सरकार पुलिस सुधार जैसे 8 घंटे की शिफ्ट को सही तरीके से लागू करे और समाज उनके प्रति अपना दृष्टिकोण बदले, तो उनके इस मानसिक और शारीरिक दर्द को काफी हद तक कम किया जा सकता है,!