अब अफगानिस्तान की सांसद चाकल रही है ग्रीस में

तालिबान से बचकर निकलने वाली अफगान महिला सांसदों ने ग्रीस में निर्वासन के दौरान मानवाधिकारों की हिमायत करने के लिए एक नई महिला संसद की शुरुआत की है। करीब आधी महिला अफगान सांसद और सीनेटर मौजूदा वक्त में ग्रीस में रह रही हैं जहां वह अफगानिस्तान में महिलाओं के अधिकारों के लिए अभियान जारी रखेंगी। इसके साथ ही शरणार्थियों के पुनर्वास का समर्थन भी करेंगी। यह रिपोर्ट इंडिपेंडेंट ने दी है।
इस प्रोजेक्ट को शुरू करने वाली पूर्व अफगान सांसद नाजीफा बेक ने मीडिया से बातचीत करते हुए बताया है कि हमारा काम पूरा नहीं हुआ है। हम अफगान लोगों द्वारा उनका प्रतिनिधित्व करने के लिए चुने गए थे। अफगान लोग और खासकर महिलाएं और लड़कियां एक गंभीर मानवीय संकट से गुजर रहे हैं। हम जहां भी होंगे उन लोगों की सेवा करना जारी रखेंगे।
बता दें कि तालिबान द्वारा काबुल पर कब्जा करने से पहले अफगान संसद में 27 फीसद हिस्सा महिला सांसदों का रहा है जिसे वोलेसी जिरगा या हाउस ऑफ द पीपल के रूप में जाना जाता है। ग्रीस में स्थित करीब 28 महिला सांसद इस प्रोजेक्ट का हिस्सा हैं, जो सभी महिला अफगान सांसदों के लिए खुली होगी। इसमें वह महिला सांसद भी शामिल हो सकती हैं जो अभी अफगानिस्तान में हैं या अन्य देशों में हैं। ये सांसद वर्चुअली निर्वासित संसद में भाग ले सकती हैं।
महिला संसद समिति की अध्यक्ष हमीदा अहमदजई ने कहा है कि तालिबान ने कुछ ही हफ्तों में अफगानिस्तान में दो दशकों की प्रगति को नष्ट कर दिया है। हमें अपने लोगों के अधिकारों के लिए लड़ना जारी रखना चाहिए और उन लोगों को बचाना चाहिए जो खतरे में हैं। उन्होंने आगे कहा है कि हम अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तालिबान को वैधता नहीं देने की अपील करते हैं।





