Pregnancy Leave:हरियाणा हाईकोर्ट ने TGT शिक्षिका की नौकरी बहाली का दिया आदेश, प्रेग्नेंसी लीव पर नौकरी ख़त्म करना उचित नहीं
चार सप्ताह में नया नियुक्ति पत्र जारी करने का दिया निर्देश, गर्भावस्था में मेडिकल अवकाश मांगने पर संविदा सेवा समाप्त करने पर हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी
चंडीगढ़ : पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने गर्भावस्था के दौरान चिकित्सकीय कारणों (Pregnancy Leave)से मेडिकल अवकाश मांगने वाली एक संविदा टीजीटी (साइंस) शिक्षिका को अंतरिम राहत देते हुए हरियाणा सरकार को चार सप्ताह के भीतर नया नियुक्ति पत्र जारी करने का निर्देश दिया है। अदालत ने प्रथम दृष्टया माना कि केवल मेडिकल आधार पर अवकाश मांगने के कारण सेवा समाप्त करना उचित प्रतीत नहीं होता, जबकि अन्य संविदा शिक्षकों की सेवाएं बढ़ाई गई थीं।
यह अंतरिम आदेश जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ की एकल पीठ ने महिला शिक्षिका की याचिका पर सुनवाई के दौरान पारित किया।
क्या है मामला?
याचिका के अनुसार, शिक्षिका (Pregnancy Leave)की नियुक्ति 16 मार्च 2024 को हरियाणा कौशल रोजगार निगम (HKRNL) के माध्यम से सरकारी वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, चांदपुर में टीजीटी (साइंस) के पद पर हुई थी।
गर्भावस्था के दौरान चिकित्सकीय जटिलताओं के चलते डॉक्टरों ने उन्हें लंबे समय तक बेड रेस्ट की सलाह दी। इसके बाद उन्होंने 9 अक्टूबर 2025 को मेडिकल अवकाश के लिए आवेदन किया। आरोप है कि अवकाश पर निर्णय लेने के बजाय 16 मार्च 2026 को उनकी संविदा सेवा समाप्त कर दी गई।
अदालत ने क्या कहा?
हाई कोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में कहा कि उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर प्रथम दृष्टया यह प्रतीत होता है कि शिक्षिका ने वास्तविक चिकित्सकीय परिस्थितियों के कारण अवकाश मांगा था। साथ ही, यदि अन्य समान पदों पर कार्यरत संविदा शिक्षकों की नियुक्ति अवधि बढ़ाई गई और केवल याचिकाकर्ता की सेवा समाप्त की गई, तो यह समानता के सिद्धांत के अनुरूप नहीं दिखता।
अदालत ने संबंधित अधिकारी को चार सप्ताह के भीतर नया नियुक्ति पत्र जारी करने तथा दो सप्ताह के भीतर शिक्षिका को कार्यभार ग्रहण कराने का निर्देश दिया।





