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जनता ( public)तक पहुंचे 9000 करोड़, केंद्र की योजनाओं का असर

श्रीनगर. जम्मू और कश्मीर में केंद्र प्रायोजित योजनाओं (सीएसएस) के तहत अब तक का सबसे अधिक धन खपत किया गया है. हाल ही में समाप्त हुए वित्तीय वर्ष में यह जानकारी सामने आई है. एक रिपोर्ट के अनुसार, 2021-22 में, केंद्र शासित प्रदेश को सीएसएस के तहत प्राप्त कुल राशि 7,655 करोड़ रुपये थी, जिसे 2022-23 के दौरान लगभग 15 प्रतिशत की वृद्धि के साथ बढ़ाते 8,938 करोड़ रुपये कर दिया गया था. विशेष रूप से, केंद्र प्रायोजित योजनाओं का लाभ 5 अगस्त, 2019 के बाद कतार में अंतिम व्यक्ति ( public) तक पहुंच रहा है – जब केंद्र ने जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे को निरस्त करने के अपने फैसले की घोषणा की थी.

करीब 70 वर्षों में यह पहली बार है कि लगभग 9,000 करोड़ रुपये बिना किसी बिचौलियों और दलालों के आम आदमी तक पहुंचे हैं क्योंकि डिजिटल लेनदेन ने यह सुनिश्चित किया है कि सरकार और लोगों के बीच कोई तीसरा नहीं आए.

रिपोर्ट में कहा गया है, ‘2019 के बाद प्रभावी तंत्र ने जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित की है. जो पैसा जम्मू-कश्मीर में वहां की जनता के लिए दिया जा रहा है, वह सिर्फ समाज के किसी चुनिंदा वर्ग के लिए नहीं है. अनुच्छेद 370 को निरस्त करने से भाई-भतीजावाद का युग समाप्त हो गया है.’

रिपोर्ट में आगे कहा गया है, ‘1947 से 2019 तक उम्मीद से कम सफलता हासिल करने से लेकर प्रबल दावेदार की स्थिति में पहुंचने तक, जम्मू-कश्मीर जो कि भारत की एक प्रतिशत आबादी है, को करदाताओं का 10 प्रतिशत पैसा मिला, बावजूद इसके प्रदेश की अर्थव्यवस्था नाजुक बनी रही.’

प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया है कि सीएसएस तंत्र के तहत प्रमुख योजनाओं पर अपेक्षित ध्यान दिया जाए. यह पक्का करने के लिए नियमित मूल्यांकन बैठकें आयोजित की जा रही हैं कि ऐसी योजनाओं के मूल उद्देश्य और उनसे सामाजिक उद्देश्यों को हासिल किया जा सके. रिपोर्ट में कहा गया है, ‘इन योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन किया जा रहा है.’

अधिकारियों के अनुसार वित्त वर्ष 2022-23 में विभिन्न योजनाओं के तहत जम्मू-कश्मीर में 2,63,595 लोगों के लिए रोजगार सृजित किया गया. विकास और प्रगति दर्ज करने के विभिन्न मापदंडों के तहत जम्मू-कश्मीर के समग्र प्रदर्शन में पिछले तीन वर्षों के दौरान काफी सुधार हुआ है.

रिपोर्ट में कहा गया है, ‘जिन योजनाओं के तहत रोजगार के अवसर पैदा किए गए हैं उनमें शामिल हैं: प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) के तहत 1,67,932 रोजगार के अवसर, मिशन यूथ के तहत 35,564, जम्मू-कश्मीर राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (जेकेआरएलएम) के तहत 34,200, जम्मू-कश्मीर महिला विकास निगम के तहत 8,457 , हस्तशिल्प और हथकरघा क्षेत्र के तहत 5,331, हिमायत के तहत 2,818, भेड़ पालन के तहत 2,818, एससी/एसटी/ओबीसी निगम के तहत 2,193, राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन के तहत 1576 और दर्जनों अन्य विभिन्न क्षेत्रों के तहत के अलावा कृषि उत्पादन एवं पशुपालन के तहत 2668 रोजगार के मौके मिले.’

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