गुरुग्राम का सेक्टर-51 बना अमोनिया गैस का बड़ा हॉटस्पॉट
पीएम 2.5 और पीएम 10 राष्ट्रीय मानकों से दोगुने से अधिक, अमोनिया स्तर में भी बढ़ोतरी
Haryana: हरियाणा में वायु प्रदूषण की स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है। रैस्पायर लिविंग साइंसेज की एक नई रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि गुरुग्राम का सेक्टर-51 जहरीली अमोनिया गैस का बड़ा हॉटस्पॉट बनकर उभरा है। रिपोर्ट के अनुसार इलाके में कूड़े के बड़े डंपिंग सेंटर और अन्य गतिविधियों के कारण अमोनिया गैस का स्तर लगातार बढ़ रहा है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि राज्य में पीएम 2.5 और पीएम 10 का स्तर राष्ट्रीय मानकों से दोगुने से भी अधिक दर्ज किया गया है। वहीं अमोनिया गैस के स्तर में करीब 8 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई है।
सेक्टर-51 में बढ़ा खतरा
गुरुग्राम के सेक्टर-51 में स्थित कूड़ा डंपिंग सेंटर को अमोनिया गैस बढ़ने का प्रमुख कारण माना गया है। रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2025 में यहां अमोनिया का सालाना औसत स्तर 138.30 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया, जबकि निर्धारित सीमा 100 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर है।
मार्च 2025 के दौरान सेक्टर-51 में लगातार तीन दिनों तक अमोनिया का स्तर 24 घंटे की तय सीमा 400 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से भी ऊपर दर्ज किया गया।
कई शहरों में बढ़ा प्रदूषण
रिपोर्ट में गुरुग्राम, फरीदाबाद, बहादुरगढ़ और मानेसर की दक्षिणी पट्टी को सबसे ज्यादा प्रदूषित क्षेत्र बताया गया है। 2024 से 2026 के बीच 31 निगरानी केंद्रों के आंकड़ों के विश्लेषण में पाया गया कि:
- पीएम 2.5 का औसत स्तर 62.51 से 77.38 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रहा
- राष्ट्रीय मानक: 40 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर
वहीं:
- पीएम 10 का स्तर 123.44 से 141.68 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तक पहुंचा
- तय मानक: 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर
कृषि और पशुधन भी कारण
रिपोर्ट के अनुसार कृषि गतिविधियों और पशुधन से निकलने वाली अमोनिया गैस भी प्रदूषण बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभा रही है। हरियाणा में अमोनिया का औसत स्तर 2024 में 35.75 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर था, जो 2025 में बढ़कर 38.63 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर हो गया।
निगरानी तंत्र लगाने की सिफारिश
रिपोर्ट में हरियाणा में 10 सेंसर आधारित अमोनिया निगरानी तंत्र स्थापित करने की सिफारिश की गई है। इनमें:
- 5 सेंसर गुरुग्राम, फरीदाबाद और सोनीपत जैसे शहरी क्षेत्रों में
- 5 सेंसर हिसार, सिरसा और जींद जैसे पशुधन प्रधान जिलों में लगाने का सुझाव दिया गया है।
रैस्पायर लिविंग साइंसेज के संस्थापक Ronak Sutaria ने कहा कि हरियाणा में अलग अमोनिया मॉनिटरिंग सिस्टम की तत्काल आवश्यकता है, जिसे हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय और कृषि मंत्रालय मिलकर लागू कर सकते हैं।



