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Sawan 2026: नारनौल में शुरू हुआ पार्थिव शिवलिंग महाअनुष्ठान, 12 ज्योतिर्लिंगों की पावन मिट्टी से रोज बनेंगे 2100 शिवलिंग

श्रावण मास के शुभारंभ पर महंत तेजादास आश्रम में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विशेष अनुष्ठान शुरू, पवित्र नदियों के जल से होगा रुद्राभिषेक

नारनौल: श्रावण मास 2026 के शुभारंभ के साथ हरियाणा के नारनौल स्थित महंत तेजादास आश्रम में पार्थिव शिवलिंग निर्माण महाअनुष्ठान की शुरुआत हो गई। धार्मिक परंपराओं और वैदिक विधि-विधान के अनुसार शुरू हुए इस विशेष आयोजन में प्रतिदिन ब्रह्ममुहूर्त में 2,100 पार्थिव शिवलिंगों का निर्माण किया जाएगा।

आश्रम परिसर में आयोजित अनुष्ठान का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार और विधिवत पूजन के साथ हुआ। आचार्य क्रांति निर्मल शास्त्री ने यजमानों से पूजा-अर्चना कराकर धार्मिक अनुष्ठान का आरंभ कराया।

12 ज्योतिर्लिंगों और प्रमुख तीर्थों की मिट्टी से बनेंगे शिवलिंग

महंत नंदकिशोर दास महाराज ने बताया कि इस विशेष अनुष्ठान के लिए देश के सभी 12 ज्योतिर्लिंगों की पावन मिट्टी एकत्र की गई है। इनमें रामेश्वरम, केदारनाथ, महाकालेश्वर, ओंकारेश्वर, सोमनाथ, वैद्यनाथ, नागेश्वर, मल्लिकार्जुन, घृष्णेश्वर, त्र्यंबकेश्वर, भीमाशंकर और काशी विश्वनाथ शामिल हैं।

इसके अलावा बद्रीनाथ धाम, द्वारका, मथुरा-वृंदावन, अमरकंटक सहित अनेक प्रमुख तीर्थस्थलों की पवित्र मिट्टी भी अनुष्ठान में उपयोग की जा रही है।

पवित्र नदियों के जल से होगा रुद्राभिषेक

प्रतिदिन तैयार किए जाने वाले पार्थिव शिवलिंगों का अभिषेक देश की प्रमुख पवित्र नदियों के जल से किया जाएगा। इसमें गंगा, यमुना, नर्मदा, गोदावरी, कावेरी, ताप्ती, सरस्वती, क्षिप्रा, कृष्णा नदी तथा प्रयागराज संगम से लाए गए जल का उपयोग किया जाएगा।

श्रावण मास में पार्थिव शिवलिंग पूजा का महत्व

आचार्य क्रांति निर्मल शास्त्री के अनुसार, श्रावण मास में पार्थिव शिवलिंग का निर्माण और विधि-विधान से पूजन हिंदू धार्मिक परंपरा में अत्यंत शुभ और पुण्यदायी माना जाता है। मान्यता है कि श्रद्धा से जलाभिषेक और रुद्राभिषेक करने से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है तथा भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

श्रावण मास के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के इस धार्मिक अनुष्ठान में शामिल होने की संभावना है।

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