ऋषिकेश में दिव्यांगजनों के लिए बनेगा राज्य का पहला आधुनिक इंडोर बैडमिंटन हॉल , डीएम सविन बंसल की पहल से मेधावी खिलाड़ियों को मिलेगा नया मंच, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चमकने का खुलेगा रास्ता

देहरादून -: जनपद देहरादून में दिव्यांगजनों के लिए खेल सुविधाओं के विस्तार की दिशा में जिला प्रशासन ने एक ऐतिहासिक और सराहनीय पहल की है। राज्य में पहली बार दिव्यांगजनों की विशेष जरूरतों को ध्यान में रखते हुए ऋषिकेश में उनके लिए एक आधुनिक इंडोर बैडमिंटन हॉल का निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया है। जिलाधिकारी सविन बंसल के निर्देशन में शुरू हुई यह महत्वाकांक्षी परियोजना न केवल खेल प्रतिभाओं को मंच देगी, बल्कि दिव्यांगजनों के आत्मविश्वास और सशक्तिकरण को भी नई उड़ान देगी।
जिला प्रशासन ने इस परियोजना के लिए भूमि का चयन कर निर्माण कार्य को गति दी है। इंडोर बैडमिंटन हॉल के निर्माण के लिए जिला खनिज फाउंडेशन मद से कुल 62.67 लाख रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है। इसमें से 25.41 लाख रुपये की पहली किस्त पूर्व में नगर निगम ऋषिकेश को जारी की जा चुकी है, जबकि शेष 37.26 लाख रुपये की अतिरिक्त धनराशि को भी अब मंजूरी दे दी गई है। संशोधित आगणन के अनुसार परियोजना की कुल लागत तय की गई है और निर्माण कार्य पहले ही प्रारंभ हो चुका है।
जिला प्रशासन की इस संवेदनशील पहल से उन प्रतिभाशाली दिव्यांग खिलाड़ियों को बड़ा अवसर मिलेगा, जो अब तक सुविधाओं के अभाव में अपनी क्षमता का प्रदर्शन नहीं कर पा रहे थे। यह आधुनिक बैडमिंटन हॉल ऐसे छुपे हुए सितारों के लिए नया मंच साबित होगा, जहां वे अपने हुनर को निखारते हुए राज्य, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना सकेंगे। प्रशासन का मानना है कि सही संसाधन और उपयुक्त वातावरण मिलने पर दिव्यांगजन खिलाड़ी भी खेल जगत में नई ऊंचाइयों को छू सकते हैं।
जिलाधिकारी सविन बंसल ने कहा कि दिव्यांगजनों के लिए बुनियादी सुविधाओं का विकास जिला प्रशासन की प्राथमिकताओं में शामिल है। यह इंडोर बैडमिंटन हॉल न केवल उनके शारीरिक स्वास्थ्य और खेल कौशल को प्रोत्साहित करेगा, बल्कि उन्हें समाज की मुख्यधारा से मजबूती से जोड़ने का कार्य भी करेगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि परियोजना को समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरा करने के लिए प्रशासन पूरी गंभीरता से कार्य कर रहा है, ताकि दिव्यांगजनों को शीघ्र इसका लाभ मिल सके।
मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में जिला प्रशासन की यह पहल एक मिसाल के रूप में देखी जा रही है। खेल के क्षेत्र में दिव्यांगजनों को आगे बढ़ाने की यह कोशिश निश्चित रूप से कई प्रतिभाओं के लिए उम्मीद की नई किरण बनेगी और उत्तराखंड को दिव्यांगजन खेल सुविधाओं के क्षेत्र में नई पहचान दिलाएगी।
