अपराधियों को बचाने के लिए नैनी पुलिस ने अदालत में नहीं भेजी फाइनल रिपोर्ट !
प्रयागराज -: ( नैनी) -: बुलडोजर से मकान तोड़ने, घर-गृहस्थी का सामान नष्ट कर पीड़ितों पर जानलेवा हमला करने वाले अतीक गिरोह के गुर्गों के खिलाफ नैनी थाने में एफआईआर तो दर्ज हुई, लेकिन नैनी पुलिस ने आज तक अपराधियों को न तो गिरफ्तार किया और न ही अदालत में केस की फाइनल रिपोर्ट भेजी।
भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी में लिप्त नैनी थाने में तैनात रहे उपनिरीक्षक तत्कालीन नैनी चौकी इंचार्ज श्री बदरुद्दीन कि इस कार्रवाई से नैनी पुलिस की छवि धूमिल हुई। भुक्तभोगी वरिष्ठ पत्रकार विनय मिश्र ने इस मामले में उच्च अधिकारियों से कार्रवाई की मांग की है।
घटना का विवरण यह है कि गत 13 दिसंबर 2005 को दोपहर 3:00 बजे कई असलहाधारी बदमाशों ने रिफ्यूजी कॉलोनी, नैनी, प्रयागराज स्थित एक मकान पर धावा बोला और बुलडोजर से मकान को तोड़कर कब्जा करने की कोशिश की। घर खाली कराने के लिए छोटे बच्चों को बुलडोजर से कुचल दिया। घर गृहस्थी का सारा सामान नष्ट करने के अलावा लूटपाट भी की। जानलेवा हमला हुआ। लोगों को बंधक बनाकर गालियां दी और लाठी डंडों से बर्बरतापूर्वक पीटा। जान से मारने की धमकी देते हुए मकान पर कब्जा कर लेने की कोशिश की गई। जिसमें तीन नामजद व अन्य एक दर्जन अज्ञात बदमाश शामिल थे। अज्ञात बदमाशों की पहचान भरत लाल विश्वकर्मा, बीके यादव के रूप में हुई है। बाकी अन्य की पहचान बाकी है।
मुकदमा दर्ज होने के बाद तत्कालीन विवेचना अधिकारी उप निरीक्षक नैनी चौकी प्रभारी, थाना नैनी श्री राम नरेश सिंह राठौर ने मौका मुआयना किया। इसमें प्रथम दृष्टया मकान को बुलडोजर से गिराने की पुष्टि हुई। प्रथम विवेचना अधिकारी श्री रामनरेश सिंह राठौड़ ने घटना को सत्य पाकर अपराध होने की पुष्टि की और विवेचना में 147, 148, 149, 342, 440, 504,307, 506, 427 आईपीसी की धाराएं भी बढ़ा दी। नक्शा नजरी बनाते समय भी मकान के मलबे की पुष्टि प्रथम विवेचना अधिकारी द्वारा की गई। पीड़ित पक्षकारों तथा अन्य लोगों के बयान धारा अंतर्गत 161 के अंतर्गत दर्ज किए गए, जो विवेचना में अंकित है।
विवेचना में प्रथम विवेचना अधिकारी श्री रामनरेश सिंह राठौड़ जी ने मुख्य अभियुक्त के बारे में विवेचना में ही यह कथन अंकित कर दिया था कि हमलावर राजनीतिक व्यक्ति है और अपने रसूख का इस्तेमाल करके मनमाफिक विवेचना कराना चाहते हैं। श्री राम नरेश राठौर का इन अपराधियों ने स्थानांतरण करवा दिया और उनकी जगह आए नये नैनी चौकी इंचार्ज श्री बदरुद्दीन ने मामले पर लीपापोती कर दी। उन्होंने एफआईआर की चार्जशीट फाइनल रिपोर्ट न्यायालय में नहीं भेजी।
पीड़ित पक्ष के सारे मूल कागजात भी उन्होंने गायब कर दिए। एफआईआर दर्ज होने के 20 साल बाद भी पुलिस न तो आरोपियों को पकड़ रही है। न ही चार्जशीट फाइनल रिपोर्ट कोर्ट में भेज रही है। एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस के लिए जांच पूरी करके कोर्ट में फाइनल रिपोर्ट भेजना कानूनी रूप से अनिवार्य है। लेकिन पुलिस ने अपराधियों को गिरफ्तारी से बचाने के लिए न्यायालय में कोई रिपोर्ट ही नहीं भेजी।



