लखनऊ में विवादित ढांचे में धार्मिक गतिविधियों पर पुलिस ने लगाई रोक, न होगी नमाज और न पूजा
1.गांव में तनाव, शनिवार को किसी पक्ष को ढांचे के आसपास नहीं जाने दिया गया 2.कसमंडी में विवादित स्थल पर पीएसी की तैनाती, एसआई से जांच कराने की मांग

लखनऊ। मैंगो बेल्ट मलिहाबाद के कसमंडी में विवादित ढांचे में प्रशासन ने कानून-व्यवस्था को देखते हुए फिलहाल अगले आदेश तक किसी तरह की धार्मिक गतिविधियों पर रोक लगा दी है। शुक्रवार को गांव में विवादित ढांचे को मकबरा बताते हुए सैकड़ों लोग नमाज पढ़ने पहुंचे थे जिसके बाद आज दूसरा पक्ष भी हनुमान चालीसा पढ़ने की मांग कर रहा था।
उस क्षेत्र में तनावपूर्ण हालात को देखते हुए प्रशासन ने कानून-व्यवस्था कायम रखने के लिए आज ढांचे के आसपास बड़ी संख्या में पीएसी बल को तैनात कर दिया। डीएम विशाख जी और संयुक्त पुलिस आयुक्त आयुक्त बबलू कुमार ने शनिवार को एसडीएम और डीसीपी से बात कर हर हाल में हालात काबू में बनाए रखने के निर्देश दिए। पुलिस और प्रशासन के अधिकारी लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
संयुक्त पुलिस आयुक्त एवं कानून व्यवस्था बबलू कुमार ने बताया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए यथास्थिति कायम रखने के निर्देश दिए गए हैं। किसी को भी ऐसा काम नहीं करने दिया जाएगा जिससे किसी तरह का तनाव फैले। मलिहाबाद प्रभारी सुरेंद्र सिंह भाटी ने बताया कि विवादित ढांचों के पास पीएसी तैनात कर दी गई और किसी पक्ष को किसी तरह धार्मिक अनुष्ठान करने नहीं दिया जाएगा।
सूरज पासी सैकड़ों समर्थकों के साथ शनिवार को मौके पर पहुंचे लेकिन पुलिस ने ढांचे के पास नहीं जाने दिया। सूरज का दावा है कि ढांचे की दीवारों पर कलश, नाग और फूल की आकृतियां बनी है जिससे स्पष्ट है कि यह हमारे राजपासी राजा कंस का बनाया मंदिर था। अगर हमारे पूर्वजों का शिव मंदिर नहीं छोड़ा गया तो हम लोग आंदोलन करेंगे। सूरज का कहना है कि मंदिर में नमाज पढ़ने से रोका जाए।
स्थल अब तक संरक्षित नहीं
विवादित स्थल के बगल में रहने वाली अस्सी वर्षीय रामदेवी का कहना है कि पहले यहां चारों तरफ घना जंगल था और कोई आता-जाता नहीं था। अब कुछ दिनों से बाहरी लोग नमाज पढ़ने के लिए लगे हैं। स्थानीय निवासी पंकज का कहना है कि हमारे पूर्वज बताते थे कि यहां पर राजा कंस का मंदिर था।
स्थानीय निवासी मुहम्मद मोइन ने बताया हम लोग काफी समय से यहां नमाज पढ़ते चले आ रहे हैं। यह हमारा मकबरा और मस्जिद है। वहीं पुरातत्व निदेशालय का कहना है कि यह स्थल अब तक संरक्षित नहीं हैं। इस संबंध में अब तक किसी तरह का पत्राचार भी नहीं मिला है। अगर प्रशासन की तरफ से पत्र मिलेगा तो स्थल की जांच की जाएगी।